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आगरा में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’: भाजपा ने निकाला मौन जुलूस और लगाई प्रदर्शनी, ‘इतिहास का काला अध्याय’ बताया विभाजन को

आगरा। आगरा में आज ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस दौरान मौन जुलूस निकाला, जिसके बाद विभाजन के समय देश के दर्दनाक हालातों पर आधारित एक प्रदर्शनी का आयोजन किया। गोष्ठी में वक्ताओं ने देश के विभाजन को इतिहास का एक ‘काला अध्याय’ करार दिया। रेलवे ने भी मंडल के चार प्रमुख स्टेशनों पर इस विभीषिका से जुड़ी प्रदर्शनियां लगाईं।


भाजपा का मौन जुलूस, नेताओं और कार्यकर्ताओं की भागीदारी

भाजपा ने दीवानी चौराहा स्थित भारत माता मंदिर से शहीद स्मारक तक मौन जुलूस निकाला। हाथों में देशभक्ति और विभाजन के दर्द को दर्शाने वाले स्लोगन लिखी तख्तियां लिए भाजपाई मौन धारण किए हुए एमजी रोड होते हुए शहीद स्मारक पहुँचे, जहाँ एक गोष्ठी का आयोजन किया गया।

इस प्रदर्शन में गौरव राजावत, शशांक शर्मा (शैलू पंडित) और भाजपा के कई अन्य नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

मुख्य वक्ता प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रज बहादुर ने कहा कि 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय अनगिनत देशभक्तों ने अपनी जान गंवाई थी, और उन्हीं को श्रद्धांजलि देने के लिए यह आयोजन किया गया है। उन्होंने दोहराया कि धर्म के आधार पर हुआ देश का विभाजन भारतीय इतिहास का एक काला अध्याय है। महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने कहा कि विभाजन से लाखों परिवार बेघर हुए और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। उन्होंने दुख व्यक्त किया कि देश आज भी उस विभाजन का दर्द झेल रहा है।


आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शनी का शुभारंभ करते डीआरएम गगन गोयल।

रेलवे स्टेशनों पर भी विभाजन की यादें

उत्तर मध्य रेलवे, आगरा मंडल ने भी ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर विशेष आयोजन किए। आगरा मंडल के आगरा कैंट, मथुरा कैंट, ईदगाह और धौलपुर रेलवे स्टेशनों पर चित्र प्रदर्शनियां लगाई गईं।

आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शनी का शुभारंभ डीआरएम गगन गोयल ने किया। इन स्टेशनों पर विशेष रूप से उन लोगों की याद में प्रदर्शनियां लगाई गईं, जिन्होंने विभीषिका में अपने प्राण गंवाए या विस्थापन का दर्द झेला। स्टेशनों पर स्क्रीन डिस्प्ले और ऑडियो के माध्यम से भी विभाजन से जुड़ी जानकारी का प्रसारण किया गया। इन फोटो प्रदर्शनियों में विभाजन के दौरान रेलवे की भूमिका और विषम परिस्थितियों में लोगों को सुरक्षित लाने व ले जाने का सचित्र वर्णन दिखाया गया, जो उस दौर की मुश्किलों और मानवीय त्रासदी को बयां करता है।


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Abhimanyu Singh

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