आगरा। नकली दवाओं के बड़े रैकेट का खुलासा होने के बाद आगरा के खुदरा दवा विक्रेताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। गुरुवार को देहली गेट पर हुई आगरा रिटेल कैमिस्ट एसोसिएशन की बैठक में सभी ने एक सुर में कहा कि इस मामले से पूरे देश में आगरा के दवा कारोबार की छवि खराब हुई है, जबकि इसमें किसी भी रिटेलर की कोई भूमिका नहीं थी।
एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि नकली दवाओं के डर से मरीज और उनके परिजन अब आगरा के बजाय दूसरे शहरों से दवाइयां मंगा रहे हैं, जिससे स्थानीय खुदरा विक्रेताओं को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
इस समस्या को लेकर एसोसिएशन ने औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने रिटेलरों की परेशानी से अवगत कराया और भविष्य में कारोबार को सुचारू रूप से चलाने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि वे हमेशा बिल से दवा खरीदने और बैच नंबर मिलाकर बेचने के नियमों का पालन करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दवा रिटेलरों को नियमों की जटिलता के कारण भी कई मुश्किलें हो रही हैं, जैसे टीबी और नारकोटिक्स दवाओं का स्टॉक और रजिस्टर का रखरखाव। इसके अलावा, कई डॉक्टरों ने अपने क्लीनिक में ही दवा की दुकानें खुलवा ली हैं, जिससे रिटेलरों का मुनाफा कम हो रहा है।
इस बैठक में संस्थापक श्याम तिवारी, महामंत्री राजीव शर्मा, कोषाध्यक्ष सतीश पाठक, प्रेम सिंह राजावत, वीर बहादुर सिंह, और कपिल बंसल सहित अन्य प्रमुख सदस्य उपस्थित रहे।

































































































