Agra News Today आगरा कॉलेज प्राचार्य डॉ. सीके गौतम पर फर्जीवाड़े का केस दर्ज, STF जांच में खुलासा

Agra News Today: आगरा कॉलेज में बड़ा खुलासा हुआ है। प्राचार्य डॉ. सीके गौतम पर फर्जी जाति प्रमाणपत्र और अंकतालिका के सहारे नौकरी पाने का आरोप लगा है। इस पूरे मामले की जांच STF कर रही है और लोहामंडी थाने में केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि डॉ. गौतम ने जाति और अंकतालिका में हेरफेर करके नौकरी हासिल की और बाद में कॉलेज के प्राचार्य तक बन गए।

पूर्व प्राचार्य ने लगाए गंभीर आरोप

आगरा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. अनुराग शुक्ल ने सबसे पहले डॉ. गौतम पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए। उनका कहना है कि गौतम ने 1996 में उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के माध्यम से नौकरी पाई, लेकिन इसमें दस्तावेजों में भारी गड़बड़ी की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि डॉ. गौतम ने जाटव जाति का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाकर आरक्षण का लाभ लिया और नौकरी हासिल कर ली।

अंकतालिका में हेरफेर का भी आरोप

शिकायत में यह भी कहा गया कि डॉ. गौतम ने एमए (अंग्रेजी) की अंकतालिका में फर्जीवाड़ा किया। मूल अंकतालिका में उन्हें तृतीय श्रेणी में 471 अंक प्राप्त थे, जबकि आयोग में प्रस्तुत की गई अंकतालिका में अंकों को बढ़ाकर दिखाया गया। इतना ही नहीं, विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड से उस समय का चार्ट भी गायब कर दिया गया, जिससे उनकी असली अंकतालिका सामने न आ सके।

STF जांच में खुलासा

इस पूरे मामले की जांच STF को सौंपी गई। जांच में कॉलेज और विश्वविद्यालय से दस्तावेज मंगाए गए। STF ने पाया कि सेठ पीसी बागला महाविद्यालय, हाथरस से 1990 में की गई एमए परीक्षा के मूल अंक 168/400 थे, जबकि बाद में अंकतालिका में अंकों को बदलकर 207/400 कर दिए गए। STF को मिली जानकारी के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा साजिश के तहत किया गया ताकि आयोग से नौकरी पाने में आसानी हो सके।

पुलिस ने दर्ज किया केस

शिकायत और STF की रिपोर्ट के आधार पर लोहामंडी थाने में डॉ. सीके गौतम के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने कहा कि मामले की गहनता से जांच की जाएगी और साक्ष्य जुटाए जाएंगे। दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आरोपी प्राचार्य का पक्ष

प्राचार्य डॉ. सीके गौतम ने खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि उनके दस्तावेज पूरी तरह सही हैं और STF कई बार इस मामले की जांच कर चुकी है। हर बार नतीजा यही आया कि उनके शैक्षिक प्रमाणपत्र असली हैं। उनका कहना है कि बार-बार एक ही शिकायत कर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।

शिक्षा क्षेत्र में बड़ा विवाद

यह मामला आगरा ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र के लिए गंभीर सवाल खड़े करता है। अगर यह साबित हो जाता है कि कॉलेज के प्राचार्य ने ही फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाई है, तो यह उच्च शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा धक्का होगा। STF की जांच और पुलिस की कार्रवाई से आने वाले समय में सच्चाई साफ हो जाएगी।

क्या है आगे की कार्रवाई?

पुलिस अब STF से मिले सभी दस्तावेजों का मिलान करेगी। विश्वविद्यालय से भी दोबारा रिपोर्ट मांगी जा सकती है। जांच में यदि डॉ. गौतम दोषी साबित होते हैं तो उनकी नौकरी भी जा सकती है और उन पर कड़ी धाराओं में कार्रवाई होगी।

Agra News Today: हेल्पलाइन से रिश्वतखोरी के मामले उजागर

Abhimanyu Singh

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