आगरा। आगरा का 68वां ऐतिहासिक जनकपुरी महोत्सव, जो प्रभु श्री राम के स्वागत के लिए शुरू हुआ था, पहले दिन ही अव्यवस्थाओं और कथित ‘पास की राजनीति’ की भेंट चढ़ गया। जहां एक तरफ मंच के सामने वीआईपी और सामान्य पास धारकों के लिए लगाई गईं हजारों कुर्सियां खाली पड़ी रहीं, वहीं दूसरी तरफ प्रभु के दर्शन को आए लाखों भक्तों को जनक महल के बाहर ही रोक दिया गया। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों की अभद्रता से भी भक्तों में भारी निराशा देखने को मिली।

महोत्सव ‘दो पार्षदों’ तक सिमट कर रह गया

इस साल जनकपुरी महोत्सव के भव्य आयोजन का जिम्मा आयोजक समिति के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सौंपा गया था। लेकिन गुरुवार को इस महोत्सव का मूल उद्देश्य कहीं गुम होता दिखा। मंच पर केवल उन्हीं लोगों को जाने दिया गया, जिनके पास एंट्री पास थे, जबकि लाखों की संख्या में आम राम भक्त सड़क पर खड़े रहे। आलम यह था कि जनक महल में प्रवेश न मिलने से नाराज भक्तों ने बाहर ही शोरगुल शुरू कर दिया। इस बीच, मंच पर केवल कुछ जनप्रतिनिधि और समिति के पदाधिकारी ही मौजूद थे, जिससे ऐसा लगा मानो पूरा महोत्सव दो-चार पार्षदों तक ही सिमट कर रह गया हो।

ये रहे मौजूद, पर भक्तों को नहीं मिले दर्शन

शाम 9 बजे तक मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते रहे। इसके बाद, भगवान राम अपने भाईयों के साथ जनक महल पहुंचे, तो पूरा प्रांगण भगवान राम के जयकारों से गूंज उठा। रात 9:37 बजे, केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल और उनकी पत्नी मधु बघेल, राज्यसभा सांसद नवीन जैन, विधायक विजय शिवहरे और जीएस धर्मेश, जनकपुरी समिति के अध्यक्ष महीला अग्रवाल, राजा दशरथ, माता कौशल्या, राजा जनक और माता सुनयना ने भगवान राम और माता सीता की आरती की। आरती के बाद सभी ने जनकपुरी में आए लोगों को संबोधित किया।

हालांकि, इन बड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों के मौजूद होने के बावजूद, उन आम भक्तों को प्रवेश नहीं मिला, जो दूर-दराज से प्रभु के दर्शन करने आए थे। बाहर खड़े भक्तों का कहना था कि भगवान राम केवल पास धारकों के नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज के हैं। जब असली भक्त बाहर खड़े रहे और जिन्हें पास मिला वे आए नहीं, तो यह महोत्सव का अपमान है।

Abhimanyu Singh

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