आगरा में DDA मेंटेनेंस एजेंसी पर ₹27 लाख के गबन का आरोप: मालिक अमित जायसवाल के खिलाफ FIR दर्ज

आगरा। आगरा के ताजगंज थाना क्षेत्र स्थित शंकर ग्रीन सोसाइटी में DDA मेंटेनेंस एजेंसी पर धोखाधड़ी और गबन का गंभीर आरोप लगा है। सोसाइटी के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) की अध्यक्ष मनीषा सिंह ने इस मामले में एजेंसी के प्रोपराइटर अमित कुमार जायसवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है । आरोप है कि एजेंसी ने निवासियों से ₹27 लाख से अधिक का बिजली बिल वसूलने के बाद उसे जमा नहीं किया, जिसके कारण सोसाइटी पर बिजली कनेक्शन कटने का खतरा मंडरा रहा था । यह रिपोर्ट भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 316(2) के तहत 23 अगस्त 2025 को दर्ज की गई है । सेवाओं में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता शिकायत के मुताबिक, DDA मेंटेनेंस एजेंसी ने 15 अगस्त 2024 से शंकर ग्रीन सोसाइटी को सेवाएं देना शुरू किया था । एजेंसी ने निवासियों से ₹2.5 प्रति वर्ग फुट के हिसाब से मेंटेनेंस चार्ज लिया, लेकिन इसके बदले में दी जा रही सुविधाएं बहुत ही निम्न स्तर की थीं । RWA का आरोप है कि सोसाइटी में रोजाना लिफ्ट दुर्घटनाएं होती रहती थीं, जिसकी शिकायतें बार-बार करने के बावजूद कोई सुधार नहीं किया गया । इसके अलावा, सोसाइटी के लगभग 55-60 कर्मचारियों का मई 2025 का वेतन भी एजेंसी ने नहीं दिया था । सबसे गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। RWA ने आरोप लगाया है कि एजेंसी ने निवासियों से अप्रैल और मई 2025 का बिजली का बिल वसूल लिया था, लेकिन इसे टोरेंट पावर लिमिटेड को जमा नहीं कराया । टोरेंट पावर से RWA को सूचना मिली कि लगभग ₹27 लाख का बिजली बिल बकाया है, और अगर यह 30 मई 2025 तक जमा नहीं हुआ तो कनेक्शन काटा जा सकता है । धोखाधड़ी का आरोप और फर्जी रसीदें शिकायत पत्र में यह भी बताया गया है कि DDA एजेंसी ने धोखाधड़ी की थी । साल 2024 के अगस्त महीने में एजेंसी ने जिस फर्म के नाम पर रसीदें दी थीं, उसका नाम DDA एडवांस फैसिलिटी था । इस फर्म का GSTIN नंबर भी था, लेकिन यह अमित कुमार जायसवाल के नाम पर पंजीकृत नहीं था । इसके अलावा, एजेंसी ने RWA के साथ जो एग्रीमेंट किया था, वह भी रजिस्टर्ड नहीं था और उसमें एग्रीमेंट लागू होने की कोई तारीख भी नहीं थी । पुलिस से की त्वरित कार्रवाई की मांग RWA अध्यक्ष मनीषा सिंह ने पुलिस कमिश्नर को भेजे गए पत्र में बताया था कि वे पिछले दो महीनों से कानूनी कार्रवाई के लिए प्रयास कर रहे थे, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया । उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच कर आरोपी को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और निवासियों से वसूली गई राशि वापस कराई जाए । यह मामला शहर की एक हाई-राइज सोसाइटी से जुड़ा है जिसमें लगभग 250 परिवार रहते हैं । पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अब इस पर आगे की जांच कर रही है ।

DVVNL के बाबू ने अपने और साथियों के खाते में डाले ₹2 करोड़: सातवें वेतन आयोग का बकाया बताकर किया फर्जीवाड़ा, निलंबित

