आगरा नकली दवा सिंडिकेट: ₹71 करोड़ की दवाएँ सील, मगर मुख्य आरोपी को हाईकोर्ट से मिली राहत

आगरा। आगरा में ₹71 करोड़ की नकली दवाओं के बड़े सिंडिकेट पर ड्रग विभाग की कार्रवाई अब ठंडी पड़ गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में लखनऊ की दो प्रमुख फर्मों – न्यू बाबा फार्मा और पार्वती ट्रेड्स – के संचालक विक्की कुमार और सुभाष कुमार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे मिल गया है। ड्रग विभाग, जो तभी से दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में नाकाम रहा था, अब कानूनी रूप से उन्हें छू नहीं पाएगा। क्या था पूरा मामला? 22 अगस्त को ड्रग विभाग और एसटीएफ (STF) की संयुक्त टीम ने आगरा में एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया था, जिसमें: बड़े नेटवर्क का खुलासा और कंपनियों की पुष्टि जाँच के दौरान नकली दवाओं के एक विशाल अंतर्राज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ था। छापेमारी में जब्त की गई दवाओं की जब मूल कंपनियों से जाँच कराई गई, तो उन्होंने यह माना कि फर्मों में मिली दवाइयाँ नकली हैं और उनकी कंपनी में ये दवाएँ नहीं बनाई गई थीं। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, नकली दवाएँ पुडुचेरी से बनकर आगरा पहुँची थीं। फरार आरोपियों को मिली राहत नकली दवाओं का यह रैकेट लखनऊ की फर्मों न्यू बाबा फार्मा और पार्वती ट्रेडर्स से जुड़ा था, जिनके संचालक विक्की कुमार और सुभाष कुमार घटना के बाद से ही फरार चल रहे थे। अब दोनों ने हाईकोर्ट से अपनी गिरफ्तारी पर स्टे प्राप्त कर लिया है, जिससे ड्रग विभाग की आगे की कार्रवाई पर विराम लग गया है। बिना बिल के बेची गई नकली दवाएँ जाँच में बंसल मेडिकल एजेंसी, राधे मेडिकल एजेंसी, हे मां मेडिकोज, एमएसवी मेडी पाॅइंट और ताज मेडिको जैसी कई फर्मों की संलिप्तता सामने आई थी। इन फर्मों से मिली जानकारी के अनुसार, इन्होंने आगरा के अलावा बरेली, मुजफ्फरनगर और अलीगढ़ जैसे जिलों में भी बिना बिल के नकली दवाएँ बेची थीं। ड्रग विभाग ने इन सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को सूची भेजकर गहन जाँच के निर्देश दिए थे।

‘हे माँ!’ आगरा में ड्रग विभाग का फिर छापा, 71 करोड़ की ‘नकली’ दवाओं के बाद अब ये बड़ा एक्शन

आगरा। आगरा के दवा बाजार में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। ड्रग विभाग ने दोपहर से ही एक बड़ी छापेमारी शुरू कर दी है, जो देर रात तक जारी है। बताया गया है कि मुख्यालय में शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई की जा रही है। असिस्टेंट ड्रग कमिश्नर अतुल उपाध्याय ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली थी कि ड्रग एक्ट के नियमों का उल्लंघन करते हुए तीन दुकानों से अवैध व्यापार किया जा रहा है। इन दुकानों के नाम हैं- राधे कृपा फार्मा, एन के एंटरप्राइजेज और गोगिया मेडिकल एजेंसी। आगरा मंडल के ड्रग इंस्पेक्टरों की टीम ने इन तीनों दुकानों से जांच के लिए 12 सैंपल कलेक्ट किए हैं। ड्रग विभाग की टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन दुकानों का संबंध पहले चर्चा में आए ‘हे माँ’ या ‘बंसल मेडिको’ जैसे बड़े दवा माफिया नेटवर्क से तो नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि यह जांच नकली दवाओं के एक और बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर सकती है। अगस्त में भी हुई थी बड़ी कार्रवाई यह पहली बार नहीं है जब आगरा के दवा बाजार पर शिकंजा कसा गया है। अगस्त के अंत में ड्रग विभाग और एसटीएफ ने मिलकर एक बड़ी छापेमारी की थी, जिसमें 71 करोड़ रुपये से अधिक की दवाएं सील की गई थीं। उस दौरान नकली दवाओं के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था और कई गिरफ्तारियां भी हुई थीं, जिसमें हिमांशु अग्रवाल को 1 करोड़ रुपये की रिश्वत देने के आरोप में पकड़ा गया था। इस नई छापेमारी से यह आशंका जताई जा रही है कि आगरा का दवा बाजार अभी भी अवैध और नकली दवाओं के कारोबार का गढ़ बना हुआ है।

