आगरा: इंडोनेशिया में मर्चेंट नेवी अधिकारी मनीष की मौत, जन्मदिन पर बेटी करती रही पिता का इंतजार, आज आ सकता है पार्थिव शरीर

आगरा। इंडोनेशिया में एक जहाज की मरम्मत करते समय आगरा के मर्चेंट नेवी अधिकारी मनीष यादव (34) की दुखद मौत हो गई है। यह खबर बुधवार सुबह परिवार तक पहुंची, जिसके बाद से पूरे घर में मातम पसरा हुआ है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है, पत्नी सदमे में है, और मासूम बच्चे अपने पिता के घर आने का इंतजार कर रहे हैं। मनीष का पार्थिव शरीर बुधवार को भारत पहुंचने की उम्मीद है, जिसके बाद उनके पैतृक आवास, आवास विकास कॉलोनी सेक्टर आठ, आगरा में अंतिम संस्कार किया जाएगा।


समुद्र में फिसले पैर, पल भर में जिंदगी खत्म

आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर आठ निवासी मनीष ने 2013 में नॉटिकल साइंस से स्नातक किया था और मर्चेंट नेवी में शामिल हो गए थे। दो साल बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी, लेकिन दो साल पहले ही चेन्नई की एक शिप कंपनी में दोबारा काम शुरू किया था। वह इंडोनेशिया के बाटम द्वीप पर एक शिप की मरम्मत का काम देख रहे थे।

25 जुलाई को मनीष को शिप के साथ दुबई के लिए निकलना था। लेकिन, इससे ठीक एक दिन पहले, 24 जुलाई की रात को शिप पर चढ़ते समय उनका पैर फिसल गया और वह समुद्र में गिर गए। अन्य साथी उन्हें तुरंत बाहर निकालकर डॉक्टरों के पास ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।


पिता और भाई का अथक प्रयास, सरकार से लगाई गुहार

मनीष की मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। मथुरा में दारोगा के पद पर तैनात उनके पिता रमेश चंद्र और भाई अवनीश यादव ने तुरंत विदेश मंत्रालय और शिप कंपनी के अधिकारियों से संपर्क साधा। वे मनीष के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

भाई अवनीश ने बताया कि सभी दस्तावेजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है और बुधवार को भाई का शरीर दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद पार्थिव शरीर को आगरा लाया जाएगा।


आखिरी वीडियो कॉल और बच्चों की मासूमियत

अवनीश ने बताया कि 24 जुलाई को ही मनीष ने अपने परिवार के साथ एक वीडियो कॉल की थी। उसी दिन उनके दो वर्षीय बेटे गर्व के पैर में चोट लगने पर पिता और मां उससे मिलने उसके घर गए थे। मनीष ने वीडियो कॉल पर सभी से एक साथ बात की थी और बताया था कि वह सुबह दुबई निकलेंगे और एक महीने तक नेटवर्क ऊपर-नीचे रहेगा। परिवार को क्या पता था कि यह उनकी आखिरी बात होगी।

मनीष के पिता को सबसे पहले इस हादसे की जानकारी मिली थी। उन्होंने कई जगहों पर संपर्क कर अपने बेटे की मृत्यु की पुष्टि की। पिता ने छुट्टी लेकर घर आकर बड़ी मुश्किल से मां और पत्नी को यह दुखद खबर दी। इस खबर के बाद से मां ने कुछ नहीं खाया है और रो-रोकर उनकी हालत बिगड़ रही है। भाभी भी कई बार रोते-रोते बेहोश हो चुकी हैं।


जन्मदिन पर बेटी का इंतजार और भविष्य की चिंता

मनीष की चार वर्षीय बेटी का दो दिन पहले जन्मदिन था। उसे और उसके दो वर्षीय भाई को बताया गया है कि पापा के पैर में चोट लगी है। मासूम बेटी पार्टी करने की जिद करती रही, जिसे इस गमगीन माहौल में परिवार के सदस्यों ने बाहर ले जाकर पेस्ट्री खिलाकर शांत कराया।

परिवार के लिए यह दुख और भी गहरा है क्योंकि सितंबर माह में मनीष की पत्नी की डिलीवरी होनी है। मनीष का शिप कंपनी के साथ अनुबंध भी खत्म हो रहा था, और उन्होंने सितंबर में घर आकर परिवार के साथ समय बिताने और डिलीवरी का जश्न मनाने की पूरी तैयारी कर रखी थी। यह त्रासदी परिवार के लिए एक ऐसा गहरा घाव है, जिसे भरना मुश्किल होगा।

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