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आगरा: मेट्रो में ‘आयरन स्पेन’ तकनीक का इस्तेमाल, ट्रैफिक जाम से मिलेगी मुक्ति

आगरा। आगरा में मेट्रो परियोजना के तहत एमजी रोड पर लगने वाले जाम से निजात पाने के लिए एक उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। मेट्रो के दूसरे कॉरिडोर पर दो जगहों पर 60-60 मीटर लंबे ‘आयरन स्पेन’ लगाए जाएंगे। इस तकनीक से रावली और हरीपर्वत पर रेलवे पुल को पार करने के लिए पिलर बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, जिससे सड़क पर यातायात बाधित नहीं होगा। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) इस तकनीक का उपयोग एमजी रोड पर कर रहा है। आयरन स्पेन लोहे और कंक्रीट से बना एक ऐसा हिस्सा होता है जो दो खंभों या छोरों के बीच की दूरी को जोड़ता है और ट्रैक को सहारा देता है। यह तकनीक आसानी से नदियों, खाईयों या रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर से ट्रैक को गुजारने में मदद करती है। UPMRC इस तकनीक का उपयोग पहले भी लखनऊ के अवध चौराहे पर कर चुका है। आगरा में 29.4 किलोमीटर के दो मेट्रो कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। पहला कॉरिडोर ताजमहल ईस्ट गेट से सिकंदरा तक 15 किलोमीटर लंबा है, जबकि दूसरा कॉरिडोर आगरा कैंट से कालिंदी बिहार के बीच 14.4 किलोमीटर का है। दूसरे कॉरिडोर पर 14 एलिवेटेड स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जो शहर की लाइफलाइन एमजी रोड से होकर गुजरेंगे। एमजी रोड पर सिंगल पिलर स्टेशन बनाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में सड़क के चौड़ीकरण में कोई बाधा न आए। इसके अलावा, आगरा कॉलेज स्टेशन पर एमजी रोड को पार करने के लिए सब-वे का भी निर्माण किया गया है, जिससे लोगों को सुविधा मिलेगी। एसएन मेडिकल कॉलेज में पुलिस की दादागिरी, डॉक्टर हड़ताल पर; मरीज़ों की बढ़ी मुसीबत मिशन शक्ति अभियान के तहत निकाली गई वाहन रैली

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आगरा में मेट्रो का काम बनी परेशानी, MG रोड पर जाम से निपटने के लिए 10 मशीनें लगाई गईं

आगरा। आगरा में मेट्रो कॉरिडोर का काम इन दिनों शहरवासियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है, खासकर एमजी रोड पर। यहां बैरिकेडिंग के कारण सुबह से शाम तक जाम लगा रहता है। इस समस्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने एमजी रोड पर काम को तेजी से पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। एमजी रोड पर लगीं सबसे ज्यादा मशीनें शहर भर में मेट्रो कॉरिडोर के पिलर निर्माण के लिए कुल 18 मशीनें लगाई गई हैं, जिनमें से 10 मशीनें सिर्फ एमजी रोड पर ही काम कर रही हैं। जबकि सुलतानपुरा, मॉल रोड, हाईवे और सुलतानगंज जैसे अन्य हिस्सों में बाकी की 8 मशीनों से काम चलाया जा रहा है। UPMRC का लक्ष्य है कि दिसंबर तक एमजी रोड पर पिलर का काम पूरा कर लिया जाए, ताकि बैरिकेडिंग हटाकर लोगों को जाम से राहत मिल सके। एमजी रोड पर क्यों है ज्यादा दिक्कत? आगरा में कुल 29.4 किलोमीटर लंबे दो कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। इसमें से एक कॉरिडोर एमजी रोड से होकर गुजरता है, जहां प्रतापपुरा से भगवान टॉकीज तक पिलर निर्माण के लिए बैरिकेडिंग की गई है। इस रोड की चौड़ाई 8 मीटर है, जो बैरिकेडिंग के बाद और भी संकरी हो गई है। सड़क के दोनों ओर शोरूम होने के कारण वाहनों के रुकते ही ट्रैफिक बाधित हो जाता है। पिछले महीने मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया था कि जहां पिलर का काम पूरा हो गया है, वहां बैरिकेडिंग को थोड़ा अंदर खिसकाया जाएगा, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका है। इसी कारण एमजी रोड पर जाम की स्थिति बनी हुई है।

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आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट में नया बदलाव: अब हाईवे स्टेशनों पर कम होगा ‘कॉनकोर्स एरिया’, सीधे प्लेटफॉर्म पर पहुंचेंगे यात्री

आगरा। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने आगरा में चल रहे मेट्रो प्रोजेक्ट में एक बार फिर बदलाव किया है। इस बार यह तय किया गया है कि फतेहाबाद रोड पर बने मेट्रो स्टेशनों की तुलना में हाईवे पर बनने वाले स्टेशनों का कॉनकोर्स एरिया (Concourse area) कम किया जाएगा। इसका मतलब है कि जहाँ यात्री टिकट लेंगे, उस कवर्ड एरिया को अब छोटा किया जाएगा। क्या है कॉनकोर्स एरिया? कॉनकोर्स एरिया एक ऐसा बड़ा हॉल या क्षेत्र होता है जहाँ लोग आमतौर पर इकट्ठा होते हैं। यह हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों या कन्वेंशन सेंटरों पर देखा जा सकता है। यह यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह जाने का रास्ता देता है और यहाँ अक्सर बोर्डिंग गेट और अन्य सुविधाएँ भी होती हैं। बदलाव क्यों और कैसे? मेट्रो के पहले कॉरिडोर पर हाईवे पर खंदारी, आईएसबीटी, गुरुद्वारा गुरु का ताल और सिकंदरा जैसे एलिवेटेड स्टेशन बनने हैं। इससे पहले इसी कॉरिडोर पर ताज ईस्ट गेट, बसई, और फतेहाबाद रोड मेट्रो स्टेशन बन चुके हैं, जिनका संचालन UPMRC कर रहा है। इन मौजूदा स्टेशनों के कॉनकोर्स एरिया का उपयोग उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पा रहा है। इसी को देखते हुए, यह तय किया गया है कि हाईवे पर बनने वाले एलिवेटेड स्टेशनों का कॉनकोर्स एरिया कम किया जाएगा। इस बचे हुए अधिकांश एरिया में अब कमरे बनाए जाएंगे, जहाँ मेट्रो संचालन से संबंधित स्टाफ बैठेगा या फिर ऑपरेटिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। यात्री अब टिकट लेकर सीधे प्लेटफॉर्म पर जाएंगे। वे सीढ़ियों से चढ़कर कॉनकोर्स एरिया में पहुँचेंगे, वहाँ टिकट लेंगे, अपनी चेकिंग करवाएंगे और सीधे प्लेटफॉर्म पर पहुँचकर मेट्रो का इंतज़ार करेंगे। कॉनकोर्स एरिया में उनके बैठने की कोई व्यवस्था नहीं होगी। दो कॉरिडोर पर तेज़ी से चल रहा काम UPMRC आगरा में दो मेट्रो कॉरिडोर तैयार कर रहा है। पहला कॉरिडोर सिकंदरा से ताज ईस्ट गेट तक है, और दूसरा कालिंदी विहार से आगरा कैंट स्टेशन तक बन रहा है। पहले कॉरिडोर पर फिलहाल ताज ईस्ट गेट से मनःकामेश्वर मंदिर स्टेशन तक मेट्रो का संचालन हो रहा है। इससे आगे इसी कॉरिडोर पर मेडिकल कॉलेज, आगरा कॉलेज, राजामंडी और आरबीएस कॉलेज जैसे अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों का काम लगभग पूरा हो चुका है। यहाँ सिविल वर्क चल रहा है और अक्टूबर तक मेट्रो चलने की संभावना है। और खबरें भी हैं…

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आगरा मेट्रो: अक्टूबर से RBS तक दौड़ेगी ‘असली’ सवारी, अब ‘किटी पार्टी’ के भरोसे नहीं चलेगी मेट्रो!

