Agra में छात्रसंघ चुनाव की मांग तेज: सपा छात्र सभा ने किया कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन

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Agra में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर समाजवादी छात्र सभा ने आज कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च निकाला और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपा। समाजवादी पार्टी छात्र सभा, महानगर आगरा, पिछले कई वर्षों से छात्रसंघ चुनाव की बहाली की मांग कर रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं चुनाव कराने की बात कही थी, लेकिन अब तक आगरा विश्वविद्यालय में चुनाव की तारीख घोषित नहीं की गई है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों और यहाँ तक कि दिल्ली में भी छात्रसंघ चुनाव हो चुके हैं, लेकिन आगरा विश्वविद्यालय प्रशासन हर बार केवल झूठा आश्वासन देकर मामले को टाल देता है। छात्र सभा के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही चुनाव की तिथि घोषित नहीं की गई, तो वे एक बड़ा आंदोलन, भूख हड़ताल और उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने अपने हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन में मौजूद प्रमुख कार्यकर्ता: इस प्रदर्शन में इकाई अध्यक्ष (विश्वविद्यालय) विजय यादव, रितिक प्रजापति, जितेंद्र धनगर, मनीष यादव, ललित जाटव, अरुण यादव, अमन पिप्पल, अजय यादव, शिवम बघेल, समीर अब्बास, अतुल कुमार, विशाल यादव, रजत लोधी, विमल कुमार, राम कुमार, अपूर्व वर्मा, संजय कपूर, विराट सिंह, आशीष कुमार, अविरल जैन, शशांक चेतन्य और जतिन सहित कई अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

आगरा: डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदर्शन

आगरा। आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर समाजवादी छात्र सभा ने जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क कैंपस में बैनर और पोस्टर लेकर नारेबाजी की और पैदल मार्च करते हुए कुलपति सचिवालय तक पहुँचे। छात्र सभा ने चेतावनी दी है कि अगर 1 अक्टूबर तक चुनाव की तारीख घोषित नहीं की गई तो कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में पिछले कई सालों से छात्र संघ चुनाव नहीं हो रहे हैं, जिससे छात्रों की आवाज को दबाया जा रहा है। कुलपति के मौके पर मौजूद न होने पर कार्यकर्ताओं ने कुलपति सचिवालय का गेट तोड़ने की भी कोशिश की, लेकिन इससे पहले ही परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश ने उनका ज्ञापन स्वीकार कर लिया। डॉ. ओमप्रकाश ने कार्यकर्ताओं को आश्वासन दिया कि 10 दिन के भीतर चुनाव कराने पर निर्णय लिया जाएगा और इसके लिए चुनाव कमेटी का गठन किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर 1 अक्टूबर तक तिथि घोषित नहीं होती है तो वे न केवल सड़कों पर उतरेंगे, बल्कि विश्वविद्यालय में ताला डालने का भी काम करेंगे। इस प्रदर्शन में पंकज कसाना, तेजू यादव, मानवेंद्र सिंह, राजा यादव, प्रदीप यादव, ललित जाट, अभय जाट, माधव यादव, बृज कसाना, नितिन कसाना, भरत कसाना, अमन यादव, अनिकेत पिपल, रोहित यादव, अमन अब्बास, सक्षम गौतम, प्रकाश जुरैल, करन गुप्ता आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

आगरा में एबीवीपी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, पुलिस ने रोका तो सड़क पर लेट गए

