
आगरा। ताजगंज थाना क्षेत्र स्थित पॉश शंकर ग्रीन्स सोसाइटी में एक बड़े और अनोखे धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां पार्टनरशिप में चल रही एक मेंटेनेंस कंपनी (D.D.A.) के मालिक ने अपने ही सहयोगी पर कंपनी की फर्जी ‘जुड़वां’ कंपनी बनाकर 86 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। यह ठगी किसी फिल्मी ‘डबल रोल’ से कम नहीं है, जहाँ एक ही नाम से दूसरी कंपनी बनाकर लाखों का गबन किया गया। इस धोखे के कारण सोसाइटी के करीब 300 परिवार मुश्किल में पड़ गए थे, क्योंकि टोरेंट पावर के बिलों का भुगतान नहीं हो पाया था और बिजली कटने का डर मंडरा रहा था। आरोपी फिलहाल फरार है।
क्या है ‘जुड़वां कंपनी’ बनाकर धोखाधड़ी का पूरा मामला?
दीपक सोनकर (निवासी 7/66, औलिया रोड, छिपीटोला, रकाबगंज) ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने अपने सहयोगियों दीपक रहेजा और आज़ाद आनंद के साथ मिलकर ‘D.D.A.’ नामक एक कंपनी बनाई थी, जो शंकर ग्रीन्स सोसाइटी में मेंटेनेंस का काम देखती थी। दीपक सोनकर ने ही अमित जायसवाल (निवासी 3/1, बी-1, शाह मार्केट, एमजी रोड, हरि पर्वत) को अपनी कंपनी D.D.A. से परिचित कराया था।
शिकायत के अनुसार, अमित जायसवाल ने D.D.A. कंपनी के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत उसे बचत से 5% मासिक हिस्सेदारी मिलनी थी। हालांकि, दीपक सोनकर का आरोप है कि सोसाइटी की आय को देखकर अमित जायसवाल की नीयत खराब हो गई। उसने D.D.A. कंपनी के नाम पर धोखाधड़ी से फर्जी दस्तावेज बनाए और अपनी एक और D.D.A. कंपनी स्थापित कर दी। इसके बाद, उसने मुनाफे को अपनी इस ‘जुड़वां’ कंपनी में जमा करना शुरू कर दिया, जिससे लाखों रुपये का गबन हुआ।
एक की लालच से 300 परिवार हुए परेशान, बिजली संकट भी मंडराया
दीपक सोनकर का कहना है कि अमित जायसवाल ने उनकी मूल कंपनी को कोई हिसाब-किताब या स्टेटमेंट नहीं दिया। बैंक खातों और स्टेटमेंट में हेरफेर कर उन्हें गुमराह किया गया। दीपक सोनकर द्वारा कराए गए पूर्ण लेखा-जोखा में यह सामने आया कि अमित जायसवाल पर 17 अगस्त 2024 से 20 मई 2025 तक की अवधि का, जीएसटी सहित, कुल ₹86,29,417/- (छियासी लाख उनतीस हज़ार चार सौ सत्रह रुपये) बकाया है।
यह मामला जब सोसाइटी में उजागर हुआ, तो तत्काल पुरानी कंपनी को हटाकर मेंटेनेंस का काम दूसरी कंपनी को सौंप दिया गया था। लेकिन आरोपी की इस धोखाधड़ी से शंकर ग्रीन्स सोसाइटी के करीब 300 परिवार बेहद परेशान रहे, क्योंकि उनके टोरेंट पावर के बिलों का भुगतान नहीं हो पाया था। इस वजह से सोसाइटी में आए दिन बिजली कटने का डर बना रहता था, जिससे निवासियों को काफी मानसिक तनाव झेलना पड़ा। जैसे-तैसे इस संकट को टाला गया। यह स्पष्ट है कि किसी एक व्यक्ति की लालच ने कितने सारे लोगों को मुश्किल में डाल दिया।
बार-बार मांगने पर भी अमित जायसवाल ने पैसे नहीं लौटाए। इसके बजाय, वह मौखिक दुर्व्यवहार और मारपीट पर उतर आया। दीपक सोनकर ने यह भी बताया कि उन्होंने पहले आगरा के पुलिस कमिश्नर और अन्य पुलिस अधिकारियों को स्पीड पोस्ट के माध्यम से इस घटना की शिकायत की थी, लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
FIR दर्ज, उप-निरीक्षक विकास सिवाच को मिली जांच, आरोपी फरार
दीपक सोनकर की लिखित शिकायत (दिनांक 01/07/2025) के आधार पर ताजगंज पुलिस स्टेशन में एफआईआर नंबर 0514/2025 दर्ज कर ली गई है। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की कई धाराएं शामिल हैं, जिनमें 318(4), 338, 336(3), 340(2), 316(2) और 352 प्रमुख हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जिसकी जिम्मेदारी उप-निरीक्षक (SI) विकास सिवाच को सौंपी गई है। शिकायतकर्ता को एफआईआर की एक निःशुल्क प्रति भी प्रदान की गई है। इस अनोखे धोखाधड़ी के मामले का आरोपी अमित जायसवाल फिलहाल फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।