आगरा। क्या भौतिक सुख ही असली सुकून का रास्ता है या मन की शांति भी जीवन का वास्ता है? इन्हीं गहन सवालों के जवाब खोजने के प्रयास में, प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल, आगरा में 20 सितंबर, 2025 को एक विशेष संवादात्मक सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में श्री सोमदेव त्यागी, प्रसिद्ध मार्गदर्शक और सलाहकार, ने “हमने बहुत कुछ पा लिया……. परंतु वास्तव में क्या यह मायने रखता है?” विषय पर विचार रखे।
लगभग 25 वर्षों से ‘जीवन विद्या’ के सूत्रधार रहे सोमदेव जी ने अनौपचारिक, संवादात्मक तरीके से जीवन जीने की कला सिखाई। उन्होंने बताया कि जीवन का असली सार भौतिक सुविधाओं में नहीं, बल्कि मानसिक शांति और संतुष्टि में है। उन्होंने कहा कि स्वयं पर विश्वास ही वास्तविक सुख का आधार है और सकारात्मक भाव व विचार ही हमें इसकी प्राप्ति करा सकते हैं।
प्रमुख बिंदुओं पर हुई चर्चा
कार्यशाला में सोमदेव जी ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला:
- सुख-दुःख का कारण: उन्होंने समझाया कि हमारे जीवन में सुख और दुःख क्यों आते हैं और उनसे कैसे निपटा जाए।
- संबंधों में प्रगाढ़ता: उन्होंने कहा कि पहले के समय में परिवारों में संबंधों में प्रगाढ़ता थी, लेकिन अब दूरियां बढ़ रही हैं। उन्होंने सामंजस्यपूर्ण रिश्तों के महत्व पर जोर दिया।
- आंतरिक शांति: उन्होंने कहा कि यदि हम सृष्टि के अनुरूप अपनी दृष्टि रखेंगे तो कभी निराशा नहीं मिलेगी।
- बच्चों के प्रति दृष्टिकोण: सोमदेव जी ने बताया कि आजकल के बच्चों को समझने की अधिक आवश्यकता है, न कि सिर्फ समझाने की।
योग प्रशिक्षिका शवेता गुप्ता ने सत्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में तनाव और चिंता को दूर करने के लिए ऐसे सत्रों की अत्यंत आवश्यकता है। वहीं, डॉ. सुशील गुप्ता ने सोमदेव जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सत्र ने जीवन को देखने का दृष्टिकोण बदल दिया है।
सत्र के अंत में सभी ने प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत की। कार्यक्रम में अनेंद्र सिंह (कार्यक्रम प्रमुख- आकाशवाणी, आगरा), शलभ गुप्ता (विभव कैपिटल) और अरविंद श्रीवास्तव जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अंत में मीनाक्षी चतुर्वेदी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
विशेष: श्री सोमदेव जी का एक और सत्र 21 सितंबर, 2025 को विद्यालय परिसर में ही प्रातः 10 से 1 बजे तक आयोजित किया जाएगा।




































































































