आगरा, बुधवार, 16 जुलाई, 2025, 21:05 बजे
आगरा की सबसे महत्वपूर्ण जल संचय संरचना और फतेहपुर सीकरी विश्वदाय स्मारक समूह का अभिन्न भाग, ‘तेरह मोरी बांध’, मौजूदा मानसून सत्र में भी जल शून्य स्थिति में है। जहां भरपूर बारिश के चलते फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के अधिकांश छोटे-बड़े तालाब और पोखर पानी से लबालब हैं, वहीं यह ऐतिहासिक बांध पूरी तरह खाली पड़ा हुआ है। उत्तर प्रदेश के एकमात्र हेरिटेज सूची में दर्ज इस बांध की मौजूदा बदहाली का सिविल सोसायटी आगरा ने जायजा लिया है और इसके रखरखाव के लिए प्रशासन व पुरातत्व अधीक्षण से निवेदन किया है।
क्षतिग्रस्त गेटों के कारण नहीं रुक रहा पानी, बांध की मौजूदा स्थिति चिंताजनक
सिविल सोसायटी आगरा द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण में पता चला है कि राजस्थान से आने वाले पानी के अभाव के बावजूद, स्थानीय जलग्राहक क्षेत्र का भरपूर पानी बांध तक पहुंचा, लेकिन बिना ठहरे ही डिस्चार्ज होता रहा। इसका मुख्य कारण तेरह मोरी बांध के मूल स्ट्रक्चर के सात गेटों में से किसी का भी फंक्शनल न होना है। जानकारी के अनुसार, 1964 तक बांध में तेरह सैल्यूस गेट थे, जिनमें से केवल छह ही संचालन योग्य बचे थे, लेकिन अब उनमें से भी कोई काम नहीं कर रहा है। परिणामस्वरूप, जो भी पानी तेरह मोरी बांध में पहुंचता है, वह बिना रुके सीधे नदी में बह जाता है।
अकबरकालीन संरचना का रख-रखाव और वर्तमान चुनौतियाँ
अकबर के समय में निर्मित यह बांध, राजस्थान की ओर से आने वाले पानी के अलावा स्थानीय जलग्राही क्षेत्र की बड़ी जलराशि को भी संचित करता था। एक ओर फतेहपुर सीकरी स्मारक और दो ओर पहाड़ी ढालों से घिरी इस जल संरचना का अपना एक विशाल वाटरशेड है। राजस्थान द्वारा अजान बांध से उस पानी का आना रोका हुआ है, जो बृजेंद्र सिंह मोरी (राजा बृजेंद्र सिंह बैराज) से डिस्चार्ज होकर खारी नदी की शुरुआत करता है। यह एक प्राकृतिक जलवाहक संरचना है, जो फतेहपुर सीकरी के पाली पतसाल गांव से होकर बांध तक पहुंचती है। आगरा-भरतपुर रोड से खनुआ गांव को जोड़ने वाली रोड पर पाली पतसाल गांव में पानी के लिए पक्की पुलिया बनी हुई है। राजस्थान द्वारा पानी रोक लिए जाने के बावजूद, जब भी भारी वर्षा होती है, बृजेंद्र मोरी के डाउन के बड़े क्षेत्र का पानी पुलिया होकर बांध तक पहुंचता है। मौजूदा मानसून सत्र में भी तीन-चार बार पुलिया पर पानी का उफान देखा गया है।
बांध का रख-रखाव उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के तृतीय मंडल सिंचाई कार्य आगरा (अधिशासी अभियंता आगरा नहर) के तहत आता है। लेकिन इसके अनुरक्षण और मरम्मत के लिए शायद ही कभी शासन से धन की मांग की गई हो। जन प्रतिनिधियों की उदासीनता भी इसकी एक प्रमुख वजह रही है। वर्तमान में, बांध के जल डूब क्षेत्र के लिए उपयोग होने वाले भाग में खरीफ की खेती करवाई जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप जो पानी किसी प्रकार पहुंचता भी है, हितधारक उसकी निकासी कर डालते हैं, जिससे बांध कभी भर नहीं पाता।
