
आगरा। अपने वरिष्ठ अधिकारी पर लगातार बेइज्जत करने और परेशान करने का आरोप लगाकर लापता हुए एसबीआई के वरिष्ठ क्लर्क सुरेंद्र पाल सिंह तीसरे दिन अपने घर लौट आए हैं। हालांकि, उनकी हालत ठीक नहीं है। परिजनों के मुताबिक, वे मानसिक तनाव में हैं और घर लौटने के बाद से अपने कमरे में ही हैं, किसी से बात नहीं कर रहे हैं। उनके भाई मनोज पाल सिंह ने उनके घर लौटने की पुष्टि की है।
लापता होने से पहले लिखा था भावुक पत्र
सुरेंद्र पाल सिंह 18 अगस्त को बैंक से लापता हो गए थे। परिजनों ने बताया कि वह उस दिन बैंक गए थे, जहाँ उनके अधिकारी ने उनके साथ फिर से अभद्रता की। इससे परेशान होकर वे सुबह 11:50 बजे बैंक से निकल गए। शाम को उन्होंने अपने भांजे सचिन को फोन कर अपनी बाइक दे दी और एक लिफाफे में एक पत्र थमा दिया।
इस पत्र में उन्होंने अपने अधिकारी एजीएम (सहायक महाप्रबंधक) विक्रम कुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने लिखा था कि वह अपमान और अपशब्द नहीं सुन सकते। अधिकारी उन पर बीमारी का नाटक करने, काम से बचने और हरामखोरी का आरोप लगाते थे। सुरेंद्र ने लिखा था कि वह हाइपरटेंशन, एंग्जायटी, सर्वाइकल और स्लिप डिस्क के मरीज हैं, लेकिन अधिकारी इसे ड्रामा समझते थे। उन्होंने पत्र में लिखा था कि अगर उन्हें कुछ होता है तो इसके जिम्मेदार विक्रम कुमार होंगे।

पत्नी ने पुलिस कमिश्नर से की थी मुलाकात
सुरेंद्र पाल सिंह के लापता होने के बाद उनकी पत्नी नित्या सिंह ने 21 अगस्त को परिजनों के साथ पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार से मुलाकात की थी। उन्होंने बताया था कि सुरेंद्र की रीढ़ की हड्डी में दिक्कत है और वह कमर पर बेल्ट पहनकर काम करते थे, लेकिन उनके अधिकारी उनकी बीमारी को ड्रामा बताते थे।
बताया जा रहा है कि लापता होने के बाद सुरेंद्र मथुरा चले गए थे। अब वे वापस घर आ गए हैं, लेकिन सदमे में होने के कारण परिजन भी उनसे ज्यादा कुछ पूछ नहीं पाए हैं। यह मामला एक बार फिर कार्यस्थल पर कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और वरिष्ठ अधिकारियों के दुर्व्यवहार जैसे गंभीर मुद्दों को सामने लाता है।