Agra News: बदलता मौसम बना जानलेवा, नए वायरस से सांस लेने में दिक्कत!: डॉ. बी.के. अग्रवाल

Agra News प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. बीके अग्रवाल ने मौसम के बदलते स्वभाव पर चेतावनी दी। प्रदूषण के साथ नए वायरस से गले में जकड़न और सांस लेने में गंभीर परेशानी15-20 दिन चल रहा इलाज

Agra News आगरा के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. बीके अग्रवाल ने त्योहारी सीजन और बदलते मौसम के बीच स्वास्थ्य को लेकर बड़ी चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, बढ़ते प्रदूषण और मौसम में बदलाव के कारण फ्लू का वायरस अब अधिक खतरनाक हो गया है। यह वायरस अब सामान्य घरेलू उपचार से ठीक नहीं हो रहा, बल्कि जकड़न और सांस की समस्याएँ पैदा कर रहा है, जिसके लक्षण डेंगू और मलेरिया जैसे गंभीर बुखार की याद दिलाते हैं।

नए वायरस का ख़तरा: 15-20 दिन तक चल रहा इलाज

डॉ. बीके अग्रवाल ने अपनी राय में बताया कि पहले सर्दियों के समय आने वाला फ्लू वायरस सामान्य घरेलू उपचार से ठीक हो जाता था। मगर अब इस वायरस का स्वरूप बदल चुका है।

डॉ. अग्रवाल के अनुसार, वर्तमान में यह वायरस शरीर में तेज दर्द, गले में जकड़न और बुखार जैसे लक्षण पैदा कर रहा है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कई मरीजों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है, जिसके लिए 15 से 20 दिन तक नेबुलाइज़र और इनहेलर देने की ज़रूरत पड़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि पुराने डायबिटिक मरीजों, हृदय या सांस की समस्या (COPD) वाले मरीजों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से जानलेवा हो सकती है।

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डॉ. अग्रवाल की तरफ से बचाव और सावधानियाँ

डॉ. बीके अग्रवाल ने बदलते मौसम में सभी लोगों को खासकर जोखिम वाले समूहों के लिए चार प्रमुख सावधानियाँ बताई हैं:

1. कूलर और तापमान से बचें

  • कूलर का उपयोग बंद कर दें। इससे पानी नहीं भरेगा, जिससे डेंगू और मलेरिया का खतरा कम होगा।
  • बाहर और अंदर के तापमान में अचानक बदलाव (Temperature Variation) को अवॉइड करें।

2. खान-पान और घरेलू उपचार

  • स्टीम लें और गरारे (Gargle) करें।
  • एकदम चिल्ड पानी, कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम जैसी चीज़ों का सेवन कम से कम करें।
  • त्योहारी समय में मिठाइयों से बचें, खासकर डायबिटीज के मरीज़ तीन महीने का एवरेज शुगर (HBA1C) कंट्रोल रखें।

3. वैक्सीन (टीकाकरण) है ज़रूरी

  • फ्लू का टीका (Influenza Vaccine) साल में एक बार (सितंबर-अक्टूबर के बाद) अवश्य लगवाएँ
  • यह टीका खासकर 50 साल से ऊपर के लोगों, सांस की समस्या वाले मरीज़ों और हृदय रोगी (M.I. patient) के लिए बहुत ज़रूरी है। यह खतरे को 50-60% तक कम कर सकता है।

4. इन्हेलर/नेबुलाइज़र रखें पास

  • जिन लोगों को सांस की पुरानी समस्या है (जैसे COPD या अस्थमा), वे अपने फिजिशियन से सलाह लेकर इनहेलर या नेबुलाइज़र की डोज़ तय कराएँ और उसे हमेशा पास रखें। ज़रा भी खाँसी या जुकाम महसूस हो तो तुरंत इस्तेमाल करें।

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Abhimanyu Singh

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