आगरा में व्यापारियों का ‘हाउस टैक्स’ पर हंगामा: नगर निकायों पर लगाए उत्पीड़न के आरोप, बोले- ‘मनमाने तरीके से बढ़ा रहे टैक्स, सीवर-जलकर की भी लूट!’
आगरा। आगरा में नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों के खिलाफ व्यापारियों ने उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल उत्तर प्रदेश ने आज नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर कहा कि स्थानीय निकाय G.I. सर्वे के नाम पर मनमाने तरीके से हाउस टैक्स बढ़ा रहे हैं, जबकि सरकार के 28 जून 2024 के आदेश को दरकिनार किया जा रहा है।
“सीवर नहीं, फिर भी सीवर टैक्स! पेयजल का अभाव, फिर भी जलकर वसूली!”
संगठन के महानगर अध्यक्ष नरेश पांडे ने आरोप लगाया कि जिन क्षेत्रों में सीवर की सुविधा तक नहीं है, वहाँ भी सीवर टैक्स वसूला जा रहा है। इसके अलावा, बाजारों में पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था न होने के बावजूद जलकर वसूली जारी है। व्यापारियों ने मांग की है कि बाजारों में वाटर कूलर लगाए जाएं और उनके रखरखाव की जिम्मेदारी तय की जाए।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि नगर निगम और पालिका के अधिकारी निर्धारित समय पर दफ्तरों में उपलब्ध नहीं रहते, जिससे आम जनता को काफी परेशानी होती है। साथ ही, बरसात में जलभराव, कूड़ा निस्तारण में लापरवाही, और सड़कों, नालियों, स्ट्रीट लाइट आदि की बदहाल स्थिति से व्यापारी वर्ग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
“आवारा जानवरों का आतंक, अतिक्रमण पर आंखें मूंदे प्रशासन”
संगठन ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि नगर क्षेत्रों में आवारा कुत्तों और बंदरों का आतंक बना हुआ है, लेकिन प्रशासन इस पर आंखें मूंदे बैठा है। वहीं, शहर की बड़ी समस्या अतिक्रमण और जाम को दूर करने के लिए स्ट्रीट वेंडर अधिनियम 2014 को अब तक ठीक से लागू नहीं किया गया है।
व्यापारियों की ओर से मांग की गई है कि इन सभी समस्याओं पर त्वरित संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे और संबंधित निकायों को जवाबदेह बनाया जाए।
ज्ञापन देने आए प्रतिनिधिमंडल में महानगर अध्यक्ष नरेश पांडे, मुकेश सिंह, मनोज गुप्ता, संजय गुप्ता, कपूर चंद रावत आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। व्यापारियों का यह विरोध नगर निकायों के कामकाज पर सवालिया निशान लगाता है और उनकी जवाबदेही की मांग करता है।