जनसेवा केंद्र या ‘धोखाधड़ी का अड्डा’! आगरा के बोदला सेक्टर-4 में संचालक करता था साइबर ठगों की मदद, खातों और QR कोड से मंगाता था पैसा; 3 गिरफ्तार

आगरा। आगरा पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर उनके बैंक खातों और क्यूआर कोड का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए करता था। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें बोदला सेक्टर-4 में एक जनसेवा केंद्र चलाने वाला मुख्य आरोपी भी शामिल है।


कैसे फंसाता था जनसेवा केंद्र संचालक?

डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब जगदीशपुरा के रामनगर निवासी साहिल निगम ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। साहिल के फोन पर लगातार संदिग्ध कॉल और मैसेज आ रहे थे। साहिल ने बताया कि बोदला सेक्टर-4 में “अपना कम्युनिकेशन साइबर कैफे” नाम से जनसेवा केंद्र चलाने वाले अभय वर्मा ने उससे कहा कि उसके (अभय के) खाते की लिमिट पूरी हो गई है, इसलिए उसने साहिल का बैंक खाता और एटीएम कार्ड ले लिया।

इसके बाद अभय ने साहिल का एटीएम कार्ड अपने साथियों कार्तिक (उर्फ कुंदन) और प्रियांशु को दे दिया। साहिल के खाते में 3-4 बार पैसे आए, और ये तीनों साहिल का एटीएम कार्ड का उपयोग करके पैसे निकालते रहे। शनिवार को पुलिस ने आरोपी अभय वर्मा, कुंदन उर्फ कार्तिक (लोहामंडी) और प्रियांशु (लोहामंडी) को गिरफ्तार कर लिया।


कमीशन के लालच में बना ठगों का जरिया

गिरफ्तार आरोपी अभय वर्मा ने पूछताछ में बताया कि उसके जनसेवा केंद्र पर उसकी मुलाकात आयुष नामक एक व्यक्ति से हुई थी। आयुष ने कथित तौर पर गेमिंग के नाम पर अभय से उसके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोड की जानकारी मांगी और बदले में कमीशन देने का लालच दिया।

कमीशन के लालच में आकर अभय वर्मा ने आयुष और उसके साथी मुकेश को अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोड उपलब्ध कराना शुरू कर दिया। इन खातों में समय-समय पर साइबर ठगी के पैसे आते थे, जिन्हें अभय वर्मा सीडीएम मशीन के माध्यम से अन्य खातों में ट्रांसफर कर देता था और अपना कमीशन रख लेता था।

अभय के साथ उसके जनसेवा केंद्र में काम करने वाले कुंदन उर्फ कार्तिक और प्रियांशु भी इस अपराध में शामिल हो गए। उन्होंने भी अन्य लोगों से खाते, क्यूआर कोड और एटीएम कार्ड जुटाकर साइबर ठगों को मुहैया कराए। तीनों अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे षड्यंत्रपूर्वक लोगों को बहला-फुसलाकर बैंकिंग विवरण प्राप्त कर साइबर ठगी के लेन-देन में शामिल थे। यह घटना दर्शाती है कि कैसे कुछ जनसेवा केंद्र, जो लोगों की मदद के लिए बनाए गए हैं, साइबर अपराधियों के लिए ‘स्वयं सेवा केंद्र’ बन गए हैं।

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