प्रकाशित: रात 9:30 बजे, 27 जुलाई 2025 | स्थान: आगरा, उत्तर प्रदेश
मुख्य बिंदु
- ‘आप और हम समिति’ द्वारा अतिथि वन कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘हरियाली तीज महोत्सव’ का हुआ भव्य और यादगार आयोजन।
- पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और मेहंदी की सुगंध से जीवंत हुआ माहौल, महिलाओं ने मलहार गाकर मनाया पर्व।
- प्रसिद्ध संचालक विकास बंसल (घी वाले) ने अपने अनूठे अंदाज से बांधा समां, रोचक प्रतियोगिताओं ने बढ़ाया उत्साह।
- कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच श्रीमती कीर्ति गोयल के सिर सजा ‘ताज क्वीन’ का प्रतिष्ठित ताज।
- कार्यक्रम ने आधुनिक परिवेश में भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का दिया एक महत्वपूर्ण संदेश।
आगरा। जब आकाश में सावन की काली घटाएं घिरती हैं, जब बारिश की बूंदें सूखी धरती की प्यास बुझाती हैं, और जब प्रकृति अपने अनुपम सौंदर्य के साथ सोलह श्रृंगार करती है, तब आता है भारतीय संस्कृति का सबसे जीवंत और उल्लासपूर्ण पर्व- हरियाली तीज। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति, प्रेम, और परंपरा का एक ऐसा संगम है जो हर किसी के मन को भिगो देता है। इसी संगम को साकार करते हुए रविवार को आगरा के प्रतिष्ठित अतिथि वन कॉन्फ्रेंस हॉल में ‘आप और हम समिति’ के तत्वावधान में एक अविस्मरणीय ‘हरियाली तीज महोत्सव’ का आयोजन किया गया। यह एक ऐसा आयोजन था जहाँ परंपरा आधुनिकता से मिली, जहाँ लोकगीतों की मिठास ने डीजे के शोर को पीछे छोड़ दिया, और जहाँ हर चेहरा सावन की खुशी में खिला हुआ नजर आया।
संस्कृति का अभूतपूर्व उत्सव: तीज का महत्व और परंपरा
यह त्योहार प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी पर्व है। चारों ओर की हरियाली मन में नई आशा और ऊर्जा का संचार करती है। सावन के झूले, हाथों में रची मेहंदी, और पारंपरिक ‘मलहार’ गीत इस उत्सव के अभिन्न अंग हैं। ‘मलहार’ वर्षा ऋतु का राग है, जिसके सुरों में विरह की पीड़ा भी है और मिलन की आतुरता भी। यह वही राग है जिसे गाकर पुराने समय में बारिश को आमंत्रित किया जाता था। ‘आप और हम समिति’ ने इन्हीं गहन सांस्कृतिक जड़ों को समझते हुए एक ऐसे कार्यक्रम की रचना की, जो केवल एक जश्न नहीं, बल्कि अपनी विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास था।
अतिथि वन में उतरा सावन: माहौल और प्रस्तुतियां
कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत मंगल गीतों से हुई, जिसमें महिलाओं ने सामूहिक रूप से देवी पार्वती की स्तुति की। इसके बाद शुरू हुआ ‘मलहार’ गायन का दौर। ढोलक और मंजीरे की थाप पर जब महिलाओं ने अपनी खनकती आवाजों में “अम्मा मेरी, बाग में झूले पड़े…” और “सावन आयो रे…” जैसे पारंपरिक गीत गाने शुरू किए, तो पूरा माहौल भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया। यह कोई पेशेवर गायन नहीं था, बल्कि यह हृदय से निकले हुए वे सुर थे जो पीढ़ियों से माताओं ने अपनी बेटियों को सौंपे हैं। हर गीत के साथ तालियों की गड़गड़ाहट और “वाह! वाह!” की ध्वनि गूंज उठती, जो कलाकारों का उत्साह बढ़ा रही थी।
दमदार संचालन और ‘ताज क्वीन’ का रोमांच
कार्यक्रम का सबसे रोमांचक क्षण ‘ताज क्वीन’ प्रतियोगिता का आयोजन था। यह केवल एक सौंदर्य प्रतियोगिता नहीं थी, बल्कि इसमें महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा, उनकी समझ और आत्मविश्वास का भी परीक्षण था। पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी महिलाओं ने जब रैंप पर वॉक किया, तो ऐसा लगा मानो राजस्थान और ब्रज की पूरी संस्कृति मंच पर उतर आई हो। कई रोचक सवालों और सभी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श के बाद, निर्णायकों ने श्रीमती कीर्ति गोयल को इस वर्ष की ‘ताज क्वीन’ घोषित किया। ताज पहनते समय कीर्ति के चेहरे पर छाई खुशी और आत्मविश्वास ने पूरे कार्यक्रम का मान बढ़ा दिया।
एकजुटता की मिसाल: ‘आप और हम’ की भावना
विनिता जैन, मंजू गोयल, कीर्ति बंसल, रानी गोयल, रितु गर्ग, रिचा अग्रवाल, रश्मि अग्रवाल, शालिनी अग्रवाल, और अंकिता अग्रवाल
इस आयोजन की सबसे खूबसूरत बात यह थी कि इसमें श्री अमित अग्रवाल और श्री मनोज अग्रवाल जैसे पुरुष सदस्यों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और व्यवस्था में सहयोग किया। यह इस बात का प्रतीक है कि परंपराओं का संरक्षण केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।
अंत में, सभी विजेताओं को पुरस्कृत किया गया और उपस्थित सभी लोगों ने एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं दीं। यह शाम सिर्फ नाच-गाने और खाने-पीने की शाम नहीं थी; यह अपनी संस्कृति पर गर्व करने, अपनी जड़ों को सींचने और सामुदायिक सौहार्द्र के धागों को और मजबूत करने की एक शाम थी। ‘आप और हम समिति’ ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच भी परंपराओं का उल्लास पूरी शिद्दत से मनाया जा सकता है।

































































































