आगरा के थाना न्यू आगरा अंतर्गत अमर विहार स्थित ट्यूलिप पैराडाइज सोसाइटी में एक महिला डॉक्टर के साथ फ्लैट के बाहर आकर गाली-गलौज, अभद्रता और धमकी देने के चर्चित मामले में पुलिस ने अपनी विवेचना पूरी कर ली है। पुलिस ने जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण के बाद दो आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया है, जबकि साक्ष्य न मिलने के कारण 10 नामजद आरोपियों के नाम मुकदमे से बाहर निकाल दिए गए हैं।
6 मार्च को दर्ज कराई गई थी एफआईआर: प्राप्त विवरण के अनुसार, ट्यूलिप पैराडाइज सोसाइटी निवासी डॉ. प्रियंका भारद्वाज ने गत 6 मार्च को थाना न्यू आगरा में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीड़िता का आरोप था कि जब उनके पति घर पर मौजूद नहीं थे, तभी अपार्टमेंट में ही रहने वाले अभिषेक सिंह, अश्विनी कांत भारद्वाज, अविनाश, रवि अग्रवाल, ब्रजेश सिंघल, एमएस त्यागी व अन्य लोग एकत्र होकर उनके फ्लैट के बाहर आ गए। आरोपियों ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और बार-बार दरवाजा तोड़कर अंदर घुसने की धमकियां दीं। बाद में आरोपियों की पत्नियां भी आ गईं और उन्होंने भी गाली-गलौज की।
एसीपी हरिपर्वत के आदेश पर हुई पुनः विवेचना: प्रारंभिक विवेचना के बाद जब पुलिस ने आरोप पत्र प्रेषित किया था, तब एसीपी हरिपर्वत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुनः निष्पक्ष विवेचना के निर्देश दिए। इसके पश्चात नए विवेचक ने घटनास्थल और सोसाइटी में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तथा आसपास के प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए। साक्ष्य संकलन के दौरान पुलिस ने पाया कि केवल दो व्यक्तियों की भूमिका ही मौके पर आपराधिक पाई गई है।
रुचि सिंह और अभिषेक सिंह बने आरोपी: पुनः जांच के बाद पुलिस ने आरोपी रुचि सिंह और अभिषेक सिंह के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने, अपमानित करने और जान से मारने की धमकी देने की सुसंगत धाराओं में आरोप पत्र (चार्जशीट) तैयार कर अदालत में प्रेषित कर दिया है। वहीं, मामले में नामजद किए गए अन्य 10 लोगों की मौजूदगी व संलिप्तता के कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, जिसके चलते जांच अधिकारी ने उनके नाम मुकदमे से पृथक कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि विवेचना पूरी तरह से निष्पक्ष और डिजिटल साक्ष्यों पर आधारित रही है।





























































