आगरा। आगरा मेट्रो, जिसे लेकर अभी तक ‘किटी पार्टी’ और खाली ट्रेनों के चर्चे होते थे, अब RBS तक दौड़ने के लिए तैयार है! उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने पटरी बिछाने के काम में जबरदस्त तेजी दिखाई है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अक्टूबर 2025 से यात्री आरबीएस (RBS) कॉलेज तक मेट्रो का सफर कर सकेंगे। यह आगरावासियों के लिए एक बड़ी राहत होगी, क्योंकि अब उन्हें अपने शहर में आधुनिक परिवहन का अनुभव मिलेगा। सितंबर तक काम पूरा, फिर शुरू होगा सफर UPMRC के उप महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा ने बताया कि पहले कॉरिडोर में आरबीएस, राजा मंडी और आगरा कॉलेज स्टेशन लगभग तैयार हो चुके हैं। इनमें सिग्नलिंग, बिजली की आपूर्ति और सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य अंतिम चरण में हैं। आरबीएस-राजामंडी स्टेशन के बीच दोनों ओर की पटरी बिछाने का काम भी पूरा हो गया है, जबकि आगरा कॉलेज तक सिर्फ 200 मीटर का हिस्सा बाकी है। मिश्रा के मुताबिक, आगरा कॉलेज से एसएन मेडिकल कॉलेज स्टेशन और एसएन से मनःकामेश्वर स्टेशन के बीच सिविल कार्य तेजी से चल रहा है। बिजलीघर के पास रेलवे की एनओसी में देरी के कारण करीब एक महीने का समय और लगेगा, लेकिन सितंबर तक सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। इसके बाद, अक्टूबर से आरबीएस स्टेशन तक मेट्रो का व्यावसायिक संचालन शुरू हो जाएगा। दूसरे कॉरिडोर पर भी रफ्तार, 9 नई रिंग मशीनें लगाई गईं पहले कॉरिडोर के साथ-साथ, दूसरे कॉरिडोर का निर्माण भी तेजी से जारी है। आगरा कैंट से एमजी रोड तक पिलर बनाने का काम चल रहा है, जिसे और तेज करने के लिए 9 नई रिंग मशीनें भी लगाई गई हैं। इस कॉरिडोर के पहले चरण में आगरा कैंट से आगरा कॉलेज तक एलिवेटेड ट्रैक बनाया जाएगा, जिसका लक्ष्य अगले दो साल में पूरा करना है।

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“हमारा घर गिरा तो मेट्रो की वजह से!” – आगरा के मोती कटरा में दीवारों पर चिपके दहशत भरे पोस्टर, जिम्मेदार कौन?

आगरा। आगरा के मोती कटरा इलाके में मेट्रो की खुदाई ने कई परिवारों की नींद हराम कर दी है। यहाँ कई मकान इतने जर्जर हो गए हैं कि वे कभी भी गिर सकते हैं, जिसके चलते लोगों में गहरी दहशत है। अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंतित इन परिवारों ने अब अपने घरों की दीवारों पर सीधे-सीधे पोस्टर लगा दिए हैं, जिन पर लिखा है: “यह मकान अगर गिरा तो इसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) की होगी।” मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति, दहशत में जी रहे लोग मकान मालिकों का आरोप है कि मेट्रो की सुरंगों की खुदाई के दौरान बरती गई लापरवाही के कारण उनके भवन जर्जर हो गए हैं। उनकी शिकायत है कि मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है और अब ये मकान रहने लायक नहीं रहे। उन्हें हर पल किसी बड़े हादसे का डर सता रहा है। दयानंद गुप्ता ने बताया कि उनका चार मंजिला घर है और सुरंग की खुदाई से उसमें दरारें आ गई हैं। सरकार से मान्यता प्राप्त इंजीनियर से कराए गए ऑडिट में भी उनके घर को रहने लायक नहीं बताया गया है, जिसके चलते उनका परिवार किराए पर रहने को मजबूर है। मोती कटरा के ही चितरंजन कुमार जैन ने शिकायत की कि UPMRC के अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। UPMRC का दावा: “अब कोई खतरा नहीं, कुछ लोग चाहते हैं पूरा घर नया बन जाए” दूसरी ओर, UPMRC के महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा का इस मामले पर अलग ही रुख है। उनका कहना है कि इन घरों की मरम्मत करा दी गई है और अब सुरंग बन जाने के बाद घरों को कोई खतरा नहीं है। मिश्रा ने यह भी जोड़ा कि कुछ लोग चाहते हैं कि उनका पूरा घर ही नया बनवा दिया जाए। UPMRC के इस दावे और स्थानीय लोगों की दहशत के बीच, मोती कटरा के निवासियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। यह देखना बाकी है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर क्या ठोस कदम उठाता है।

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आगरा मेट्रो पर ‘धार्मिक’ अड़चन: गुरुद्वारा गुरु का ताल के सामने मेट्रो स्टेशन को लेकर बवाल, अब ‘जगह बदलने’ पर होगा सर्वे!

