आगरा मेट्रो पर ‘धार्मिक’ अड़चन: गुरुद्वारा गुरु का ताल के सामने मेट्रो स्टेशन को लेकर बवाल, अब ‘जगह बदलने’ पर होगा सर्वे!

आगरा। शहर में मेट्रो परियोजना के पहले कॉरिडोर का काम तेज़ी से अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, लेकिन अब गुरुद्वारा गुरु का ताल के सामने प्रस्तावित एलिवेटेड मेट्रो स्टेशन को लेकर एक बड़ी अड़चन सामने आ गई है। यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने जिस जगह को चुना है, वह सीधे गुरुद्वारे के मुख्य द्वार के सामने आती है, जिस पर गुरुद्वारा प्रबंधन ने गंभीर आपत्ति जताई है।


‘धार्मिक गरिमा’ पर आंच! बाबा प्रीतम सिंह ने उठाई आवाज

गुरुद्वारा प्रबंधन का कहना है कि गुरु का ताल एक पवित्र, ऐतिहासिक और वैश्विक स्तर पर पूजनीय स्थल है, जहाँ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब को दिल्ली में शहीद किए जाने से पूर्व नौ दिन तक बंदी बनाकर रखा गया था। गुरुद्वारा के मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह को इस प्रस्तावित स्टेशन से आपत्ति है।

उनका तर्क है कि यदि मेट्रो स्टेशन गुरुद्वारे के मुख्य द्वार के सामने बनता है, तो इससे श्रद्धालुओं को पहुंचने में असुविधा होगी। साथ ही, स्टेशन के बाहर होने वाली अराजक गतिविधियां (जैसे तिपहिया वाहन, टैक्सी, दोपहिया वाहन, और पान-बीड़ी बेचने वाले) धार्मिक स्थल की पवित्रता और गरिमा को भंग करेंगी। इससे अराजक तत्वों के जमावड़े से गुरुद्वारा परिसर की गरिमा पर भी आंच आ सकती है।


विधायक ने की मध्यस्थता, अब ‘तकनीकी सर्वे’ करेगा फैसला

गुरुद्वारा गुरु का ताल के मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह चाहते हैं कि मेट्रो स्टेशन को मौजूदा प्रस्तावित स्थल से 200 मीटर आगे या पीछे स्थानांतरित कर दिया जाए। उन्होंने इस बारे में क्षेत्रीय विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल को भी पत्र लिखा था।

विधायक खंडेलवाल ने कल शाम मेट्रो अधिकारियों के साथ गुरुद्वारा पहुंचकर स्थल का निरीक्षण किया और बाद में संत बाबा प्रीतम सिंह व गुरुद्वारा प्रबंधन के अन्य सदस्यों के साथ बैठक की। इस बैठक में संत ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई, जिसे अधिकारियों ने गंभीरता से सुना और जल्द सर्वे कराने की बात कही।

आगरा मेट्रो परियोजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी अरविंद राय ने कहा कि वे संत बाबा प्रीतम सिंह की बात को गंभीरता से ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि मेट्रो की तकनीकी टीम आज से सर्वे कार्य शुरू कर रही है ताकि देखा जा सके कि स्टेशन को आगे या पीछे शिफ्ट करना व्यावहारिक है या नहीं।

अरविंद राय ने सकारात्मक संकेत देते हुए कहा कि उनकी कोशिश रहेगी कि मेट्रो स्टेशन को गुरुद्वारे के मुख्य द्वार से स्थानांतरित कर दिया जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पूरा काम पहले से तैयार डिजाइन पर आधारित है, और हाईवे पर मेट्रो लाइन का स्ट्रक्चर खड़ा हो रहा है, ऐसे में तकनीकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।


विकास बनाम विरासत: संतुलन साधने की चुनौती

यह मामला न सिर्फ एक धार्मिक स्थल से जुड़ा है, बल्कि यह शहर के भविष्य और उसकी विरासत के बीच संतुलन साधने की चुनौती भी है। एक ओर मेट्रो का यह कॉरिडोर हजारों लोगों को यातायात में सहूलियत देने वाला है, वहीं दूसरी ओर यह भी सही है कि विकास की कीमत धार्मिक भावनाओं की अनदेखी करके नहीं चुकाई जा सकती। अब निगाहें मेट्रो की तकनीकी रिपोर्ट और प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं कि क्या इस जटिल मुद्दे का कोई स्वीकार्य समाधान निकल पाएगा।

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