आगरा के गुरुद्वारा गुरु का ताल में गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी शताब्दी पर दुर्लभ निशानियों की प्रदर्शनी

आगरा। आगरा के प्रसिद्ध गुरुद्वारा गुरु का ताल में गुरु तेग बहादुर साहिब की 350 साला शहीदी शताब्दी को समर्पित एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर सिख धर्म के तीन गुरुओं से जुड़ी बेहद दुर्लभ निशानियां दर्शन के लिए रखी गईं, जिन्हें देखने के लिए भारी संख्या में संगत गुरुद्वारा पहुंची।


तीन गुरु साहिबान से जुड़ी अलौकिक निशानियां

इस अनूठी प्रदर्शनी में सिख धर्म के दूसरे गुरु गुरु अंगद देव, छठवें गुरु गुरु हरगोबिंद साहिब और दसवीं पातशाही गुरु गोविंद सिंह द्वारा इस्तेमाल की गई वस्तुएं, उनके द्वारा लिखी गई पोथी पुस्तकें, शस्त्र, शास्त्र, सिक्के, बर्तन आदि शामिल थे। ये सभी निशानियां एक साथ एक ही स्थान पर संगत के दर्शनार्थ उपलब्ध थीं।

इन दुर्लभ निशानियों को गुरु साहिबान के समकालीन रहे परिवारों के वंशज डॉ. भगवान सिंह और भाई जसकरण सिंह विशेष रूप से आगरा लेकर आए थे। गुरुद्वारे में इन पवित्र निशानियों का भव्य स्वागत किया गया। गुरुद्वारा गुरु का ताल के संत बाबा प्रीतम सिंह और अन्य सेवकों ने पुष्प वर्षा करते हुए इन निशानियों को दरबार साहिब में लेकर आए।


वर्तमान पीढ़ी को गुरु साहिबान से जोड़ने का प्रयास

संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि इन वस्तुओं और पोथी पुस्तकों को एक साथ एक ही स्थान पर दर्शन के लिए रखा गया है, ताकि संगत गुरु साहिबान के जीवन और शिक्षाओं से प्रेरणा ले सके। डॉ. भगवान सिंह और भाई जसकरण सिंह ने बताया कि पिछली तीन शताब्दियों से उनके पूर्वज इन निशानियों को संभालते आ रहे हैं।

श्री गुरु तेग बहादुर साहिब के 350वें शहीदी शताब्दी वर्ष के अवसर पर, इन निशानियों को देश भर के प्रमुख गुरुद्वारों में दर्शन के लिए ले जाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्तमान पीढ़ी को गुरु साहिबान के बलिदान और उनके आदर्शों के बारे में और अधिक जागरूक करना है। इन दुर्लभ निशानियों में सिक्के, कमंडल, घंटे, कटार, बरछी के साथ-साथ कुछ विशेष पोथी पुस्तकें भी शामिल थीं।

इस अवसर पर गुरुद्वारा गुरु का ताल के जत्थेदार राजेंद्र सिंह, बाबा अमरीक सिंह, महंत हरपाल सिंह, ज्ञानी केवल सिंह, ग्रंथी हरबंस सिंह, अजायब सिंह टीटू, वीर सिंह, सुशील सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति और संगत उपस्थित रहे। यह प्रदर्शनी सिख इतिहास और विरासत को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर रही।

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