आगरा। शहर में मेट्रो परियोजना के पहले कॉरिडोर का काम तेज़ी से अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, लेकिन अब गुरुद्वारा गुरु का ताल के सामने प्रस्तावित एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन को लेकर एक बड़ी अड़चन सामने आ गई है। यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने जिस जगह को चुना है, वह सीधे गुरुद्वारे के मुख्य द्वार के सामने आती है, जिस पर गुरुद्वारा प्रबंधन ने गंभीर आपत्ति जताई है। ‘धार्मिक गरिमा’ पर आंच! बाबा प्रीतम सिंह ने उठाई आवाज गुरुद्वारा प्रबंधन का कहना है कि गुरु का ताल एक पवित्र, ऐतिहासिक और वैश्विक स्तर पर पूजनीय स्थल है, जहाँ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब को दिल्ली में शहीद किए जाने से पूर्व नौ दिन तक बंदी बनाकर रखा गया था। गुरुद्वारा के मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह को इस प्रस्तावित स्टेशन से आपत्ति है। उनका तर्क है कि यदि मेट्रो स्टेशन गुरुद्वारे के मुख्य द्वार के सामने बनता है, तो इससे श्रद्धालुओं को पहुंचने में असुविधा होगी। साथ ही, स्टेशन के बाहर होने वाली अराजक गतिविधियां (जैसे तिपहिया वाहन, टैक्सी, दोपहिया वाहन, और पान-बीड़ी बेचने वाले) धार्मिक स्थल की पवित्रता और गरिमा को भंग करेंगी। इससे अराजक तत्वों के जमावड़े से गुरुद्वारा परिसर की गरिमा पर भी आंच आ सकती है। विधायक ने की मध्यस्थता, अब ‘तकनीकी सर्वे’ करेगा फैसला गुरुद्वारा गुरु का ताल के मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह चाहते हैं कि मेट्रो स्टेशन को मौजूदा प्रस्तावित स्थल से 200 मीटर आगे या पीछे स्थानांतरित कर दिया जाए। उन्होंने इस बारे में क्षेत्रीय विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल को भी पत्र लिखा था। विधायक खंडेलवाल ने कल शाम मेट्रो अधिकारियों के साथ गुरुद्वारा पहुंचकर स्थल का निरीक्षण किया और बाद में संत बाबा प्रीतम सिंह व गुरुद्वारा प्रबंधन के अन्य सदस्यों के साथ बैठक की। इस बैठक में संत ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई, जिसे अधिकारियों ने गंभीरता से सुना और जल्द सर्वे कराने की बात कही। आगरा मेट्रो परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी अरविंद राय ने कहा कि वे संत बाबा प्रीतम सिंह की बात को गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेट्रो की तकनीकी टीम आज से सर्वे कार्य शुरू कर रही है ताकि देखा जा सके कि स्टेशन को आगे या पीछे शिफ्ट करना व्यावहारिक है या नहीं। अरविंद राय ने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि मेट्रो स्टेशन को गुरुद्वारे के मुख्य द्वार से स्थानांतरित कर दिया जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरा काम पहले से तैयार डिजाइन पर आधारित है, और हाईवे पर मेट्रो लाइन का स्ट्रक्चर खड़ा हो रहा है, ऐसे में तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। विकास बनाम विरासत: संतुलन साधने की चुनौती यह मामला न सिर्फ एक धार्मिक स्थल से जुड़ा है, बल्कि यह शहर के भविष्य और उसकी विरासत के बीच संतुलन साधने की चुनौती भी है। एक ओर मेट्रो का यह कॉरिडोर हजारों लोगों को यातायात में सहूलियत देने वाला है, वहीं दूसरी ओर यह भी सही है कि विकास की कीमत धार्मिक भावनाओं की अनदेखी करके नहीं चुकाई जा सकती। अब निगाहें मेट्रो की तकनीकी रिपोर्ट और प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं कि क्या इस जटिल मुद्दे का कोई स्वीकार्य समाधान निकल पाएगा।

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आगरा में ‘जाम’ का ‘जाल’: MG रोड पर मेट्रो ने बिछाया ‘बैरिकेडिंग का मायाजाल’, वैकल्पिक रास्ते हैं…पर ‘अंधेरे में’ भटक रहे लोग!