‘पानी न आना अर्ध सत्य’: स्थानीय जलस्रोत हैं पर्याप्त
जब भी तेरह मोरी बांध के भराव को पुनः शुरू करने की बात कही जाती है, तो ‘राजस्थान से पानी आना बंद हो गया है’ जुमला एक तकिया कलाम के रूप में इस्तेमाल कर इस मांग को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया जाता है, जबकि हकीकत इससे अलग है।
राजस्थान से पाली पत्साल पुलिया (भरतपुर-खनुआ रोड) होकर तेरह मोरी बांध में पानी का आना अब भी जारी है, हालांकि इसमें अब अजान बांध से मिलने वाला पानी नहीं होता। जब भी 5 मिमी से अधिक बारिश होती है, पत्साल पुलिया होकर बड़ी मात्रा में जलराशि तेरह मोरी बांध में पहुंचती है। बांध का स्थानीय जलग्राही क्षेत्र लगभग 24 वर्ग किलोमीटर का है, जिसमें वर्षा के दौरान समय-समय पर फूटती रहने वाली धाराओं का ‘वाटरशेड’ भी है। अगर बांध के सैल्यूस गेटों को कार्यात्मक करवा दिया जाए, तो तमाम नकारात्मक स्थितियों के बावजूद एक बड़ी जलराशि नियंत्रित उपयोग के लिए बांध में संचित रखी जा सकती है।
भूगर्भ जल रिचार्ज के लिए अत्यंत उपयोगी
तेरह मोरी बांध, फतेहपुर सीकरी विकासखंड के गांवों के अलावा अछनेरा विकासखंड के अधिकांश गांवों के भूगर्भ जल रिचार्ज के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये सभी गांव अतिदोहित श्रेणी के हैं। जब तक खारी नदी में पानी की भरपूरता रही, जलस्तर और गुणवत्ता उपयुक्त बनी रही। भरतपुर के चिकसाना ड्रेन का पानी अब भी खारी नदी में भरपूरता के साथ पहुंचता है, हालांकि एक नया बांध स्ट्रक्चर बनाकर राजस्थान सरकार ने इसे भी रोकने की कोशिश की है, किंतु मैदानी इलाका होने से गांवों को डूब से बचाने के लिए गेटों से पानी को डिस्चार्ज करना पड़ता है।
सिविल सोसायटी ऑफ आगरा की मांग: हेरिटेज स्ट्रक्चर को बचाया जाए
सिविल सोसायटी ऑफ आगरा के सेक्रेटरी अनिल शर्मा, सदस्य राजीव सक्सेना और असलम सलीमी ने पतसाल, पनचक्की, चिकसाना और श्रृंगारपुर आदि क्षेत्रों का भ्रमण कर प्रशासन से अपेक्षा की है कि तेरह मोरी बांध के स्ट्रक्चर को दुरुस्त करवाकर गेटों को फंक्शनल करवाया जाए। इसके लिए तृतीय मंडल सिंचाई कार्य आगरा के अधिशासी अभियंता आगरा नहर को निर्देशित किया जाए। हेरिटेज स्ट्रक्चर होने के कारण, यदि आवश्यक हो, तो पुरातत्व अधीक्षण से भी अनुमति लेने की मांग की गई है।
सोसायटी का मानना है कि राजस्थान से उत्तर प्रदेश के भाग का पानी मिलना बंद हो जाने के बाद की मौजूदा स्थितियों को देखते हुए, बांध का लगभग 19 वर्ग किलोमीटर का स्थानीय कैचमेंट एरिया को जलवाहिकाएं आदि बनवाकर व्यवस्थित करवाया जाए, जिससे मानसून की उफानों का एक-एक बूंद बांध में पहुंचना सुनिश्चित हो सके। साथ ही, पहाड़ियों से फूटने वाली जलधाराओं के वाटरशेड को संचय के अधिक अनुकूल बनवाया जाए। इन जलधाराओं का पानी अपने स्वाभाविक ढालों से बहकर बांध तक पहुंचता है। तकनीकी जानकारों के निर्देशन में उपरोक्त दोनों ही कार्य मनरेगा के तहत हो सकते हैं।
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