Agra News छावनी परिषद के विवादित बंगला नंबर 23 पर कब्जे के आरोपी पूर्व सांसद प्रभुदयाल कठेरिया, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह के प्रोफेशनल सम्मेलन के मंच पर दिखाई दिए। हाल ही में सिख समाज के विरोध के कारण कठेरिया को बैरंग लौटना पड़ा था। इस उपस्थिति ने बीजेपी की ‘सिद्धांतों’ वाली छवि पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आगरा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े एक कार्यक्रम में हुई एक घटना ने शहर की राजनीति और बीजेपी के नैतिक मानदंडों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद अरुण सिंह द्वारा संबोधित एक सम्मेलन में, वह नेता भी मंच पर मौजूद थे, जिन पर हाल ही में छावनी परिषद की एक विवादित संपत्ति पर अवैध कब्जा करने की कोशिश का गंभीर आरोप लगा था।
पहला विवाद: छावनी परिषद की संपत्ति पर कब्जे का प्रयास
यह पूरा मामला छावनी परिषद के बंगला नंबर 23 (हेस्टिंग रोड) से जुड़ा हुआ है।
- विवादित संपत्ति: इस संपत्ति का स्वामित्व गुरु तेग बहादुर चैरिटेबल ट्रस्ट (गुरुद्वारा गुरु के ताल) के नाम पर बताया जाता है।
- आरोप: ट्रस्ट के संत राजेंद्र सिंह ने पुलिस आयुक्त से शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि पूर्व सांसद प्रभुदयाल कठेरिया ने एक स्थानीय महिला (सुनीता लूथरा) के माध्यम से अवैध रूप से सर्वेंट क्वार्टर पर कब्जा कर लिया था।
- विरोध प्रदर्शन: विवाद तब चरम पर पहुँच गया, जब गुरुवार रात 10 बजे पूर्व सांसद दो ट्रकों में सामान लेकर पूरे बंगले पर कब्जा करने पहुँचे। गुरुद्वारा गुरु का ताल के पदाधिकारियों की सूचना पर बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग वहाँ तुरंत पहुँच गए और कड़ा विरोध किया। सिख समाज के विरोध के कारण रात 10:30 बजे पूर्व सांसद को बैरंग लौटना पड़ा।
- प्रशासनिक कार्रवाई: सिख समाज की शिकायत के बाद, पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एलआईयू (LIU) से रिपोर्ट भी मांगी है, और मामले की जाँच जारी है।
दूसरा पहलू: अरुण सिंह के मंच पर आरोपी की उपस्थिति
पहले विवाद के ठीक कुछ दिन बाद, आगरा में भाजपा के आत्मनिर्भर भारत अभियान के प्रोफेशनल सम्मेलन का आयोजन हुआ।
- मुख्य अतिथि: इस कार्यक्रम में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के माने जाने वाले नेता, राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे।
- आरोपी की उपस्थिति: हैरानी तब हुई, जब संपत्ति पर कब्जे के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे पूर्व सांसद प्रभुदयाल कठेरिया को राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह के मंच पर स्थान दिया गया।
भाजपा के उसूलों पर सवाल
- नैतिक प्रश्न: बीजेपी खुद को सिद्धांतों, नैतिकता और पारदर्शिता की पार्टी बताती रही है। ऐसे में, जिस नेता पर अवैध कब्जा और सिख समाज के साथ टकराव का हालिया आरोप लगा हो, उसे राष्ट्रीय महासचिव के मंच पर प्रमुखता से स्थान मिलना पार्टी के नैतिक मानदंडों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
- राजनीतिक मजबूरी: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या यह क्षेत्रीय समीकरणों की मजबूरी थी, या फिर शीर्ष नेतृत्व ने स्थानीय विवादों से जुड़े आरोपों को जानबूझकर नजरअंदाज किया?
- कथनी और करनी: मीडिया और आम जनता के सामने यह सवाल बड़ा हो गया है कि क्या भाजपा, जो ज़ीरो टॉलरेंस की बात करती है, ज़मीनी स्तर पर अपने ही नेताओं द्वारा किए जा रहे विवादित कृत्यों पर पर्दा डाल रही है, जिससे पार्टी की कथनी और करनी में फ़र्क साफ दिखाई दे रहा है।
सिख समाज ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि ट्रस्ट की संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व इस विरोधाभासी स्थिति पर क्या रुख अपनाता है।
































































































