आगरा। दशलक्षण महापर्व के समापन पर रविवार को ताजगंज में सकल जैन समाज द्वारा श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती बड़ा मंदिर से श्रीजी की रथयात्रा धूमधाम से निकाली गई। रथयात्रा दोपहर 2 बजे शुरू होकर कसेरट बाजार, कटरा जागीदास, चौक कागजियान, घीआई मंडी, गुड़हाई मंडी, दलिहाई, नंदा बाजार, तांगा स्टैंड और चौक थाना होते हुए वापस मंदिर परिसर में पहुंची।
इस दौरान रथ में भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा को विराजमान किया गया। रथयात्रा में ताजगंज के अलावा विभिन्न क्षेत्रों से आए जैन समाज के महिला, पुरुष, बच्चे और अन्य समुदायों के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। जगह-जगह पुष्प वर्षा कर रथयात्रा का भव्य स्वागत किया गया। रथयात्रा के समापन के बाद, श्रद्धालुओं ने मंदिर में जिन अभिषेक और पूजा-अर्चना की। इसके बाद सभी ने स्नेह मिलन भोज का आनंद लिया।
इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष संजय जैन, संजय बाबू जैन, विजय जैन, योगेश जैन, पारस जैन, मधुर जैन, विश्व जैन, विशाल जैन, उत्सव जैन, मीडिया प्रभारी शुभम जैन, रितु जैन, सपना जैन, मिराजन जैन, गीता जैन, अनुराधा जैन और ताजगंज के अन्य सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

भारतीय जैन संगठना ने शिक्षकों को किया सम्मानित
शिक्षक दिवस के अवसर पर, भारतीय जैन संगठना उत्तर प्रदेश ने रविवार, 7 सितंबर को ‘गुरुदक्षिणा महोत्सव’ का आयोजन महावीर भवन, न्यू राजा मंडी कॉलोनी में किया। यह पहला मौका था जब आगरा में जैन शिक्षकों को समर्पित ‘शिक्षा सारथी सम्मान समारोह’ आयोजित किया गया।
इस ऐतिहासिक आयोजन में ज्ञान रत्नाकर बहुश्रुतपुण्य गुरुदेव श्री जय मुनिजी महाराज साहब और गुरु हनुमंत हृदय सम्राट पूज्य श्री आदीश मुनि जी महाराज साहब का मंगल आशीर्वाद समाजजनों को प्राप्त हुआ।
मुख्य अतिथियों में प्रदीप जैन (पीएनसी), सुनील कुमार जैन (आईपीएस डीआईजी चंबल, म.प्र.) और सीए सुरेशचंद जैन शामिल थे। उन्होंने शिक्षा और शिक्षक के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षक ही समाज की रीढ़ होते हैं।
इस अवसर पर निम्नलिखित शिक्षकों को ‘शिक्षा सारथी सम्मान’ प्रदान किया गया:
- डॉ. आर.के. जैन
- प्रो. डॉ. सी.एम. जैन
- डॉ. नीरू जैन
- जी.एल. जैन
- निखिल जैन
- डॉ. अतुल जैन
- सुप्रिया जैन
- पूजा जैन
आयोजन में भारतीय जैन संगठन के पदाधिकारियों मनोज जैन बाकलीवाल, रोहित जैन अहिंसा, सुरेश जैन, पारस जैन कंसल, मनीष लाला, कुमार मंगल जैन, अंकेश जैन, शैलेंद्र जैन, अंकुश जैन, निर्मल जैन मौठया, जगदीश प्रसाद जैन, आशीष जैन, विमलेश मारसंस, पंकज जैन और मुकेश जैन सहित अन्य सदस्य मौजूद थे। इस महोत्सव ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को और अधिक सुदृढ़ करने का संदेश दिया।