आगरा। आगरा में मेट्रो का काम शहर की रफ्तार को ‘जाम’ कर रहा है! एमजी रोड पर मेट्रो निर्माण के चलते लगी बैरिकेडिंग ने यातायात को ‘धीमा’ कर दिया है, जिससे लोग रोज घंटों जाम में फंसने को मजबूर हैं। जिला प्रशासन ने इस समस्या से निपटने के लिए वैकल्पिक रास्तों का प्लान तो बनाया, लेकिन सबसे बड़ी चूक ये हुई कि इन रास्तों पर कोई संकेतक (साइनबोर्ड) नहीं लगाए गए! नतीजा ये कि लोग इन वैकल्पिक रास्तों से अनजान हैं और ‘जाम’ के दलदल में फंसकर परेशान हो रहे हैं। एमजी रोड पर ‘संकरा’ रास्ता, स्कूलों की छुट्टी में ‘महाजाम’ प्रतापपुरा चौराहे से सूरसदन तक एमजी रोड पर मेट्रो का काम चल रहा है, जिससे कई जगह बैरिकेडिंग लगा दी गई है। इसने रोड को इतना ‘संकरा’ कर दिया है कि रोज जाम लगना आम बात हो गई है। स्कूलों की छुट्टी के समय तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब बच्चों के वाहन भी घंटों जाम में फंसे रहते हैं। प्लान तो बना, पर ‘दिशाहीन’ हुए वाहन चालक! जिला प्रशासन ने जाम से राहत के लिए कुछ वैकल्पिक रास्ते सुझाए थे, लेकिन बिना संकेतकों के वे किसी काम के नहीं आ रहे: मदिया कटरा निवासी मनोज मिश्रा ने बताया कि मदिया कटरा पर रोज जाम में फंसना पड़ रहा है। 5 मिनट का रास्ता 30 मिनट में तय होता है। उनका कहना है कि अंदरूनी मार्ग भी वाहनों के बढ़ते दबाव को झेल नहीं पा रहे हैं। अब सवाल यह है कि प्रशासन ने प्लान तो बना लिया, लेकिन उसे ज़मीन पर उतारने में इतनी बड़ी लापरवाही क्यों बरती? जब तक सही संकेतक नहीं लगेंगे, तब तक आगरा की जनता को इस ‘जाम’ के जाल से मुक्ति मिलना मुश्किल है।

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आगरा मेट्रो लाएगी ‘जाम’ से राहत! गुरु का ताल पर पिलर, तो कामायनी कट खुलने से हजारों को फायदा

आगरा। आगरा मेट्रो का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन ‘गुरु का ताल कट’ पर पिलर निर्माण से वाहनों का दबाव बढ़ने की आशंका है। इसी समस्या से निपटने के लिए यूपी मेट्रो रेल कारपोरेशन (UPMRC) ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) से कामायनी कट को फिर से खोलने की मांग की है। अगर यह कट खुल जाता है, तो सिकंदरा तिराहा पर लगने वाले जाम से हजारों स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है! हालांकि, यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण पिलर की खुदाई का काम फिलहाल रोकना पड़ा है। गुरु का ताल पर ‘बदलाव’, अब कामायनी कट पर नज़र नेशनल हाईवे-19 स्थित गुरु का ताल कट के आधे हिस्से में मेट्रो पिलर बनने जा रहा है। इसे देखते हुए इस कट को पूरी तरह बंद करने की तैयारी है, जो इसी सप्ताह शुरू होगा। वाहनों का दबाव कम करने के लिए UPMRC ने NHAI मथुरा खंड से कामायनी कट को खोलने की अनुमति मांगी है। यह कट खुलने से भावना एस्टेट सहित आसपास के हजारों लोगों को फायदा होगा। अभी ये लोग सिकंदरा तिराहा या फिर गुरु का ताल कट से गलत साइड से गुजरते हैं, जिससे ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। बता दें कि कामायनी कट अक्टूबर 2020 में बंद किया गया था, जिसके बाद से गुरु का ताल तिराहा पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया है और अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। मेट्रो का काम जारी: रात में ट्रैफिक डायवर्ट खंदारी चौराहा से सिकंदरा तिराहा तक तीन किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ट्रैक बन रहा है। ISBT तक ट्रैक बन चुका है। अब ISBT से गुरु का ताल कट होते हुए सिकंदरा तिराहा तक काम चल रहा है। गुरु का ताल कट के आधे हिस्से पर स्टेशन का पिलर बनेगा। UPMRC ने पुराने कट से 80 मीटर की दूरी पर एक नया कट बनाया है, जो डीवीवीएनएल कार्यालय की तरफ है। यह नया कट इसी सप्ताह चालू हो जाएगा और पुराना कट एक साल के लिए पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। UPMRC के अधिकारियों ने बताया कि कामायनी कट पर तीन महीने में काम पूरा हो जाएगा। NHAI से इसे खोलने की अनुमति मांगी गई है। यदि अनुमति मिलती है, तो एक पिलर से दूसरे पिलर के बीच डिवाइडर नहीं बनेगा, जिससे यातायात सुगम रहेगा। मेट्रो पिलर बनाने का काम तेजी से चल रहा है, जिसके लिए रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक ट्रैफिक को डायवर्ट या बंद करने की अनुमति ली गई है। इस दौरान 16 रिग मशीनों से खुदाई और पिलर पर स्पान व गर्डर चढ़ाने का काम होगा। यमुना का जलस्तर बढ़ा, पिलर का काम रुका यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण UPMRC ने नदी पर पिलर की खुदाई का काम फिलहाल रोक दिया है। जलस्तर सामान्य होने के बाद ही यह कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा।

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