आगरा। सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ, जिसमें सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करना अनिवार्य किया गया है, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (यूपीपीएसएस) ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। संघ की मुख्य मांग है कि पुराने और अनुभवी सेवारत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, जिन शिक्षकों को पाँच साल से अधिक की सेवा हो गई है, उन्हें अगले दो साल के भीतर टीईटी पास करना ज़रूरी है। यह शर्त पदोन्नति (Promotion) पर भी लागू होगी।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ इस मामले में प्रदेश भर में लगातार आंदोलन कर रहा है:
- विरोध प्रदर्शन: 10 सितंबर को आगरा में जिला मुख्यालय पर विरोध दर्ज कराते हुए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा गया था।
- काली पट्टी और हस्ताक्षर अभियान: प्रांतीय अध्यक्ष सुशील पाण्डेय के आह्वान पर जिले के सभी स्कूलों में शिक्षक काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करा रहे हैं और साथ ही हस्ताक्षर अभियान भी चला रहे हैं।
इसी आंदोलन की कड़ी में, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, आगरा के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र कसाना, जिलामंत्री ब्रजेश दीक्षित, और जिला उपाध्यक्ष विकास चतुर्वेदी के नेतृत्व में संगठन ने सेवारत शिक्षकों को टीईटी से छूट दिलाने के लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल की है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार भी चाहती है कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून 2010 लागू होने से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों की सेवाएँ सुरक्षित रहें, भले ही उन्होंने टीईटी पास न किया हो।

































































































