आगरा में डॉ. जितेंद्र रघुवंशी स्मृति कार्यक्रम में ‘राम की शक्ति पूजा’ का हुआ पुनर पाठ
आगरा। सेठ पदमचंद जैन इंस्टीट्यूट के सभागार में डॉ. जितेंद्र रघुवंशी की 74वीं जयंती पर एक स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पटना से आए डॉ. जावेद अख्तर खां ने सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की प्रसिद्ध कृति ‘राम की शक्ति पूजा’ का एक नया और गहरा अर्थ प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. जितेंद्र रघुवंशी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। डॉ. ज्योत्सना रघुवंशी ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी। इसके बाद डॉ. जावेद अख्तर खां ने अपनी प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने कविता को एक नए नजरिए से समझाया। डॉ. खां ने कहा कि निराला की इस कविता में राम को एक योद्धा नहीं, बल्कि एक हताश और संघर्षरत इंसान के रूप में दर्शाया गया है।
उन्होंने कविता का सार बताते हुए कहा कि यह कविता क्रोध के सामने हार मानकर प्रेम से हर स्थिति को संभालने का संदेश देती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे शक्ति ने हनुमान के गुस्से को माँ बनकर शांत किया था। डॉ. खां ने कहा कि इस कविता को 1936 में लिखा गया था, जब देश में स्वतंत्रता संग्राम चल रहा था। उन्होंने कविता के अर्थ को वर्तमान 2025 की स्थितियों से भी जोड़ा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. जयसिंह नीरद ने की, जिन्होंने डॉ. जितेंद्र रघुवंशी को एक बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी बताया। धन्यवाद ज्ञापन भावना रघुवंशी ने दिया।
इस कार्यक्रम में प्रो. कमलेश नागर, अनिल शुक्ल, प्रो. नसरीन बेगम, अनिल शर्मा, मानस रघुवंशी और प्रमोद सारस्वत सहित कई प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। मानस रघुवंशी और प्रमोद सारस्वत ने आए हुए अतिथियों का स्वागत किया।