आगरा में ‘ऑफिस-ऑफिस’ का नया संस्करण: टॉरेंट पावर दफ्तर में ‘मुसद्दीलाल’ बने उपभोक्ता, AC की हवा में ठिठोली करते कर्मचारी और गार्डों के ‘वीआईपी’ व्यवहार से जनता बेहाल!

आगरा। 1990 के दशक और उससे पहले जन्मे लोगों ने 2001 में प्रसारित लोकप्रिय धारावाहिक ‘ऑफिस-ऑफिस’ ज़रूर देखा होगा, जिसमें बेचारा मुसद्दीलाल सरकारी दफ्तरों में एक टेबल से दूसरी टेबल भटकता रहता था। आगरा की बिजली वितरण कंपनी टॉरेंट पावर के प्रतापपुरा स्थित कस्टमर ऑफिस का भी कुछ ऐसा ही हाल है। आज, 12 अगस्त 2025 को, उपभोक्ता बिल संबंधी समस्याओं या अन्य कार्यों के लिए आते हैं और ‘ऑफिस-ऑफिस’ खेलकर वापस चले जाते हैं, जहाँ उन्हें समाधान के नाम पर सिर्फ AC की ठंडी हवा, कर्मचारियों की आपसी हँसी-ठिठोली और गार्डों का अजीब व्यवहार ही मिल पाता है।


6 काउंटर में से 2 ही चालू

अव्यवस्था का आलम: बंद काउंटर और ‘मुलाकात’ में घंटों की देरी

प्रतापपुरा स्थित टॉरेंट पावर के ग्राहक सेवा केंद्र पर आज भी भीड़ इतनी थी, लेकिन समाधान न के बराबर। काउंटर पर उपभोक्ताओं को अटेंड करने के लिए पर्याप्त कर्मचारी नहीं थे, और जो काउंटर खुले भी थे, उनमें से आधे बंद पड़े थे। एक-एक व्यक्ति को एक टेबल से दूसरी टेबल पर भेजा जा रहा था, और यदि किसी को अंदर बैठे “बड़े साहब” (मैनेजर) से मिलना होता, तो उसके लिए 2-3 घंटे का समय चाहिए होता था। मैनेजर साहब खुद को किसी साहब से कम नहीं समझ रहे थे। इतना इंतजार करने के बाद भी अक्सर कोई न कोई कागज़ की कमी बताकर उन्हें अगले दिन या कुछ दिन बाद फिर से ‘ऑफिस-ऑफिस’ खेलने के लिए बुला लिया जाता था। इस दौरान कर्मचारी आपस में हँसी-ठिठोली करते दिखाई दिए, जबकि बाहर उपभोक्ता गर्मी और लंबी कतारों से परेशान थे।


सिक्योरिटी गार्डों का ‘VIP’ व्यवहार और मूलभूत सुविधाओं का अभाव

सबसे बड़ी परेशानी तो यहाँ के सिक्योरिटी गार्ड हैं, जो गेट और खिड़की के बीच खड़े होकर ग्राहकों के साथ उनके पहनावे और चेहरे के हिसाब से व्यवहार करते हैं। यदि कोई ग्रामीण या साधारण सा व्यक्ति दिखता है, तो उसकी बात अलग लहजे में की जाती है। वहीं, यदि कोई ‘VIP’ जैसा दिखता है, तो गार्ड झुककर उसे अंदर का रास्ता दिखाते हैं।

हद तो तब हो गई जब एक महिला को वॉशरूम जाना था और पूछते-पूछते वह अंदर की तरफ गईं। इस पर एक गार्ड ने चिल्लाकर कहा, “यहाँ वॉशरूम नहीं है, बाहर जाकर सड़क पर करके आओ।” यह सुनकर हैरानी होती है कि एक बड़ी कंपनी के ऑफिस में, जहाँ महिला और पुरुष कर्मचारी काम करते हैं, वहाँ ग्राहकों के लिए वॉशरूम की सुविधा न हो! पीने के पानी की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है।

कंपनी की इस तरह की अव्यवस्था और ग्राहक सेवा की कमी के बावजूद, इनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। वे तो ‘ऑफिस-ऑफिस’ खेलकर करोड़ों रुपये कमाते रहेंगे और जनता अपनी मजबूरी में झेलती रहेगी। यदि आपको टॉरेंट पावर से कोई काम हो, तो यह मत सोचिएगा कि इसमें DVVNL से कम समय लगेगा, बल्कि इसमें और भी अधिक समय लगने की संभावना है।


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Abhimanyu Singh

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