Agra News आगरा किला और ताजमहल जैसे स्मारकों पर लपकों द्वारा पर्यटकों को घेरकर जबरन सामान बेचने की समस्या कायम है। पर्यटक खुद को ठगा महसूस करते हैं। पुलिस की नाक के नीचे हो रही इन हरकतों से आगरा शहर की छवि लगातार खराब हो रही है।
पर्यटक करते हैं खुद को ठगा महसूस; पुलिस की आंखों के सामने होती है दादागिरी, प्रशासन पर उठ रहे गंभीर सवाल
ताजमहल, आगरा किला हो या शहर का कोई भी अन्य प्रमुख स्मारक स्थल, हर जगह का हाल लगभग एक जैसा है। तमाम प्रशासनिक कोशिशों और जागरूकता अभियानों के बावजूद, ‘लपके’ (हॉकर/दलाल) अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आ रहे हैं। यह स्थिति न केवल शहर के पर्यटन उद्योग के लिए निराशाजनक है, बल्कि इससे आगरा की वैश्विक छवि भी लगातार खराब हो रही है।
पर्यटकों की मनोदशा पर असर
सोचने वाली बात यह है कि जब कोई पर्यटक अपने परिवार, पत्नी और बच्चों के साथ, एक ऐतिहासिक अनुभव लेने आगरा आता है, तो वह क्या महसूस करता होगा, जब ये लपके उसे चारों तरफ से घेर लेते हैं और जबरदस्ती अपना सामान बेचने का दबाव बनाते हैं।
- ठगा हुआ महसूस करना: पर्यटकों को घूमने की बजाय लगातार दबाव और परेशानी का सामना करना पड़ता है। वे शांति से अपने स्मारक का आनंद नहीं ले पाते हैं और अक्सर खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं।
- नकारात्मक छवि: यही पर्यटक आगरा से अपने साथ शहर की यही नकारात्मक छवि लेकर जाते हैं। एक सुंदर स्मारक की यादों के बजाय उनके मन में परेशानी, धोखाधड़ी और असुरक्षा का भाव रह जाता है, जो शहर के टूरिज्म के लिए सबसे बड़ा नुकसान है।
पुलिस और प्रशासन पर सवाल
सबसे गंभीर पहलू यह है कि यह सब पुलिस की आंखों के सामने होता है। स्मारकों के प्रवेश द्वारों और आसपास के इलाकों में पुलिसकर्मियों और पर्यटक पुलिस की तैनाती रहती है, इसके बावजूद लपकों की दादागिरी बेरोकटोक जारी रहती है।
- प्रशासनिक शिथिलता: यह दिखाता है कि या तो लपकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का अभाव है, या फिर यह समस्या इतनी संगठित हो चुकी है कि पुलिस भी इसे नियंत्रित नहीं कर पा रही है।
- व्यवस्थित रैकेट: कई बार इन लपकों के पीछे एक व्यवस्थित रैकेट काम करता है, जो न केवल पर्यटकों को घटिया सामान बेचते हैं, बल्कि तांगे वालों और टैक्सी चालकों के साथ मिलकर उन्हें कमीशन आधारित दुकानों पर ले जाने का दबाव भी बनाते हैं, जैसा कि हाल ही में एक पर्यटक की शिकायत में सामने आया था।
जरूरत है एक सख्त और दीर्घकालिक समाधान की, जहाँ न केवल लपकों को हटाया जाए, बल्कि पर्यटन पुलिस को भी सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता दें, ताकि ‘ताज नगरी’ की गरिमा बनी रहे।
































































































