Agra News Today: बटेश्वर मेले में ‘नदी सम्मेलन’ कराने की मांग, उटंगन नदी को बचाने की पहल तेज

AGRA NEWS TODAY सिविल सोसायटी ऑफ आगरा ने जिला पंचायत अध्यक्ष से मांग की है कि बटेश्वर मेले में होने वाले आयोजनों में उटंगन नदी पर केन्द्रित ‘नदी सम्मेलन’ भी शामिल किया जाए।

आगरा की सिविल सोसायटी ने एक बार फिर उटंगन नदी के संरक्षण और इसके महत्व पर जोर दिया है। संगठन के सचिव अनिल शर्मा ने जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाले बटेश्वर मेले में विशेष तौर पर ‘नदी सम्मेलन’ आयोजित किया जाए। उनका कहना है कि इस सम्मेलन के जरिए जनता को भूजल स्तर गिरने, नदी जल प्रबंधन और शुद्ध जल आपूर्ति जैसे मुद्दों पर जागरूक करना बेहद जरूरी है।

उटंगन नदी का महत्व

सिविल सोसायटी का मानना है कि उटंगन नदी आगरा जनपद की जीवनरेखा है। रेहावली गांव (फतेहाबाद तहसील) और रीठे गांव (बाह तहसील) के बीच मानसून काल में पानी रोककर लाखों घन मीटर पानी का भंडारण किया जा सकता है। इससे न केवल बटेश्वर मंदिर के घाटों को शुद्ध जल मिलेगा, बल्कि आस-पास के क्षेत्रों में भूमिगत जल स्तर और गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

विशेष रूप से कार्तिक पूर्णिमा, शिवरात्रि और सोमवार के दिनों पर बटेश्वर घाटों पर शुद्ध जल की भारी आवश्यकता होती है। ऐसे में प्रस्तावित बांध और नदी प्रबंधन योजनाएं धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अहम साबित होंगी।

भूजल संकट पर असर

सिविल सोसायटी ने यह भी कहा कि शमसाबाद, फतेहाबाद, पिनाहट और बाह ब्लॉक के क्षेत्र वर्तमान में अति दोहित श्रेणी में हैं। गिरते जलस्तर के कारण यहां हैंडपंप सूख चुके हैं। अगर रेहावली बांध और मानसून जल प्रबंधन योजनाओं पर काम हुआ, तो इन क्षेत्रों के भूजल स्तर को स्थिर किया जा सकेगा।

जिला पंचायत अध्यक्ष की पहल

इससे पहले जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने ऐलान किया था कि उटंगन नदी के डूब क्षेत्र का चिन्हांकन किया जाएगा और वहां खूंटी लगवाई जाएगी। उन्होंने सिंचाई विभाग को निर्देश भी दिए हैं कि मानसून कालीन जलभराव क्षेत्र की नवीनतम जानकारी लेकर चिन्हांकन शुरू किया जाए। डॉ. भदौरिया ने यह भी कहा था कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर रेहावली बांध निर्माण का मुद्दा उठाएंगी।

पर्यावरणीय चुनौतियाँ

बदलते पर्यावरणीय हालात में आगरा को अब एक क्लाइमेट चेंज ज़ोन के रूप में देखा जा रहा है, जहां अप्रत्याशित वर्षा की संभावना बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नदी प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में बाढ़ और सूखे जैसी समस्याएं एक साथ सामने आ सकती हैं।

सिविल सोसायटी की सक्रिय भूमिका

सिविल सोसायटी ऑफ आगरा लगातार उटंगन नदी को बचाने के लिए अभियान चला रही है। संगठन के सचिव अनिल शर्मा का कहना है –
“हमारा उद्देश्य केवल नदी को बचाना ही नहीं, बल्कि आगरा जनपद को भूजल संकट से बाहर निकालना भी है। अगर बटेश्वर मेले में नदी सम्मेलन होगा, तो हजारों लोग एक साथ जागरूक होंगे और सरकार पर भी योजनाओं को लागू करने का दबाव बनेगा।”

भविष्य की उम्मीद

यदि जिला प्रशासन और सरकार ने समय रहते पहल की, तो उटंगन नदी का संरक्षण न केवल बटेश्वर जैसे धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाएगा, बल्कि किसानों और ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी साबित होगा।

आगरा में उटंगन नदी पर बांध की मांग ने पकड़ा जोर, सिविल सोसायटी ने इंजीनियर के तर्कों को बताया भ्रामक

Abhimanyu Singh

Related Posts

महिला डॉक्टर से अभद्रता मामले में 2 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल

आगरा के थाना न्यू आगरा अंतर्गत अमर विहार स्थित ट्यूलिप पैराडाइज सोसाइटी में एक महिला डॉक्टर के साथ फ्लैट के बाहर आकर गाली-गलौज, अभद्रता और धमकी देने के चर्चित मामले…

Akhilesh Yadav ki giraftari ke virodh mein Agra ke Bijlighar Chauraha par SP ka pradarshan

Purv ghoshit karyakram ke tahat jute karyakarta Samajwadi Party ke rashtriya adhyaksh Akhilesh Yadav ki giraftari ke virodh mein Budhwar ko Agra ke Bijlighar Chauraha par SP ke neta aur…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights