
आगरा। आगरा के आवास विकास सेक्टर 4 स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ बैंक के अपने ही सराफ की मिलीभगत से नकली ज्वेलरी पर लाखों का गोल्ड लोन ले लिया गया। बैंक मैनेजर की शिकायत पर ज्वेलरी की जांच करने वाले सराफ सहित दो लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। यह घटना बैंक की आंतरिक सुरक्षा और कर्मचारियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
कैसे लगा बैंक को चूना?
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, आवास विकास सेक्टर 4 के मैनेजर जितेंद्र सिंह कैन ने एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 14 नवंबर 2022 को अनीता पत्नी मोनू (प्रेम नगर, शाहगंज) और मुरारीलाल सक्सेना गोल्ड लोन लेने के लिए बैंक आए थे। उन्होंने एक सोने की अंगूठी, चार सोने की चूड़ियां और एक सोने का पेंडेंट गोल्ड लोन के लिए जमा किए।
बैंक ने इन आभूषणों की जांच के लिए अपने पैनल के ज्वेलर मनोज कुमार वर्मा को दिया। ज्वेलर मनोज कुमार वर्मा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सभी आभूषण शुद्ध सोने के हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर बैंक ने अनीता को 1.42 लाख रुपए और 1.15 लाख रुपए के दो अलग-अलग लोन दे दिए।
दूसरा ऑडिटर आया तो खुली पोल
काफी समय बाद, जब बैंक के दूसरे ऑडिटर और सराफ संजय अग्रवाल ने उन्हीं आभूषणों को दोबारा चेक किया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। संजय अग्रवाल की जांच में सामने आया कि जो आभूषण सोने के बताकर लोन लिया गया था, वे सभी नकली थे।
इस धोखाधड़ी का पता चलते ही बैंक कर्मचारी अनीता के घर प्रेम नगर पहुंचे, लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं चला। इसके बाद, बैंक अधिकारियों ने गोल्ड की जांच करने वाले सराफ मनोज वर्मा के घर संपर्क किया, लेकिन वह इस मामले को घुमाने लगे और सहयोग नहीं किया।
आरोप है कि सराफ मनोज वर्मा ने अपने साथी मुरारीलाल सक्सेना और अनीता के साथ मिलकर सोची-समझी साजिश के तहत नकली आभूषणों को असली बताकर बैंक से लोन दिलवाया है। पुलिस ने बैंक मैनेजर जितेंद्र सिंह कैन की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है।