नकली दवा रैकेट: FSDA ने पूरे यूपी से मंगवाए संदिग्ध बैच

आगरा। आगरा में नकली दवाओं के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद, अब फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) भी हरकत में आ गया है। FSDA ने पूरे उत्तर प्रदेश से उन सभी दवाओं के बैच वापस मँगवाए हैं, जिनके बैच नंबर आगरा में जब्त की गई नकली दवाओं पर मिले थे। इन सभी दवाओं को अब गहन जाँच के लिए भेजा जाएगा। यह कार्रवाई ड्रग विभाग और एसटीएफ की आगरा में हुई छापेमारी के बाद की जा रही है, जहाँ एलर्जी और ब्लड प्रेशर की नकली दवाएं बरामद की गई थीं। जाँच में सामने आया कि नकली दवाओं पर मिले बैच नंबर और क्यूआर कोड पूरी तरह से असली दवाओं से मिलते-जुलते थे, जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके तैयार किया गया था। कैसे काम करता था नकली दवा का रैकेट? इस रैकेट में शामिल दवा एजेंसियों ने पहले कंपनियों से असली दवाओं का एक बैच खरीदा। फिर, उसी बैच नंबर और क्यूआर कोड की नकल पुडुचेरी में तैयार करवाई गई, जिसे नकली दवाओं पर छाप दिया गया। इस तरह, असली और नकली दवाओं में फर्क करना लगभग नामुमकिन हो गया था। FSDA के अधिकारी अब दवा कंपनी और एजेंसियों से जारी हुए इलेक्ट्रिक वे बिल, जीएसटी बिल और स्टॉक के रिकॉर्ड भी खंगाल रहे हैं ताकि इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। आगरा से बरामद नकली दवाओं के 30 सैंपल पहले ही लखनऊ की लैब में भेजे जा चुके हैं, जिनकी रिपोर्ट एक हफ्ते में आने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई होगी।

आगरा नकली दवा रैकेट ने एंटीबायोटिक, मधुमेह और दर्द निवारक दवाओं की नकली स्ट्रिप्स को बाजार में उतारा

आगरा। आगरा में औषधि विभाग की जांच में एक बड़े नकली दवा रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि माफिया ने अधिक मांग वाली दवाओं को निशाना बनाया और एक ही बैच नंबर से 1000 गुना नकली दवाएं बनाकर बाजार में खपा दीं। इस कार्रवाई में अब तक 71 करोड़ रुपये की नकली दवाएं जब्त की जा चुकी हैं और 24 नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। जांच में आगरा की पाँच फर्मों, जिनमें हे मां मेडिकोज, राधे मेडिकल एजेंसी, बंसल मेडिकल एजेंसी, एमएसवी मेडी पॉइंट और ताज मेडिको शामिल हैं, का नाम सामने आया है। इसके अलावा लखनऊ की न्यू बाबा फार्मा, पार्वती ट्रेडर्स और पुडुचेरी की मीनाक्षा फार्मा भी इस सिंडिकेट का हिस्सा हैं। कई राज्यों में फैला है नेटवर्क माफिया ने सर्दी-खांसी, बुखार, एंटीबायोटिक, मधुमेह और दर्द निवारक जैसी अधिक बिकने वाली दवाओं की हजारों नकली स्ट्रिप्स को बाजार में उतारा है। इन दवाओं की बिक्री कहाँ-कहाँ हुई और इनकी खरीद कहाँ से हुई, इसकी जाँच की जा रही है। प्रदेश के सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को इन फर्मों के नाम और बैच नंबर भेजकर जानकारी मांगी गई है। लखनऊ की दो फर्मों, न्यू बाबा फार्मा और पार्वती ट्रेडर्स, के संचालक अभी तक पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ सके हैं। एसटीएफ उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। अधिकारियों के अनुसार, इन संचालकों की लोकेशन लखनऊ के बाद गोवा में मिली है, जिसके लिए संबंधित राज्यों की पुलिस से भी मदद मांगी जा रही है।

