
आगरा। आगरा में करीब 10 हजार से अधिक शादियाँ टूटने की कगार पर हैं और इसकी वजह जानकर आप चौंक जाएंगे। परिवार न्यायालय में ऐसे मामलों की बाढ़ आ गई है जहाँ वर्षों पुराने रिश्तों में “मोबाइल फोन, बेवफाई का शक और शराब” जैसी वजहें दरार पैदा कर रही हैं। ये वो मामले हैं जहाँ एक वक्त साथ जीने-मरने की कसमें खाने वाले पति-पत्नी अब एक-दूसरे का चेहरा भी नहीं देखना चाहते, जिसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है।
रात भर मोबाइल पर बात, 6 साल से अलग पति-पत्नी: कहानी सिर्फ एक नहीं
एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहाँ शादी को 20 साल हो चुके हैं। पति रात भर फोन पर किसी से बात करता था और पत्नी के टोकने पर फोन काट देता। पत्नी को पति के एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर का शक हुआ और बात इतनी बढ़ी कि दोनों पिछले 6 साल से अलग रह रहे हैं। यह सिर्फ एक उदाहरण है; परिवार न्यायालय में ऐसे ही शक और अविश्वास पर आधारित 10 हजार से ज़्यादा मामले चल रहे हैं।
कुछ चौंकाने वाले केस जिनसे हर कोई ले सकता है सबक:
- केस-1 (लोहामंडी): 2004 में शादी हुई, पत्नी सरकारी कर्मचारी है और तीन बच्चे हैं। पत्नी का आरोप है कि पति रात-रात भर फोन पर रहता था और पूछने पर उल्टा उसी पर शक करता। बात मारपीट तक पहुंची और 2019 से पत्नी मायके में रहकर 6 साल से न्याय के लिए लड़ रही है।
- केस-2 (सिकंदरा): 2019 में दिल्ली में शादी हुई। पति कारोबारी है। 2023 में विवाद हुआ जब पत्नी मायके चली गई। पत्नी का आरोप है कि पति रोज शराब पीकर मारपीट करता था। वहीं, पति का आरोप है कि पत्नी किसी अनजान युवक से फोन पर बात करती थी और रोकने पर मारपीट पर उतारू हो जाती थी। अब दोनों एक-दूसरे के साथ रहने को तैयार नहीं हैं।
- केस-3 (मलपुरा): 2022 में शादी के दो साल बाद ही पति-पत्नी में विवाद हो गया। पत्नी झगड़ा कर मायके रहने लगी। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति जब देखो फोन पर लगा रहता है, ठीक से बात नहीं करता और घूमने जाने को बोलो तो मारपीट करता है। पति का आरोप है कि पत्नी घर की ‘मालकिन’ बनना चाहती है और उसकी मां के रहते उसे यह हक कैसे मिल सकता है।
ये मामले दिखाते हैं कि आधुनिक जीवनशैली में संवाद की कमी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की गलत परिभाषा, और बाहरी प्रभावों ने कैसे पारंपरिक रिश्तों की बुनियाद को हिला दिया है। क्या इन बढ़ती दूरियों को कम करने का कोई रास्ता है?