आगरा। बाराबंकी में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में गुरुवार को आगरा में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। बारिश के बावजूद कार्यकर्ता पीछे नहीं हटे और सुभाष पार्क से पैदल मार्च निकालकर जिला मुख्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कलेक्ट्रेट पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की तो कार्यकर्ताओं की पुलिस से तीखी नोकझोंक हो गई। विरोध जताते हुए कार्यकर्ता सड़क पर ही लेट गए, जिससे एमजी रोड पर करीब दो घंटे तक लंबा जाम लगा रहा। लोगों को इस दौरान भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी अपनी मांग पर अड़े रहे कि जब तक जिलाधिकारी या पुलिस कमिश्नर खुद आकर ज्ञापन नहीं लेंगे, तब तक वे प्रदर्शन जारी रखेंगे। बाद में, एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने डीसीपी सिटी सोनम कुमार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बाराबंकी में लाठीचार्ज करने वाले पुलिस अधिकारियों और कॉलेज प्रशासन पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई। डीसीपी सिटी द्वारा समझाने और उचित कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद ही कार्यकर्ता एमजी रोड से हटे, जिसके बाद यातायात व्यवस्था सामान्य हो पाई।

आगरा में पारस पर्ल्स के निवासियों का बिल्डर के खिलाफ प्रदर्शन: ‘फ्लैट न खरीदें’ का बोर्ड लगाया, वीडियो वायरल; धोखाधड़ी और जानलेवा हमले का आरोप

आगरा। आगरा के लोहामंडी स्थित पारस पर्ल्स बिल्डिंग के निवासियों ने बुधवार को बिल्डर के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने बिल्डिंग के बाहर एक सावधानी बोर्ड लगाकर लोगों से फ्लैट न खरीदने की अपील की है और इस विरोध प्रदर्शन का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। निवासी बिल्डर मुकेश जैन पर 8 साल से धोखाधड़ी और दबंगई का आरोप लगा रहे हैं। बिल्डर पर वादे तोड़ने, जानलेवा हमला और रिवॉल्वर से धमकाने का आरोप बिल्डिंग में रह रहे निवासियों का कहना है कि वे पिछले 8 सालों से बिल्डर मुकेश जैन की मनमानी और दबंगई का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि फ्लैट खरीदते समय बिल्डर ने कई सुविधाओं का वादा किया था, लेकिन अभी तक उनमें से कोई भी पूरी नहीं की गई है। निवासियों ने बताया कि 18 अगस्त को बिल्डर ने एक बैठक बुलाई थी, जहाँ फ्लैट मालिकों ने अपनी समस्याएँ रखीं, लेकिन बिल्डर ने उनकी एक भी नहीं सुनी। निवासियों का आरोप है कि बैठक के दौरान आशीष जैन पर जानलेवा हमला किया गया और बिल्डर के गार्ड ने रिवॉल्वर निकालकर सभी को धमकाया। प्रेस वार्ता कर सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग पारस पर्ल्स के निवासियों ने 20 अगस्त को एक प्रेस वार्ता आयोजित की और बिल्डर के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस दबंग बिल्डर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें उनका हक दिलाया जाए। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे आगरा जिला मुख्यालय पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। यह घटना आगरा के रियल एस्टेट सेक्टर में बिल्डरों और ग्राहकों के बीच विवादों के मुद्दे को फिर से गरमा रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और कब तक इन निवासियों को न्याय मिल पाता है। और खबरें भी हैं…

आगरा में मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास का कांग्रेसियों ने किया घेराव: ‘वोट चोर’ बताकर मांगा इस्तीफा, पुलिस से हुई झड़प

