जनकपुरी विवाद: ‘BN ग्रुप’ के मालिक राजा दशरथ ने राजा जनक राजेश अग्रवाल पर लगाए आरोप, दूसरा पक्ष भी आया सामने
आगरा। आगरा की ऐतिहासिक राम बारात और जनकपुरी महोत्सव इस वर्ष अपनी भव्यता के बजाय एक बड़े विवाद के लिए चर्चा में आ गया है। आयोजन के प्रमुख किरदारों, राजा दशरथ और राजा जनक के बीच उपजे मतभेद ने पूरे धार्मिक माहौल को राजनीतिक रंग दे दिया है। इस बार राजा दशरथ बने अजय अग्रवाल (मालिक, बीएन ग्रुप) ने राजा जनक बने राजेश अग्रवाल पर अनदेखी और बड़हार दावत का निमंत्रण न देने का गंभीर आरोप लगाया है। दूसरी ओर, टुडे एक्सप्रेस ने इस मामले में दूसरा पक्ष भी जाना है।
राजा दशरथ ने बताई मंच पर हुई अनदेखी की कहानी
राजा दशरथ बने अजय अग्रवाल ने बताया कि राम बारात का निमंत्रण देने के लिए राजा जनक स्वयं उनके घर लगन लेकर गए थे, जो कि एक सम्मानजनक परंपरा है। लेकिन बारात के जनकपुरी पहुँचने के बाद सारी मर्यादाएं तोड़ दी गईं। अजय अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उन्हें मंच पर राजा दशरथ के सम्मानजनक स्थान पर नहीं बिठाया गया, बल्कि एक कोने में खंभे के पीछे जगह दी गई। उन्होंने कहा, “जहाँ मुझे बैठना था, वहाँ राजा जनक खुद बैठ गए। मंच पर मौजूद होने के बावजूद न तो लोग मुझे देख पाए और न ही मैं लोगों को।”
यही नहीं, जनकपुरी महोत्सव के बाद होने वाली बड़हार की दावत, जो कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक और धार्मिक परंपरा है, के लिए भी उन्हें निमंत्रण नहीं भेजा गया। जब कुछ लोगों ने इस बात पर आपत्ति जताई तो दोपहर साढ़े तीन बजे राजा जनक का फोन आया, जबकि दावत शाम 4 बजे तक ही थी। अजय अग्रवाल ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा, “तब तक मेरा पारा हाई हो चुका था।” उन्होंने जनकपुरी कमेटी के दो पार्षदों पर भी उपद्रव मचाने और अभद्रता करने का आरोप लगाया है।

टुडे एक्सप्रेस की पड़ताल में सामने आया दूसरा पक्ष
इस मामले में जब टुडे एक्सप्रेस ने पड़ताल की तो सामने आया कि राजा जनक का परिवार इस विवाद से काफी आहत है। सूत्रों ने बताया कि राजा जनक का परिवार सीता जी की लगन के दिन ही, अपने बेटे अनुराज अग्रवाल के साथ, राजा दशरथ को निमंत्रण देने के लिए उनके घर गया था। इस मुलाकात की तस्वीरें भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई थीं, जो निमंत्रण दिए जाने का प्रमाण हैं। गौरतालाब है राजा दशरथ ने अरूप लगाया है की उनको खम्बे के पीछे छुपा दिया गया उनकी सीट ऐसी राखी तो यह भी बताया जा रहा है की उनकी कुर्सी से लोग उनको देख नहीं पा रहे थे तो उन्होंने राजा जनक को उनके स्थान से उठाकर खुद विराजमान हो गए ।
सूत्रों का कहना है कि जनकपुरी का माहौल पूरी तरह से आनंदमय है और ऐसे शुभ अवसर पर इस तरह की बातें होना दुर्भाग्यपूर्ण है। राजा जनक राजेश अग्रवाल ने भी जनकपुरी में सभी का पूरा सम्मान किया है और इस विवाद को बेवजह तूल देने के बजाय परिवार ने चुप्पी साधना बेहतर समझा और अपनी बात व्हाट्सएप स्टेटस के जरिए रखी।