आगरा। उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ प्रदर्शन कर रही कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने एक चौंकाने वाला मामला सामने रखा है। समिति ने आरोप लगाया है कि आगरा की निजी बिजली कंपनी टोरेंट पावर ने एक उपभोक्ता से 2 किलोवाट के कनेक्शन के लिए 9.06 लाख रुपये वसूले हैं, जबकि सरकारी व्यवस्था में यह कनेक्शन सिर्फ 1400 रुपये में मिलता है।
समिति ने राम कुमार बंसल नामक उपभोक्ता का उदाहरण दिया, जिन्होंने 12 फरवरी 2025 को कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। कंपनी ने ट्रांसफार्मर, केबल, पोल आदि का खर्च जोड़कर 9 लाख रुपये से अधिक का बिल दिया। भुगतान के बाद भी उन्हें महीनों तक परेशान होना पड़ा और कनेक्शन एक महीने पहले ही मिल पाया।

निजीकरण के खिलाफ 283 दिन से आंदोलन जारी
बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का निजीकरण के खिलाफ आंदोलन 283वें दिन भी जारी है। समिति ने आगामी त्योहारों को देखते हुए बिजली आपूर्ति को बाधित न करने का आश्वासन दिया है। इस दौरान उन्होंने पावर कॉर्पोरेशन से पाँच अहम सवाल पूछे हैं:
- जब सरकारी ट्रांसमिशन व्यवस्था देश में सर्वश्रेष्ठ है, तो वितरण का निजीकरण क्यों?
- घाटे का हवाला देने के बावजूद, मुनाफे में चल रहे विभागों का निजीकरण क्यों?
- क्या निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं पर पेंशन सरचार्ज का बोझ डाला जाएगा, जैसा कि दिल्ली में हो रहा है?
- क्या निजी कंपनियां आगरा की टोरेंट पावर की तरह मनमाना बिल वसूलेंगी?
- क्या निजीकरण के बाद भी गरीबों और किसानों को सब्सिडी मिलती रहेगी?
समिति ने कहा है कि जब तक निजीकरण की प्रक्रिया रद्द नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर राज्य विद्युत परिषद प्राविधिक कर्मचारी संघ के पूर्व अध्यक्ष डीके मिश्रा को श्रद्धांजलि भी दी गई।

































































