आगरा। आगरा में सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आवास का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। विजय नगर स्थित उनके घर के बाहर पहुंचे कांग्रेसियों ने पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ते हुए नारेबाजी की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प भी हुई। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार को ‘वोट चोर’ बताते हुए तत्काल इस्तीफे और राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की। पुलिस से झड़प, आवास के पास पहुँचकर नारेबाजी दोपहर करीब 3:30 बजे, कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अमित सिंह के नेतृत्व में दर्जनों कांग्रेसी विजय नगर स्थित मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आवास की ओर बढ़े। उनके हाथों में “ज्ञानेश कुमार, वोट चोर” लिखी तख्तियां थीं। प्रदर्शनकारियों में महिला कार्यकर्ता भी शामिल थीं। पुलिस को प्रदर्शन की सूचना पहले ही मिल चुकी थी, जिसके चलते उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास को घेर लिया था। जैसे ही कांग्रेसी जुलूस निकालते हुए 50 मीटर पहले पहुँचे, पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया और लाठी-डंडे लगाकर रास्ता रोका। मगर कांग्रेसी नहीं माने और पुलिसकर्मियों को किनारे करते हुए तेजी से आगे बढ़ गए। वे मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास के पास पहुँचकर करीब एक घंटे तक जमकर नारेबाजी करते रहे। इस दौरान कुछ महिला कांग्रेस कार्यकर्ता गिरते-गिरते बचीं। ‘लोकतंत्र की हत्या, संविधान के दुश्मन’: कांग्रेस का आरोप कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अमित सिंह ने इस दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने देश के लोकतंत्र की हत्या की है और वे संविधान के दुश्मन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिंदा लोगों के वोट काटे गए हैं। अमित सिंह ने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया, तो कांग्रेस उनके आगरा आने पर विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को देश और राहुल गांधी, दोनों से माफी मांगनी चाहिए। अमित सिंह ने इस प्रदर्शन को ‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ बताते हुए कहा कि यदि इसका विरोध नहीं हुआ तो देश दूसरी बार गुलामी की ओर बढ़ेगा। उन्होंने चुनाव आयोग पर भाजपा कार्यकर्ता के रूप में काम करने का भी गंभीर आरोप लगाया। आवास पर नहीं थे मुख्य चुनाव आयुक्त के माता-पिता जिस समय कांग्रेसी प्रदर्शन कर रहे थे, उस वक्त मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के माता-पिता, डॉ. सुबोध कुमार (सेवानिवृत्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी) और सत्यवती गुप्ता (योग सिखाती हैं), आवास पर मौजूद नहीं थे। वे नोएडा गए हुए हैं। उल्लेखनीय है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की बड़ी बेटी मेधा रूपम वर्तमान में नोएडा की डीएम हैं। एसीपी अक्षय महाडिक ने बताया कि कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अमित सिंह कुछ लोगों के साथ आए थे। पहले से ही पुलिस की टीमें तैनात थीं और प्रदर्शनकारियों को मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास पर पहुँचने से रोका गया। ज्ञापन सौंपने के बाद प्रदर्शनकारी वापस लौट गए। और खबरें भी हैं…

राजेश्वर महादेव मंदिर से भेदभाव: आगरा में आंदोलन की चेतावनी, 6 अगस्त को मार्च

आगरा। प्राचीन राजेश्वर महादेव मंदिर परिसर में सोमवार को हुई एक सार्वजनिक बैठक में सरकारी विकास योजनाओं में मंदिर के साथ हो रहे भेदभाव पर तीव्र विरोध दर्ज कराया गया। श्रद्धालुओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि यदि सरकार द्वारा मंदिर को अनुदान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन करेंगे। इसी कड़ी में, राजेश्वर महादेव के भक्त 6 अगस्त को कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालेंगे। “विधायक ने नहीं की पहल, अन्य मंदिरों को मिला करोड़ों का अनुदान” बैठक में मौजूद लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए योजनाएं स्वीकृत की जा रही हैं। इसके बावजूद, छावनी के विधायक जी.एस. धर्मेश ने अपने क्षेत्र के प्रमुख श्री राजेश्वर महादेव मंदिर के विकास के लिए कोई पहल नहीं की है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष डी.के. वशिष्ठ और उपाध्यक्ष सत्यप्रकाश रावत ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि आगरा के अन्य प्रमुख मंदिरों को प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपये के अनुदान से विकास कार्यों में शामिल किया है। ऐसे में, राजेश्वर महादेव मंदिर को किसी भी योजना में शामिल न किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने जोर दिया कि यह मंदिर पूरी तरह से भक्तों के सहयोग से विकसित हुआ है और इसका स्वरूप अनुकरणीय है, फिर भी इसे सरकारी योजनाओं से वंचित रखना अनुचित है। 6 अगस्त को कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च, मांगों पर विचार न होने पर तेज होगा आंदोलन बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि अपनी मांगों को लेकर 6 अगस्त को सुबह 10 बजे मंदिर से कलेक्ट्रेट तक एक विशाल पैदल मार्च निकाला जाएगा। श्रद्धालु कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपेंगे। भक्तों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। एसडीएम ने दिया आश्वासन, समाधान का भरोसा मंदिर में हुई इस बैठक में जिलाधिकारी आगरा के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे एसडीएम सचिन राजपूत ने श्रद्धालुओं को आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी के माध्यम से अनुपूरक मांग प्रस्ताव (supplementary demand proposal) तैयार कराया जा रहा है। एसडीएम ने जिलाधिकारी से मिलकर इस समस्या का शीघ्र समाधान कराने का भरोसा भी दिलाया। बैठक में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष विमल तिवारी, उपसचिव पप्पू ठाकुर, अनिल रावत, बंटी ठाकुर, गोविन्द पाराशर, महेंद्र शर्मा, जितेंद्र देपुरिया, राकेश शर्मा, यश शर्मा, बॉबी अरेला, सतीश पूरी, भूपेंद्र मुखरैया, आशीष पाठक, दीपक शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

