16 जुलाई, 2025, 21:05 बजे
आगरा में जल संरक्षण और सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने जिला सिंचाई बंधु की बैठक में सिंचाई विभाग के अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। इनमें राजस्थान सीमा पर स्थित कोट बांध के रेगुलेटर की मरम्मत के लिए राजस्थान सरकार से संपर्क साधने और फतेहाबाद विकासखंड के रेहावली गांव में उटंगन नदी पर बांध बनाने की कार्य योजना तैयार करने के निर्देश प्रमुख हैं।
डॉ. भदौरिया ने जोर दिया कि कोट बांध का पानी क्षेत्र के लिए उपयोगी है, लेकिन क्षतिग्रस्त रेगुलेटर के कारण यह बाढ़ का कारण भी बन सकता है, इसलिए इसकी तत्काल मरम्मत ज़रूरी है।
रेहावली बांध परियोजना: भूगर्भ जल रिचार्ज और नदी पुनर्जीवन का लक्ष्य
जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने सिंचाई विभाग के लोअर खंड आगरा कैनाल के अधिशासी अभियंता को फतेहाबाद विकासखंड के रेहावली गांव में उटंगन नदी पर बांध बनाने के लिए कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि यह योजना मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाई जा चुकी है और इस संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता, अनुसंधान एवं नियोजन खंड, अलीगढ़ द्वारा आगरा कैनाल के लोअर खंड के साथ संयुक्त सर्वेक्षण भी किया जा चुका है।
सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा ने डॉ. मंजू भदौरिया से आग्रह किया है कि जनपद की यह बहु-उपयोगी रेहावली बांध योजना का शीघ्र प्रस्ताव तैयार करवाकर शासन को अग्रसरित करवाया जाए। यह जनपद की एकमात्र चिन्हित योजना है जिसके क्रियान्वित होने पर शासन की नीति के अनुरूप भूगर्भ जल रिचार्ज, जल संचय और नदी पुनर्जीवित (River rejuvenation) करने जैसे कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों को पूरा किया जा सकेगा।
सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की ओर से बताया गया कि यमुना नदी के लो फ्लड लेवल पर पहुंचने के साथ ही उटंगन में पानी बैक मारने लगता है। इसके साथ ही अपस्ट्रीम से भी खारी, पार्वती, डब्ल्यू डी ड्रेन, जगनेर की बंधियों के डिस्चार्ज आदि से बनने वाले बड़े वाटरशेड का भी इसमें योगदान रहता है। बांध बनने से इस पानी को किसानों की जरूरत के अनुरूप उपयुक्त समय तक रोका जा सकेगा। यह विशाल जल संचय बटेश्वर तीर्थ के ‘नाहन पर्वों’ पर यमुना नदी में फ्रेश वाटर के रूप में जरूरत के मुताबिक डिस्चार्ज भी किया जा सकता है।
गौरतलब है कि रेहावली बांध योजना के क्रियान्वयन के संबंध में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता, अनुसंधान एवं नियोजन खंड, अलीगढ़ द्वारा अपनी टीम के साथ रेहावली गांव जाकर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अनुसंधान एवं नियोजन खंड अलीगढ़ के इंजीनियरों की टीम द्वारा मई 2024 के अंतिम सप्ताह में अध्ययन किया जा चुका है, लेकिन इसके बाद की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी है। विंध्य पहाड़ी श्रृंखला के राजस्थान के करौली की पहाड़ियों से निकलने वाली उटंगन नदी लगभग 288 किलोमीटर बहते हुए रेहावली गांव में यमुना नदी में समाहित होती है। राजस्थान की सीमा को यह खनुआ गांव के डाउन में छोड़कर उत्तर प्रदेश की सीमा में सिरौली गांव (फतेहपुर सीकरी विकासखंड) से प्रवेश करती है।
कोट बांध के सैल्यूस गेट की मरम्मत और जगनेर की बंधियों की ड्रोन मैपिंग
डॉ. भदौरिया ने जगनेर की जल संचय संरचनाओं के अनुकूलता वाले कोट बांध (धौलपुर जनपद) के सैल्यूस गेट की मरम्मत करने के लिए तत्काल राजस्थान सरकार से संपर्क करने को निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि कोट बांध का पानी उपयोगी है, किंतु रेगुलेटर क्षतिग्रस्त होने से बाढ़ का कारण भी बन सकता है।
सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा ने जगनेर की 34 बंधियों की जलभरपूरता की स्थिति की जानकारी के लिए ड्रोन सर्वेक्षण करवाने का भी आग्रह किया। इसके साथ ही जगनेर बंधियों के शीर्ष कोट बांध (राजस्थान सीमा) के सैल्यूस गेटों की मरम्मत करवा उन्हें फंक्शनल करवाने का आग्रह भी अध्यक्ष से किया। सरमथुरा की पहाड़ियों की जलधाराओं के वाटरशेड से पोषित कोट बांध धौलपुर सीमा में जरूर है, किंतु इसका डिस्चार्ज जगनेर की बंधियों को पोषित करता है। धौलपुर स्टेट टाइम का बना हुआ इसका सैल्यूस सिस्टम सुचारू नहीं रह गया है, फलस्वरूप बांध से पानी का डिस्चार्ज व्यवस्थित नहीं हो पाता और अधिकांश पानी गेट के सीपेज से अनावश्यक रूप से बह जाता है।
डिस्ट्रिक्ट प्लानिंग कमेटी और रहन कलां गांव रेनीवैल योजना पर पुनर्विचार की मांग
सिंचाई बंधु की बैठक में सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के सेक्रेटरी अनिल शर्मा, राजीव सक्सेना और असलम सलीमी आदि प्रतिनिधियों ने भाग लेकर उपरोक्त सहित जनपद में जल संचय संभावनाओं संबंधित कई मुद्दों को उठाया।
सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा की ओर से डॉ. भदौरिया से अनुरोध किया गया कि जनपद के प्रभारी मंत्री से जिला योजना कमेटी की मीटिंग आहूत करने का अनुरोध करें, जिससे उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग और चिन्हित योजनाओं को वित्तपोषण का मार्ग प्रशस्त हो सके।
सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा ने यमुना तटीय रहन कलां गांव में आठ करोड़ घन लीटर प्रतिदिन जल दोहन के लिए बनाए जाने वाले पांच रेनी वैलों की योजना पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया। इन रेनीवैलों के बनाए जाने से खंदौली, एत्मादपुर और बरौली अहीर विकासखंड के गांव सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। ये तीनों ही विकासखंड अतिदोहित श्रेणी के हैं और इनका जलभृत तंत्र (Aquifer System) का संरक्षित एक्यूफर सिस्टम गड़बड़ाया हुआ होने से इनमें किसानों को नई बोरिंग तक के लिए अनुमति नहीं मिल पाती। जलभृत तंत्र को रिचार्ज करने की योजना के प्रतिकूल, वृहद जल दोहन की इस योजना के क्रियान्वयन से किसको कितना लाभ मिलेगा यह एक वैचारिक मुद्दा हो सकता है, किंतु रहन कलां से बाह तहसील के खिलावली गांव (जनपद का सीमांत गांव) तक नदी बहाव व जल शून्यता की स्थिति में जरूर पहुंच जाएगी।
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