Agra News Today आगरा नगर निगम में अफसरों की मनमानी से पार्षद खुद जनता की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल का सहारा लेने लगे हैं।
आगरा नगर निगम में जनप्रतिनिधियों और अफसरों के बीच खिंचाव लगातार गहराता जा रहा है। स्थिति यह हो गई है कि जनता के काम कराने के लिए चुने हुए पार्षदों को भी आईजीआरएस पोर्टल (CM Helpline) पर शिकायत दर्ज करनी पड़ रही है। पार्षदों का आरोप है कि उनके लिखे पत्रों पर कार्रवाई नहीं होती, लेकिन वही शिकायतें जब पोर्टल पर डाली जाती हैं, तो तुरंत समाधान हो जाता है।
30 से ज्यादा पार्षद कर चुके शिकायत
शहर के 30 से अधिक पार्षद खुद, अपने परिजनों या परिचितों के नाम से आईजीआरएस पर शिकायतें दर्ज कर चुके हैं। यही नहीं, कई पार्षद अब आम जनता से भी कह रहे हैं कि सीधे पोर्टल पर शिकायत करें, ताकि काम जल्द हो सके।
सरकार के आदेश हवा में
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने कई बार अफसरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे जनप्रतिनिधियों से तालमेल बनाकर काम करें। बावजूद इसके हालात जस के तस हैं और अफसर मनमानी पर अड़े हुए हैं।
केस स्टडीज
केस 1 – पार्षद निशांत सिंह (देवनगर वार्ड)
क्षेत्रीय नागरिकों ने कॉलोनी में लाइट लगाने की मांग की। पार्षद निशांत सिंह ने अधिकारियों से बात की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जब लोगों ने आईजीआरएस पर शिकायत की, तो कुछ ही दिनों में लाइट लग गई। अब निशांत खुद निगम के विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतें पोर्टल पर डाल रहे हैं।
केस 2 – पार्षद ऊषा देवी (चारसू दरवाजा वार्ड)
ऊषा देवी के बेटे और पूर्व पार्षद श्रीकांत चौहान ने निगम को एक छोटे निर्माण कार्य के लिए पत्र लिखा। बजट का बहाना बनाकर अफसरों ने फाइल दबा दी। जब आईजीआरएस पर शिकायत की गई, तो पहले केवल कागजों पर निस्तारण दिखाया गया। लेकिन निगेटिव फीडबैक डालते ही अफसरों ने आनन-फानन में निर्माण कार्य पूरा करवा दिया।
पार्षदों की नाराज़गी
देवनगर पार्षद निशांत सिंह ने कहा –
“जनता ने हमें इसलिए चुना है कि उनके काम हों, न कि हम बहाने सुनें। जब अफसरशाही काम नहीं करती, तो मजबूरी में हमें आईजीआरएस का सहारा लेना पड़ता है।”
चारसू दरवाजा वार्ड की पार्षद ऊषा देवी ने कहा –
“अफसरों की मनमानी चल रही है। अगर अफसरों से तालमेल रखा जाए तो ही काम होता है, वरना जनता को आईजीआरएस जैसे प्लेटफार्म पर ही जाना पड़ता है।”
जनता पर असर
इस स्थिति का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर निस्तारण की जगह उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत डालने को कहा जाता है। हालांकि, जनता का मानना है कि अगर काम हो रहा है तो शिकायत का माध्यम मायने नहीं रखता, लेकिन इससे नगर निगम और अफसरों पर सवाल जरूर खड़े होते हैं।
Agra News Today:Agra Mayor vs Commissioner Controversy

































































































