आगरा। आगरा में गणेश चतुर्थी के बाद प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर यमुना नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए नगर निगम प्रशासन ने विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। यमुना नदी के घाटों पर अस्थाई कुंडों का निर्माण कराया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु सीधे नदी में मूर्ति विसर्जन न करके इन्हीं कुंडों में कर सकें।
यमुना की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता: नगर आयुक्त
नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने बताया कि यमुना को प्रदूषण से बचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए ऐसी व्यवस्था की जा रही है, जिससे मूर्ति विसर्जन की परंपरा भी जारी रहे और हमारी नदी भी सुरक्षित रहे।” उन्होंने यह भी बताया कि सभी कुंडों का निर्माण तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
अधिशासी अभियंता अरविंद श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि हाथी घाट और बल्केश्वर घाट पर स्थाई कुंडों का निर्माण शुरू हो चुका है, जो अगले दो दिनों में पूरा हो जाएगा। इसके अलावा, दशहरा घाट पर भी बालू की बोरियों की मदद से अस्थाई कुंड तैयार किए जा रहे हैं।
कुंडों में यमुना का पानी और पॉलिथिन का इंतजाम
ये अस्थाई कुंड लगभग चार फीट गहरे बनाए जा रहे हैं। इनके तल में पॉलिथिन बिछाई जाएगी, ताकि विसर्जन के बाद मूर्तियों को आसानी से बाहर निकाला जा सके और नदी का जल प्रदूषित न हो। इन कुंडों में यमुना का पानी भरकर ही विसर्जन की सुविधा दी जाएगी।
नगर निगम यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि विसर्जन के बाद मूर्तियों को कुंड से निकालने और उनके उचित निपटान के लिए पर्याप्त व्यवस्था हो। साथ ही, घाटों पर बैरिकेडिंग भी की जाएगी ताकि कोई भी श्रद्धालु सीधे यमुना नदी में प्रतिमा विसर्जन न कर सके।


































































































