आगरा में यमुना ने तोड़ा खतरे का निशान, पानी शहर में घुसा; कैलाश गांव खाली


आगरा। आगरा में यमुना नदी का जलस्तर रविवार को खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे शहर और आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा गया है। रविवार शाम होते-होते यमुना का पानी अब शहर के मुख्य मार्ग यमुना किनारा रोड (हाथी घाट रोड) तक पहुँच गया, जिससे यहाँ के ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में खलबली मच गई है।

ताजनगरी में 1978 के बाद पहली बार यमुना का पानी इस स्तर तक पहुंचा है। प्रशासन ने यमुना किनारे बसे कैलाश और अन्य गांवों के लगभग 500 लोगों को राहत शिविरों में भेजना शुरू कर दिया है। कैलाश गांव में पानी घुसने के बाद बिजली काट दी गई है और कई लोग अपने घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं।

रविवार रात को यमुना किनारा रोड पर पानी के बीच से निकलते वाहन।

शहर पर बाढ़ का खतरा

  • जलस्तर की स्थिति: रविवार सुबह यमुना का जलस्तर 499.80 फीट तक पहुँच गया, जो खतरे के निशान (499 फीट) से ऊपर है। दिल्ली के ओखला बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण जलस्तर और बढ़ने की आशंका है। 1978 में यमुना 557 फीट के हाई फ्लड लेवल तक पहुँच गई थी, जिससे आगरा में भीषण बाढ़ आई थी।
  • व्यापारियों में चिंता: यमुना किनारा रोड और मोतीगंज के ट्रांसपोर्ट कारोबारी चिंतित हैं। उनके गोदामों में पानी भरने से भारी नुकसान का डर है।
  • ऐतिहासिक इमारतें प्रभावित: बाढ़ का पानी ताजमहल के पीछे तक पहुँच गया है, जबकि मेहताब बाग और ताज व्यू प्वाइंट में भी पानी भर चुका है। आगरा किला की खाई में भी मंटोला नाले के पानी के बैक मारने से लगभग चार फीट पानी भर गया है, और एत्मादउद्दौला स्मारक के पीछे भी कई कमरे पानी में डूब गए हैं।

गांवों में भयावह स्थिति

यमुना से सटे मनोहरपुर, कैलाश और दयालबाग के रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया है। कैलाश गांव में अधिकांश लोग अपना सामान लेकर ऊँचे स्थानों पर पलायन कर चुके हैं। जो लोग रुके हैं, वे छतों पर डेरा डाले हुए हैं, और घरों में खाना बनाना मुश्किल हो गया है। कुछ स्वयंसेवक इन लोगों तक भोजन पहुंचा रहे हैं। बटेश्वर के ऐतिहासिक मंदिर श्रृंखला तक भी बाढ़ का पानी पहुँच चुका है।


कैलाश गांव में बाढ़ के बाद मंदिर के गर्भ गृह में पानी भर गया।

प्रशासन की अपील और बचाव कार्य

प्रशासन ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि वे बच्चों और बुजुर्गों को नदी किनारे से दूर रखें। साथ ही, जरूरी कागजात जैसे राशन कार्ड और आधार कार्ड को वाटरप्रूफ बैग में सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को सूखे अनाज और मवेशियों के चारे को भी ऊँचे स्थानों पर रखने के लिए कहा है। जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बीमार व्यक्तियों को तुरंत बाढ़ शरणालयों में पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।

Abhimanyu Singh

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