आगरा। आगरा में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ की स्थिति बेकाबू होती जा रही है। यमुना खतरे के निशान (499 फीट) से 2.3 फीट ऊपर बह रही है, और बुधवार सुबह इसका जलस्तर 501.3 फीट पर पहुँच गया है। इस भयावह स्थिति के कारण शहर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्र और श्मशान घाट डूब गए हैं।
सड़क किनारे अंतिम संस्कार, डूबे श्मशान घाट
ताजगंज और पोइया घाट स्थित प्रमुख श्मशान घाट पानी में डूब चुके हैं। मंगलवार को पोइया घाट पर जब लोग अंतिम संस्कार के लिए पहुँचे, तो उन्हें श्मशान के साथ-साथ वहाँ तक पहुँचने वाले रास्ते पर भी 2-3 फीट तक पानी मिला। मजबूरन, लोगों को शव का अंतिम संस्कार सड़क किनारे ही करना पड़ा। यह स्थिति दिखाती है कि बाढ़ ने न केवल जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि मृत्यु के बाद की क्रियाओं को भी बाधित कर दिया है।
कई गाँव और कॉलोनियाँ जलमग्न
मनोहरपुर से पोइया जाने वाली सड़क पर 2 किलोमीटर तक 4-5 फीट पानी भर गया है, जिससे 10 गाँवों और कॉलोनियों के लोग फंस गए हैं। मां गौरी टाउन सहित 25 कॉलोनियाँ पूरी तरह से जलमग्न हो गई हैं, और करीब 4000 लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।

कैलाश मंदिर बंद और सड़कें जलमग्न
एहतियात के तौर पर कैलाश महादेव मंदिर के पट भक्तों के लिए बंद कर दिए गए हैं। प्रधान महंत भरत गिरी ने श्रद्धालुओं से मंदिर की ओर न आने की अपील की है। यमुना किनारा रोड पर स्थित आरती स्थल पर भी बैरिकेडिंग लगा दी गई है। हाथी घाट रोड पर 5-6 फीट तक पानी भरा हुआ है, जहाँ वाहन और यहां तक कि घोड़ागाड़ी भी फंस रही है। लोग अपने घरों को बाढ़ से बचाने के लिए ऊँची-ऊँची बाउंड्री बना रहे हैं, लेकिन बढ़ते जलस्तर के सामने उनकी कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं।

































































































