Agra News बसपा ने खंदारी स्थित धोबी समाज पंचायती बगीची के सामने 50 वर्षों से स्थापित महात्मा गाँधी और डॉ. अंबेडकर की मूर्ति हटाने के पुलिस नोटिस के विरोध में 11.11.2025 को जिलाधिकारी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। बसपा ने जनभावना से जुड़ी इन प्रतिमाओं को हटाने के आदेश को निरस्त करने की मांग की है।
आगरा के खंदारी क्षेत्र में उस समय सियासी और सामाजिक रोष व्याप्त हो गया, जब राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं को हटाने के लिए स्थानीय पुलिस द्वारा नोटिस चस्पा किया गया। इस घटना के विरोध में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जनपद आगरा ने दिनांक 11.11.2025 को महामहिम राष्ट्रपति महोदय के नाम जिलाधिकारी (DM) आगरा को एक ज्ञापन सौंपा।
बसपा की शिकायत और मांगें
ज्ञापन सौंपने के दौरान बसपा के पदाधिकारियों ने ज्ञापन को पढ़कर सुनाया, जिसमें मामले की गंभीरता को रेखांकित किया गया।
- स्थान और इतिहास: ज्ञापन में बताया गया कि खंदारी स्थित धोबी समाज पंचायती बगीची के सामने खाली पड़ी जमीन पर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी और डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमाएं लगभग 50 वर्षों से स्थापित हैं।
- नोटिस चस्पा: स्थानीय थाना पुलिस द्वारा दिनांक 09.11.2025 को इन दोनों प्रतिमाओं को हटाने का नोटिस चस्पा कर दिया गया।
- रोष और जनभावना: जैसे ही क्षेत्रीय जनता को इस आदेश की जानकारी हुई, हजारों की संख्या में स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त हो गया। बसपा ने स्पष्ट किया कि इन दोनों प्रतिमाओं से क्षेत्रीय जनता की गहरी भावना जुड़ी हुई है।
- मांग: बहुजन समाज पार्टी ने इस ज्ञापन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदय से मांग की है कि उक्त आदेश/नोटिस को तुरंत निरस्त किया जाए, ताकि जनता की भावनाओं का सम्मान हो सके।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख पदाधिकारी
जिलाधिकारी आगरा को ज्ञापन सौंपने वालों में बहुजन समाज पार्टी के कई वरिष्ठ और मंडल स्तरीय पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- विक्रम सिंह (आगरा-अलीगढ़-मेरठ मंडल प्रभारी)
- प्रताप सिंह बघेल (आगरा मंडल प्रभारी)
- अजय शील गौतम (आगरा मंडल प्रभारी)
- सुशील भंडारी (आगरा मंडल प्रभारी)
- पूर्व विधान परिषद सदस्य वीरू सुमन
- राम नरेश कर्दम
- प्रमोद कैन
- डॉक्टर भारतीय तरुण
- किरण केसरी
- संदीप मुखर्जी
- अरविंद मथुरिया
- सत्तार उस्मानी
- राकेश खन्ना
- मनोज गौतम
- राजेंद्र निर्मल
इस घटना ने आगरा में राजनीतिक और सामाजिक माहौल को गरमा दिया है, और अब सभी की निगाहें प्रशासन और महामहिम राष्ट्रपति कार्यालय के आगामी निर्णय पर टिकी हैं।
































































