आगरा में मेयर पर विकास न करने का आरोप: गंदे पानी में बैठकर लोगों ने किया प्रदर्शन, सड़कों पर गड्ढे और जलभराव से हाहाकार!

आगरा। आगरा में सड़कों की बदहाली और जलभराव से परेशान स्थानीय लोगों ने बुधवार को नगर निगम और मेयर के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन किया। शंकरगढ़ पुलिया से आजम पाड़ा की ओर जाने वाली सड़क पर गहरे गड्ढों और नालियों के गंदे पानी के बीच बैठकर लोगों ने जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि मेयर शहर के विकास पर ध्यान नहीं दे रही हैं, जिससे मुख्यमंत्री के “गड्ढा मुक्त उत्तर प्रदेश” के सपने पर पानी फिर रहा है। सड़क पर जलभराव से हादसे, बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल भारतीय किसान यूनियन (भानू) के नेतृत्व में यह धरना प्रदर्शन किया गया। किसान नेता अभिषेक चौहान ने बताया कि शंकरगढ़ से आजम पाड़ा तक की सड़क पूरी तरह टूट चुकी है और उसमें बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। पास में तीन स्कूल हैं, और आए दिन स्कूली बच्चे इन गड्ढों में गिरकर चोटिल होते रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम को 10 से अधिक बार शिकायत पत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरन, आज स्थानीय लोगों के साथ सड़क पर भरे गंदे पानी में बैठकर धरना देना पड़ा है। अभिषेक चौहान ने चेतावनी दी कि जब तक कार्रवाई नहीं होती, उनका धरना जारी रहेगा, और जरूरत पड़ी तो भूख हड़ताल भी की जाएगी। पार्षद पर भी अनदेखी का आरोप, वार्ड 40 की बदहाली प्रदर्शन में शामिल लोगों ने बताया कि यह क्षेत्र वार्ड 40 के अंतर्गत आता है, जिसके पार्षद रवि दिवाकर हैं। उन्हें भी इस समस्या की जानकारी दी गई थी और उन्होंने निरीक्षण भी किया, लेकिन इसके बावजूद सड़क की हालत नहीं सुधरी। नालियों का गंदा पानी सड़क पर भर जाता है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है और दोपहिया वाहन चालकों के साथ आए दिन हादसे होते रहते हैं। लोगों ने कहा कि जहां एक ओर मुख्यमंत्री का सपना उत्तर प्रदेश को गड्ढा मुक्त बनाना है, वहीं आगरा की मेयर उनके सपनों पर पानी फेर रही हैं। उनका आरोप है कि मेयर का शहर के विकास पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं है, जिससे जनता परेशान है। इस प्रदर्शन ने शहर की मूलभूत समस्याओं और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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