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आगरा में ‘पुलिस-प्रॉपर्टी डीलर गठजोड़’ पर गंभीर आरोप: महिला ने कहा- पति को झूठे केस में फंसाया, अब बेटे को जेल भेजने की धमकी दे रही पुलिस!

किरावली, आगरा। आगरा के अछनेरा थाना क्षेत्र में एक महिला ने प्रॉपर्टी डीलर और स्थानीय पुलिस पर मिलीभगत कर उसकी पैतृक जमीन हड़पने का संगीन आरोप लगाया है। कुकथला निवासी राजकुमारी शर्मा ने दावा किया है कि उनकी पुश्तैनी जमीन (गाटा संख्या 292) पर प्रॉपर्टी डीलर ने अवैध कब्जा करने की कोशिश की, और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके पति को झूठे केस में फंसाकर जेल भिजवा दिया गया। अब महिला का आरोप है कि पुलिस उसके बेटे को भी फंसाने की धमकी देकर समझौता करने का दबाव बना रही है।


क्या है पूरा मामला?

राजकुमारी शर्मा के अनुसार, उनकी पैतृक जमीन गाटा संख्या 292 में उनके सहित पांच परिजनों का हिस्सा है। प्रॉपर्टी डीलर मुकेश अग्रवाल पहले ही इस जमीन के तीन हिस्सेदारों से जमीन खरीद चुके हैं। अब वह राजकुमारी और शेष दो अन्य हिस्सेदारों की जमीन पर भी कब्जा करना चाहते हैं। जब राजकुमारी ने अपनी जमीन बेचने से इनकार कर दिया, तो आरोप है कि मुकेश अग्रवाल ने स्थानीय पुलिस से कथित तौर पर मिलकर उनके पति रवि शर्मा को झूठे आरोपों में जेल भिजवा दिया।


जमीन पर कब्जा, मारपीट और धमकी के आरोप

राजकुमारी ने बताया कि 3 अगस्त 2025 को शाम 8 बजे मुकेश अग्रवाल अपने साथियों वासुदेव और रमेश चौकीदार के साथ 8-10 अन्य लोगों को लेकर उनकी जमीन पर पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने जमीन पर लगी मेड़ों को उखाड़ दिया और जब महिला ने इसका विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट भी की गई। पीड़िता का यह भी आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें और उनके बेटे को फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी।


पुलिस पर भी मिलीभगत और धमकी का आरोप

राजकुमारी शर्मा ने इस घटना की शिकायत थाना अछनेरा में दर्ज कराई। लेकिन, उनका आरोप है कि थाना प्रभारी ने मामले को गंभीर धाराओं में दर्ज करने के बजाय, एनसीआर (गैर-संज्ञेय रिपोर्ट) में दर्ज कर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया। इससे भी गंभीर आरोप यह है कि 6 अगस्त को एसआई मनदीप ने महिला को थाने बुलाकर उसके बेटे को जेल भिजवाने की धमकी देकर राजीनामा (समझौता) करने का दबाव बनाया।

पीड़िता राजकुमारी शर्मा ने अब उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और प्रॉपर्टी डीलर व कथित तौर पर मिलीभगत करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। यह मामला भूमि विवादों में पुलिस की कथित भूमिका और आम नागरिकों को न्याय दिलाने में आने वाली चुनौतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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