AGRA NEWS TODAY थाना सिकंदरा में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। गुरु तेग बहादुर कॉलोनी निवासी मनोज कुमार जाधव की तहरीर पर उनके परिचित आशीष गोयल के खिलाफ 1,50,00,000 रुपये न चुकाने और धमकी देने का मामला दर्ज किया गया है। विवाद में यह भी आरोप है कि खरीददार ने जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया और भुगतान रोके रखा। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
घटना का पूरा विवरण
थाना सिकंदरा में दर्ज तहरीर के अनुसार आरोपकर्ता मनोज कुमार जाधव ने बताया कि उनके नाम पर कराटा नीरव कुंज के एक आवासीय भूखंड (क्षेत्रफल — 399.104 वर्ग मीटर) का सौदा हुआ था। खरीदार पक्ष से जमीन खरीद के लिये प्रारम्भिक सहमति के तहत कुल ₹2,00,00,000 तय हुए थे। आरोपी पर आरोप है कि उसे बैंक ऋण की देनदारी और बाकी बकाया चुकाने का भरोसा देकर सौदा किया गया। शुरुआती दौरान विपक्षी ने मात्र ₹42,50,000 का बयाना दिया और बाकी भुगतान नहीं किया।
कुछ चर्चा के बाद पता चला कि खरीदार ने जमीन पर ही निर्माण कार्य शुरू करवा दिया और उस भूखंड को बेचने का प्रयत्न भी किया। जब 19 अगस्त को शाम लगभग 4 बजे मनोज व उनके सहयोगी जमीन के बकाया पैसे मांगने गए तो आरोप है कि आशीष गोयल ने झगड़ा किया और जान से मारने की धमकी दी। इस प्रमाण के आधार पर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध मामला दर्ज कर पूछताछ शुरू कर दी है।
विवाद के कानूनी पहलू और दस्तावेज
मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने प्रारंभिक साक्ष्यों और तहरीर के आधार पर जांच आरंभ कर दी है। शिकायत में समस्त भुगतान रसीदें, बैंक-लोन से जुड़े दस्तावेज और जमीन के नाप-जोख से जुड़ी कागजात मांगे जाने की संभावना है। अगर खरीद-विक्रय का लिखित करार (agreement) और बैंक ट्रांजैक्शन दर्शाने वाले सबूत उपलब्ध होते हैं, तो पुलिस के पास मामले की स्पष्ट दिशा होगी। वार्निशिंग/बयाना और बकाया राशि के भुगतान का रिकॉर्ड निर्णायक होगा।
उपलब्ध कानूनी विकल्प और पुलिस कार्यवाही
पुलिस ने फिलहाल शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है तथा आरोपी के बयान दर्ज करने का प्रयास कर रही है। जघन्य धमकी और वादे के उल्लंघन पर आपराधिक धाराएँ लागू हो सकती हैं। साथ ही सिविल कोर्ट में संपत्ति के बिक्री-पत्र, भुगतान के बिल अथवा बयाने से जुड़ी मांगें के आधार पर दावा भी दायर किया जा सकता है। पोस्ट-मार्टम/भवन के निर्माण के रिकॉर्ड और नाप-जोख के रेकार्ड भी अहम होंगे।
मकान निर्माण और बाजार पर असर
स्थानीय लोग बताते हैं कि ऐसे विवादों से रीयल एस्टेट लेन-देन की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। खरीदारों को सावधानी बरतते हुए रजिस्टर्ड दस्तावेज, सत्यापित टाइटल और बैंकिंग लेन-देन का प्रमाण जरूर रखना चाहिए। निर्माण कार्य के दौरान भी यदि भुगतान लटका हुआ हो तो विवाद आगे चलकर संपत्ति के कब्जे और बिक्री-लेनदेन में गंभीर अड़चनें पैदा कर सकता है।
पीड़ित का वित्तीय और सामाजिक परिप्रेक्ष्य
प्राथमिकी में निर्दिष्ट किया गया है कि मनोज परिवारिक पृष्ठभूमि और जान-पहचान के कारण इस सौदे में विश्वास पर आधारित भुगतान किया। अब बकाया रुकने और धमकी के कथित आरोप ने पारिवारिक सुरक्षा व मनोबल पर असर डाला है। संपत्ति विवाद के चलते सामाजिक रिश्ते भी प्रभावित होते हैं और न्याय मिलने तक प्रभावित परिवार आर्थिक व मानसिक दबाव झेलते हैं।
पुलिस का बयान और आगे की जांच
थाना सिकंदरा व आगरा पुलिस ने कहा है कि मामला गंभीर है और साक्ष्यों के आधार पर जल्द सुनवाई कर कार्रवाई की जाएगी। डीएसपी/थाना प्रभारी प्राथमिक जांच में बयानों की पुष्टता, बैंक व रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, और निर्माण स्वीकृति के प्रमाण जुटा रहे हैं। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
Agra News Today: व्यापारी की जमीन पर कब्जे की साजिश

































































































