
आगरा। आगरा में ‘सशक्त पीली सेना’ की अध्यक्ष शबाना खंडेलवाल ने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य पर महिलाओं को अपमानित करने और उनके अंधभक्तों द्वारा धक्का-मुक्की करवाने का गंभीर आरोप लगाया है। एक वीडियो संदेश जारी करते हुए शबाना खंडेलवाल ने अनिरुद्धाचार्य और उनके महिला अंधभक्तों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अनिरुद्धाचार्य को आगरा में सत्संग करने की चुनौती देते हुए कहा कि वह अपनी महिला सेना के साथ उनसे सीधे सवाल करेंगी।
“नारी जाति को अपमानित करने की कोशिश”
शबाना खंडेलवाल ने अपने बयान में कहा, “आज एक बार फिर मैंने देखा कि बाबा अनिरुद्धाचार्य ने हमारी महिलाओं का अपनी आँखों के सामने अपमानित करवाया, उनको धक्के दिलवाए अपने अंधभक्तों द्वारा। एक बार फिर से उन्होंने नारी जाति को अपमानित करने की कोशिश की।” उन्होंने उन महिला अंधभक्तों पर भी शर्म व्यक्त की जो अनिरुद्धाचार्य के स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर खड़ी थीं।
“क्या वह बाबा किसी बड़े मंदिर की स्थापना करके आया था?”
शबाना खंडेलवाल ने अनिरुद्धाचार्य के अनुयायियों से सवाल किया, “मैं पूछना चाहती हूँ कि क्या वह बाबा वहाँ किसी बड़े मंदिर की स्थापना करके आया था या किसी बड़े सत्संग में भाग लेकर आया था?” उन्होंने आगे कहा कि उन्हें उस बाबा से पूछना चाहिए था कि वह कितनी जगह ‘मुँह मार’ कर आया था, जो यहाँ तो भारत की बहनों को अपमानित करता है और विदेशों में जाकर सत्संग के नाम पर ‘रंगरलियाँ’ मनाता है।

“अपनी बहनों का साथ देने के बजाय उनको धक्के देती हैं”
खंडेलवाल ने उन महिला अनुयायियों को भी कटघरे में खड़ा किया जो बाबा के इशारे पर अपनी ही बहनों का साथ देने के बजाय उन्हें धक्के देती हैं और उन पर हाथ उठाती हैं। उन्होंने कहा, “वापसी पर वही अंधभक्त बहनें हमारे इस समाज को लज्जित करती हैं बाबा के इशारे पर अपनी बहनों का साथ देने के बजाय उनको धक्के देती हैं, उन पर हाथ उठाती हैं।” उन्होंने उस महिला पत्रकार की सराहना की जिसने निर्भीकता से अनिरुद्धाचार्य से सवाल पूछने की हिम्मत की।
अनिरुद्धाचार्य को आगरा में सत्संग करने की खुली चुनौती
शबाना खंडेलवाल ने अनिरुद्धाचार्य को आगरा शहर में सत्संग करने की खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा, “मैं बाबा अनिरुद्धाचार्य को चैलेंज करती हूँ की हिम्मत है तो आगरा शहर में अपना सत्संग करके दिखाएँ। मैं अपनी महिला सेना के साथ जाकर उनके प्रांगण में बाबा से सवाल करूँगी क्योंकि मुझे पता है जवाब उसको आते ही नहीं। सत्संग का ‘स’ भी नहीं पता बाबा को।”
उन्होंने अनिरुद्धाचार्य को ‘कार्टून नेटवर्क चैनल’ बताते हुए कहा कि वह केवल लोगों का मनोरंजन कर सकते हैं, ज्ञान नहीं बाँट सकते।