कपड़ा उद्योग पर GST का संकट, आगरा में भी विरोध
आगरा। केंद्र सरकार द्वारा ₹2500 से अधिक मूल्य के वस्त्रों पर 18% जीएसटी लगाने के फैसले का पूरे देश में विरोध हो रहा है। क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। इसी कड़ी में आगरा के कपड़ा उद्योग ने भी इस निर्णय को “उद्योग के लिए घातक” बताया है।
आगरा रेडिमेट गारमेंट्स ट्रेडर्स और मैन्युफैक्चर एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष आर.के. नईयर ने CMAI के मत का समर्थन करते हुए कहा कि इस फैसले से उद्योग की स्थिति बहुत खराब हो जाएगी। उनका कहना है कि गुणवत्ता वाले और ब्रांडेड कपड़े महंगे हो जाएंगे, जिससे वे आम उपभोक्ता की पहुंच से दूर हो जाएंगे।

ऊनी और पारंपरिक कपड़ों पर सबसे ज्यादा असर
श्री नईयर ने विशेष रूप से बताया कि उत्तर भारत में बिकने वाले ऊनी वस्त्रों की औसत कीमत ₹2500 से अधिक होती है, जो अब मध्यम वर्ग के लिए महंगे हो जाएंगे। इसके साथ ही, पारंपरिक भारतीय परिधान जैसे कुर्ता-पायजामा, एथनिक ड्रेसेस, कोट-सूट और शेरवानी भी इस उच्च कर दर के दायरे में आ जाएंगे, जिससे शादी-ब्याह के मौसम में इन कपड़ों की बिक्री पर सीधा असर पड़ेगा।
पूरी इंडस्ट्री को 5% जीएसटी स्लैब में लाने की मांग
इस फैसले के खिलाफ अपील करते हुए श्री नईयर ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि पूरे वस्त्र उद्योग को 5% जीएसटी स्लैब में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि इससे न केवल छोटे निर्माताओं और कारीगरों को रोजगार का संकट नहीं झेलना पड़ेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी किफायती दामों पर गुणवत्ता वाले कपड़े मिल पाएंगे।