Agra News Today: शीतलनाथ स्वामी का निर्वाण कल्याणक महोत्सव, दो मंदिरों में निर्वाण लड्डू की धूम

Agra News Today आगरा में दिगंबर जैन समाज द्वारा मंगलवार को परमात्मा श्री शीतलनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक महोत्सव अत्यंत भक्तिभाव और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के दो प्रमुख जैन मंदिरों—गुदड़ी मंसूर खां स्थित श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर और अवधपुरी स्थित श्री पद्मप्रभु जिनालय—में भव्य धार्मिक अनुष्ठान सानंद संपन्न हुए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने एक साथ पूजन-अर्चना कर धर्मलाभ प्राप्त किया और भगवान के मोक्षमार्ग का स्मरण किया।

गुदड़ी मंसूर खां में शीतलनाथ महामंडल विधान

गुदड़ी मंसूर खां स्थित श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मोक्ष कल्याणक महोत्सव के पावन अवसर पर शीतलनाथ महामंडल विधान का भव्य आयोजन किया गया। मंदिर परिसर का वातावरण मंत्रोच्चार की पावन ध्वनि और भक्ति रस से पूरी तरह सराबोर हो गया। यह आयोजन जैन समाज की अटूट श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं को दर्शाता है। शीतलनाथ महामंडल विधान का मुख्य उद्देश्य भगवान के कल्याणक (जन्म, दीक्षा, ज्ञान, मोक्ष) को स्मरण करना और उनके बताए मोक्षमार्ग पर चलने का संकल्प लेना होता है। यह विधान जैन धर्म के अनुयायियों के लिए आत्मिक शुद्धि और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

इस विधान की सभी मंगल क्रियाएं पंडित रविंद्र जैन शास्त्री एवं पंडित नीरज शास्त्री के कुशल निर्देशन में सम्पन्न कराई गईं। इन अनुभवी पंडितों द्वारा विधि-विधान से क्रियाएं शुरू होते ही श्रद्धालुओं का भक्तिभाव चरम पर पहुंच गया। दिगंबर जैन परंपरा के अनुसार, भक्तों ने अष्ट द्रव्यों (आठ द्रव्य—जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप और फल) के साथ भगवान शीतलनाथ के समक्ष पूजन-अर्चना कर मोक्षमार्ग पर चलने की प्रेरणा ली। प्रत्येक द्रव्य जैन दर्शन के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत का प्रतीक है, और इन द्रव्यों से की गई पूजा जैन तत्वों के प्रति समर्पण को व्यक्त करती है। यह पूजन आत्म-कल्याण की भावना को मजबूत करता है।

विधान के दौरान, सभी उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से निर्वाण कांड का वाचन किया। यह कांड भगवान के अंतिम समय और केवलज्ञान प्राप्त करने के बाद मोक्ष जाने की प्रक्रिया का वर्णन करता है, जिसे सुनकर सभी भक्तों ने अपने जीवन में धर्म के प्रति आस्था को और दृढ़ किया। मोक्षमार्ग का यह स्मरण भक्तों को वैराग्य और आत्म-कल्याण की ओर प्रेरित करता है। भगवान के चरणों में श्रद्धा-भाव से निर्वाण लड्डू अर्पित किए गए, जो जैन धर्म में भगवान के मोक्ष गमन के प्रतीक स्वरूप चढ़ाए जाते हैं और यह दर्शाता है कि भक्तों ने भगवान के मोक्ष प्राप्त करने की खुशी मनाई। इस अनुष्ठान में नरेश जैन, पार्षद राकेश जैन, वीरेंद्र जैन, सुभाष जैन, धर्मेश जैन, रविंद्र जैन, अभिषेक जैन, ऋषि जैन, पवन जैन, शानू जैन सहित सुशीला जैन, अल्पना जैन, सुनीता जैन, शशि जैन, कुसुम जैन, मधु जैन, राजकुमारी जैन, पूनम जैन, मंजुला जैन और मंजू जैन सहित कई गणमान्य नागरिक और महिला श्रद्धालु उपस्थित रहीं, जिनकी उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता को बढ़ाया।

अवधपुरी में शांति धारा और सामूहिक पूजन

शहर के दूसरे भाग अवधपुरी स्थित श्री पद्मप्रभु जिनालय में वात्सल्य सेवा समिति के तत्वावधान में शीतलनाथ भगवान का निर्वाण कल्याणक महोत्सव बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तगण कतारबद्ध होकर शांति और भक्ति का अनुभव करने के लिए मंदिर में प्रवेश कर रहे थे।

महोत्सव की शुरुआत प्रभु की शांति धारा से हुई, जिसके माध्यम से श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, देश में सुख-समृद्धि और सामूहिक पुण्यलाभ की कामना की। जैन धर्म में शांति धारा को सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक क्रियाओं में से एक माना जाता है, क्योंकि यह शांति और सकारात्मकता का संचार करती है और भक्तों के मन को शुद्ध करती है। शांति धारा के उपरांत, पंडित विवेक जैन शास्त्री के निर्देशन में भक्तों ने सामूहिक रूप से भगवान शीतलनाथ का पूजन किया। पंडित विवेक जैन शास्त्री ने पूजन के महत्व और भगवान के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला, उनके सिद्धांतों का अनुसरण करने का महत्व समझाया।

यहां भी भक्तों ने निर्वाण कांड का वाचन किया और श्रद्धा भाव से निर्वाण लड्डू अर्पित किए। यह प्रसाद वितरण आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। इस दौरान पूरा वातावरण “श्री शीतलनाथ भगवान की जय” के जयकारों से गूंज उठा। भगवान शीतलनाथ की जय-जयकार करते हुए भक्तों का उत्साह चरम पर था, और मंदिर परिसर पूरी तरह भक्ति-भाव से सराबोर हो गया। इस आयोजन में इंद्रप्रकाश जैन, अजय जैन, ओम प्रकाश जैन, रवि जैन, प्रवीन जैन, नरेंद्र जैन, मनीष जैन, अनिल जैन, शुभम जैन, पीयूष जैन सहित रश्मि जैन, पुष्पा जैन, रंजना जैन, कविता जैन, रीता जैन, बीना जैन, हेमलता जैन, रिंकी जैन और समस्त पद्मप्रभु जिनालय परिवार के सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और आयोजन को सफल बनाया। दोनों मंदिरों के आयोजनों ने आगरा में जैन धर्म की गहरी आस्था और सामूहिक भक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया, यह दर्शाता है कि धार्मिक अनुष्ठान समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य करते हैं और आत्मिक शांति प्रदान करते हैं।

AGRA NEWS TODAY:अवधपुरी में शांति धारा और सामूहिक पूजन

Agra News Today: Hariparvat के Shri Shantinath Digambar Jain Mandir में हुआ वार्षिक कलशाभिषेक महोत्सव

Abhimanyu Singh

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