
आगरा। आगरा के चर्चित पनवारी कांड में 34 साल बाद सजा पाए 35 लोगों को बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को हाई कोर्ट ने सभी दोषियों को जमानत दे दी है। फतेहपुर सीकरी के विधायक चौधरी बाबूलाल ने खुद एक वीडियो जारी कर इस बात की जानकारी दी। हाईकोर्ट के जमानत आदेश की कॉपी जेल पहुंचने के बाद सभी की रिहाई होगी, जिसमें अभी तीन-चार दिन का समय लग सकता है।
क्या था 34 साल पुराना पनवारी कांड
यह मामला साल 1990 का है। 21 जून को पनवारी गांव में चोखेलाल जाटव की बेटी मुंद्रा की शादी थी। बारात पहुंची तो जाट समुदाय के लोगों ने दूल्हे को घोड़ी पर चढ़ने से रोक दिया, जिससे विवाद शुरू हो गया। अगले दिन, 22 जून को, पुलिस की मौजूदगी में भी जब दूल्हे की घुड़चढ़ी करवाई गई तो 5-6 हजार लोगों की भीड़ ने फिर बारात को घेर लिया। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे बवाल और बढ़ गया। आक्रोशित भीड़ ने दूसरे पक्ष पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया और फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें सोनी राम जाट की मौत हो गई। 24 जून को फिर से दंगा भड़का, जिसमें एक महिला की मौत हो गई और 150 से ज्यादा लोग घायल हुए। गांव में करीब 10 दिन तक कर्फ्यू लगा रहा था।
80 लोगों के खिलाफ दाखिल हुई थी चार्जशीट
इस मामले में 80 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। कानूनी लड़ाई इतनी लंबी चली कि इस दौरान 27 आरोपियों की मौत हो गई। 28 मई 2025 को एससी/एसटी कोर्ट ने सबूतों और घायलों की गवाही के आधार पर 35 लोगों को दोषी मानते हुए 5 साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद सभी को जेल भेज दिया गया था। जेल जाने के बाद विधायक चौधरी बाबूलाल ने उनसे मुलाकात कर जमानत के लिए पैरवी करने का आश्वासन दिया था।
मामले के समय चर्चा में आए थे विधायक चौधरी बाबूलाल
पनवारी कांड के समय प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और सोनिया गांधी भी पीड़ितों से मिलने आगरा आए थे। फतेहपुर सीकरी के वर्तमान विधायक चौधरी बाबूलाल का नाम सबसे पहले इसी मामले में चर्चा में आया था। वह खुद भी इस मामले में आरोपी थे, हालांकि 2022 में उन्हें बरी कर दिया गया था।