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आगरा में महिला सपा कार्यकर्ताओं का ‘शराब ठेके बनाम स्कूल’ मार्च: बोलीं- ‘स्कूल बंद, ठेके चालू, ऐसे कैसे बनेगा विश्वगुरु!’ राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

आगरा। गुरुवार को आगरा में समाजवादी पार्टी (सपा) महिला मोर्चा ने स्कूलों के विलय (मर्जर) के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। रावली मंदिर से जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च करते हुए सपा कार्यकर्ताओं ने “स्कूल बंद, ठेके चालू, ऐसे कैसे बनेगा विश्वगुरु” जैसे नारे लगाए और राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा।


‘शिक्षा का स्तर गिरेगा, गरीबों को होगा नुकसान’

महानगर अध्यक्ष प्रियंका चौहान ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश सरकार हजारों की संख्या में सरकारी स्कूलों को बंद कर रही है, जबकि शराब के ठेकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे देश में शिक्षा का स्तर गिर जाएगा और जब देश की युवा पीढ़ी पढ़ेगी ही नहीं, तो भारत विश्वगुरु कैसे बनेगा?

महिला सभा की जिला अध्यक्ष कुसुमलता ने इस फैसले के दूरगामी परिणामों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्कूलों को मर्ज करने से सिर्फ बच्चों की पढ़ाई ही नहीं रुकेगी, बल्कि स्कूल में काम करने वाले रसोइया, सफाईकर्मी और सुरक्षा गार्ड जैसे लोगों की भी नौकरी चली जाएगी। उनका मानना है कि यह फैसला सीधे तौर पर गरीब तबके को और नुकसान पहुंचाएगा।


नारेबाजी में जुबान फिसली, पर इरादे बुलंद

प्रदर्शन के दौरान, समाजवादी पार्टी महिला सभा की कार्यकर्ताओं की जुबान एक जगह फिसल गई। जहां उन्हें “गरीबों को शिक्षा का अधिकार वापस दो” कहना था, वहीं उन्होंने “शिक्षा का अधिकार वापस लो” बोल दिया। हालांकि, इस छोटी सी चूक के बावजूद, उनका विरोध प्रदर्शन और सरकारी स्कूलों को बंद करने के खिलाफ उनका संदेश स्पष्ट था।

कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें सरकारी स्कूलों को बंद करने की योजना पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई है।

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