
आगरा। आगरा में नकली दवा कारोबारियों पर हुई कार्रवाई अब केवल एक स्थानीय मामला नहीं रह गया है। इस अवैध धंधे के सिंडिकेट को पूरी तरह से तोड़ने के लिए अब राज्य के साथ-साथ केंद्र सरकार की भी नजर है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में गुजरात के पूर्व डीजीपी केशव कुमार की मौजूदगी में एक हाई-लेवल वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें लगभग 15 विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने नकली दवा माफियाओं को पकड़ने के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का भी गठन कर दिया है।
कई विभाग मिलकर करेंगे कार्रवाई
डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने वर्कशॉप में कहा कि अब नकली दवा कारोबारियों पर सभी विभाग मिलकर कार्रवाई करेंगे। किसी भी व्यक्ति को सूचना देने के लिए अब सिर्फ ड्रग विभाग तक सीमित नहीं रहना होगा। पुलिस के हेल्पलाइन नंबर या किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के नंबर पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी। डीएम ने स्पष्ट कहा कि इस गोरखधंधे में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
पूर्व डीजीपी केशव कुमार ने बताया कि नकली दवाओं का खेल सिर्फ फूड एंड ड्रग्स एक्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धोखाधड़ी, आईटी एक्ट, जीएसटी और इनकम टैक्स उल्लंघन जैसे गंभीर अपराध भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जिन कारोबारियों ने नकली क्यूआर कोड बनाए, उन पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई करने की योजना है।
लाइसेंस देने से पहले ली जाएगी पुलिस क्लीयरेंस
अधिकारियों ने बताया कि जांच में अक्सर दस्तावेज और यहां तक कि दुकानें व फैक्ट्रियां भी फर्जी निकलती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए अब लाइसेंस जारी करने से पहले पुलिस से क्लीयरेंस लेने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, जीआई टैगिंग जैसी तकनीक से यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि जिस पते पर लाइसेंस रद्द हो गया है, वहां दोबारा कोई नया लाइसेंस न मिल पाए।
इस सिंडिकेट में काले धन और टैक्स चोरी का भी बड़ा खेल है। इसलिए जांच में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED), जीएसटी विभाग, इनकम टैक्स विभाग और आईटी विभाग की मदद भी ली जाएगी, ताकि सिंडिकेट की पूरी चेन तोड़ी जा सके।
दवा माफियाओं की बनेगी टॉप 10 लिस्ट, SIT का गठन
पुलिस कमिश्नर ने इस अवैध कारोबार को खत्म करने के लिए एडी डीसीपी साइबर एक्सपर्ट आदित्य सिंह की अध्यक्षता में एक SIT का गठन किया है। यह टीम आगरा में शीर्ष 10 दवा माफियाओं की एक लिस्ट तैयार करेगी। इस अवैध धंधे से माफियाओं द्वारा अर्जित की गई संपत्ति की भी लिस्ट बनाकर, उसे बीएनएस 112 के तहत कुर्क किया जाएगा। इसके अलावा, पुराने मामलों को फिर से खंगाला जाएगा ताकि नए-पुराने लिंक का पता लगाया जा सके। लिंक मिलने पर यह टीम दूसरे राज्यों में जाकर भी माफियाओं को गिरफ्तार करेगी।