आगरा। आगरा में दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (डीवीवीएनएल) के एक बाबू को करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। बाबू ने सातवें वेतन आयोग का बकाया बताकर लगभग दो करोड़ रुपये अपने और अपने दो अन्य साथियों के बैंक खातों में जमा करवा लिए थे। यह मामला विभाग के आंतरिक ऑडिट में सामने आया। ऑडिट में हुआ खुलासा, तीन कर्मचारियों को मिला सामान्य से अधिक एरियर पिछले कुछ दिनों से डीवीवीएनएल में आय-व्यय का ऑडिट चल रहा था। इसी दौरान एक लेखाकार ने अधिकारियों को बताया कि तीन कर्मचारियों के अकाउंट में सामान्य से कहीं ज्यादा एरियर की राशि भेजी गई है। इसके बाद अधिकारियों ने मामले की गहन जांच के आदेश दिए। जांच में पता चला कि कमला नगर स्थित टेस्ट डिवीजन में वेतन बनाने का काम करने वाले टीजी-2 पवन कुमार ने मार्च 2024 से मई 2025 के बीच सातवें वेतन आयोग के एरियर के बहाने अपने खाते में 1.18 करोड़ रुपये जमा करा लिए। इसके अलावा, उन्होंने एक अन्य कर्मचारी पिंकी देवी के खाते में 63 लाख रुपये और सफाई कर्मचारी चिंगी राम के खाते में 17 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी करवा दिया। पिंकी और चिंगी ने पैसे लौटाने की कही बात, पवन कुमार ने नहीं मानी गलती जांच के दौरान पिंकी और चिंगी ने अपने खातों में आए अतिरिक्त भुगतान को वापस करने की बात कही और पोस्ट डेटेड चेक भी दिए। लेकिन पवन कुमार ने अपनी गलती मानने से इनकार कर दिया। वह अधिकारियों के सवालों के जवाब देने की बजाय आनाकानी करते रहे और सवालों को घुमाते रहे। इसके बाद, विभाग ने पवन कुमार को तत्काल निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही, उनके खिलाफ स्थानीय थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया गया है। विभाग ने कहा है कि पवन कुमार के वेतन और फंड से इस राशि की वसूली की जाएगी। यह घटना सरकारी विभागों में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल उठाती है। और खबरें भी हैं…

आगरा में बालूगंज पुलिस चौकी सस्पेंड: चौकी इंचार्ज समेत 8 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज, लूट के मामले में ‘सेटिंग’ की चर्चा

आगरा। आगरा के थाना रकाबगंज की बालूगंज चौकी पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। चौकी इंचार्ज समेत 8 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, और पूरी चौकी को सस्पेंड कर दिया गया है। एसपी सिटी सोनम कुमार ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। लापरवाही या ‘सेटिंग’ का नतीजा? आधिकारिक तौर पर बताया गया है कि यह कार्रवाई बेहतर पुलिसिंग में फेल होने, अपराध रोकने में नाकामी और कार्य में लापरवाही के चलते की गई है। हालांकि, पुलिस महकमे में और शहर में यह चर्चा गर्म है कि यह एक्शन लूट के एक मामले में पुलिसकर्मियों द्वारा ‘सेटिंग’ करने को लेकर हुआ है। बताया जा रहा है कि 23 जुलाई को जंगजीत नगर निवासी राकेश का मोबाइल लूट लिया गया था। यह घटना पुलिस कमिश्नर के आवास से आगे माल रोड पर हुई थी, जो एक संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। इस मामले में पुलिस ने एक दिन के भीतर ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया था। लेकिन, अब यह चर्चा सामने आ रही है कि इस गिरफ्तारी में कुछ ‘सेटिंग’ या समझौता किया गया था, जिसके बाद ही यह बड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस कमिश्नर आवास के करीब हुई लूट की घटना और उसमें कथित ‘सेटिंग’ की चर्चा ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद यह निलंबन की कार्रवाई की गई है। पुलिस फिलहाल मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

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