आगरा में यमुना का रौद्र रूप, 25 कॉलोनियों में बाढ़ का पानी, 2000 लोग पलायन को मजबूर


आगरा। आगरा में यमुना नदी ने 47 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए अपना रौद्र रूप दिखाया है। गोकुल बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण यमुना का जलस्तर खतरे के निशान (499 फीट) से ऊपर 501.1 फीट पर पहुंच गया है। इस विकराल स्थिति के कारण शहर की 25 से अधिक कॉलोनियाँ और कई गाँव जलमग्न हो गए हैं, जिससे हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं।

बाढ़ का कहर और पलायन

शहर के कई प्रमुख इलाके जैसे दयालबाग, बल्केश्वर, अमर विहार, मोतीमहल, और रामबाग बस्ती पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। ताजगंज मोक्षधाम में भी पानी भर जाने से अंतिम संस्कार के लिए नए स्थान (मलका का चबूतरा, शाहगंज, आवास विकास) निर्धारित किए गए हैं। ग्रामीणों और शहरी निवासियों को अपने घरों पर ताला लगाकर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। प्रशासन द्वारा स्थापित राहत शिविरों में बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं, जबकि कई अपने रिश्तेदारों के घर चले गए हैं।

ऐतिहासिक स्मारकों पर भी असर

यमुना का बढ़ा हुआ जलस्तर ऐतिहासिक स्मारकों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। यमुना का पानी 1978 के बाद पहली बार ताजमहल की बाहरी दीवारों तक पहुँच गया है। हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारियों ने बताया है कि स्मारक को कोई नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि इसे बाढ़ के पानी को झेलने के लिए ही बनाया गया था।

इसके अलावा, यमुना किनारा रोड पर स्थित एत्मादउद्दौला (बेबी ताज) के पीछे बने 12 कमरे पानी में डूब गए हैं और मेहताब बाग का गार्डन भी पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। आगरा किला की खाई में भी मंटोला नाले का बैक-फ्लो होने से पानी भर गया है।

प्रशासन की तैयारियां और अपील

जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया है। एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे यमुना किनारे न जाएं, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखें और जरूरी कागजातों को वॉटरप्रूफ बैग में रखें।

इस मुश्किल समय में आगरा पुलिस और प्रशासन लोगों की हर संभव मदद कर रहा है और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

दयालबाग क्षेत्र में पहुंचा बाढ़ का पानी।
अमर विहार के पास जलभराव।
मनोहरपुर रोड पर भरा पानी।
लोग घरों पर ताला लगाकर पलायन करने को मजबूर हैं।
यमुना से आधा किलोमीटर दूर हाथीघाट के पास बाजार में भरा पानी।
बल्केश्वर की कॉलोनी में बाढ़ आने पर टैक्टर से निरीक्षण करते अधिकारी।

Abhimanyu Singh

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