आगरा बना नकली दवाओं का गढ़: 500 करोड़ का काला कारोबार, 2 करोड़ की घूस का भी ऑफर

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा में नकली दवाओं का एक बड़ा रैकेट सामने आया है। ड्रग विभाग और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने 22 अगस्त को एक छापे के दौरान इस काले कारोबार का पर्दाफाश किया। यह मामला तब और भी चौंकाने वाला हो गया, जब आगरा के मशहूर दवा कारोबारी हिमांशु अग्रवाल ने एक करोड़ रुपये नकद देकर कार्रवाई रोकने की कोशिश की और 2 करोड़ रुपये तक देने की पेशकश की। यह रैकेट कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जाँच टीम ने अब तक करीब 70 करोड़ रुपये की नकली दवाएं जब्त की हैं और अनुमान है कि ये गिरोह पिछले 5 सालों में 500 करोड़ रुपये से अधिक की नकली दवाएं बेच चुका है। छापे और खुलासे की पूरी कहानी मामले की शुरुआत दवा कंपनी सनोफी की शिकायत से हुई, जिसने आगरा में ‘हे मां मेडिकल फर्म’ और ‘बंसल मेडिकल स्टोर’ में अपने ब्रांड की नकली दवाएं बिकने की सूचना दी थी। टीम ने एक टेंपो से ऐलेग्रा टैबलेट की बड़ी खेप पकड़ी, जिसमें हर स्ट्रिप पर एक जैसा क्यूआर कोड मिला, जबकि असली दवाओं पर यह अलग-अलग होता है। जांच में पता चला कि ये नकली दवाएं चेन्नई और पुडुचेरी की फैक्ट्रियों में बनती थीं और पूरे देश में सप्लाई की जाती थीं। इन दवाओं को असली दिखाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके असली जैसे क्यूआर कोड बनाए जाते थे। नकली दवाओं का नेटवर्क और उनका असर जांच में यह भी पता चला कि आगरा की तीन फर्मों ने मिलकर यूपी में ऐलेग्रा टैबलेट के 8 लाख पत्ते बेचे, जबकि कंपनी ने इस बैच नंबर की बिक्री यूपी में की ही नहीं थी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की अपर आयुक्त रेखा एस चौहान ने बताया कि 10 लाख के बिल पर 1 करोड़ तक की नकली दवाएं लाई जाती थीं, ताकि चेकिंग में कोई दिक्कत न हो। इस खुलासे के बाद पुडुचेरी की नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री बंद हो गई है, और पुलिस एक आरोपी की तलाश में गोवा पहुँच गई है। यह पहली बार नहीं है जब आगरा में नकली दवाओं का रैकेट सामने आया है। इससे पहले भी शहर के सिकंदरा इलाके में एक फैक्ट्री पकड़ी गई थी, जहाँ दर्द निवारक और नींद की गोलियों में जरूरी सॉल्ट (Tramadol और Alprazolam) की जगह चावल का पानी मिलाया जा रहा था, जिससे ये दवाएं पूरी तरह बेअसर थीं। आगरा अब नकली दवाओं की एक बड़ी मंडी बन चुका है, जहाँ लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर करोड़ों का काला कारोबार किया जा रहा है।

आगरा के दवा बाजार में हड़कंप, जांच एजेंसियों के रडार पर 60% दुकानदार

आगरा। फव्वारा स्थित आगरा का दवा बाजार, जो पूरे ब्रज क्षेत्र में दवाओं की आपूर्ति का एक बड़ा केंद्र है, अब शासन-प्रशासन की कड़ी निगरानी में आ गया है। हाल ही में ड्रग विभाग और एसटीएफ की छापेमारी के दौरान करीब 60 प्रतिशत दुकानदारों का दुकानें बंद करके गायब हो जाना यह साफ दर्शाता है कि यहां नकली और प्रतिबंधित दवाओं का कारोबार बड़े पैमाने पर हो सकता है। अब ऐसे सभी दुकानदारों की गहन जांच का ऐलान कर दिया गया है। छापेमारी से फैली घबराहट अगस्त के अंतिम सप्ताह में जब ड्रग विभाग और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने फव्वारा दवा बाजार में छापा मारा, तो बाजार में हड़कंप मच गया। छापे की खबर मिलते ही लगभग 60 प्रतिशत दुकानदारों ने आनन-फानन में अपने शटर गिरा दिए और तीन से चार दिनों तक अपनी दुकानें नहीं खोलीं। जबकि कुछ व्यापारी बेखौफ होकर अपना कारोबार करते रहे। दुकानें बंद करने वाले ये सभी कारोबारी अब जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गए हैं। औषधि विभाग की विशेष सचिव रेखा एस. चौहान ने भी अपने आगरा दौरे पर यह साफ कर दिया कि जिन दुकानदारों ने छापेमारी के डर से दुकानें बंद की थीं, उन सभी की जांच होगी। उन्होंने कहा कि अगर कारोबार नियमों के तहत हो रहा था, तो डरने की कोई वजह नहीं थी। चार आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल इस मामले में अब तक हे मां मेडिको और बंसल मेडिकल स्टोर के संचालक समेत चार आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। यह घटना यह संकेत देती है कि नकली दवाओं का जाल सिर्फ कुछ दुकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पूरे बाजार में फैले हो सकते हैं। सूत्रों का मानना है कि छापेमारी के बाद कई कारोबारियों ने अपने गोदामों से नकली और अवैध दवाओं को हटाने की कोशिश की है। ताजगंज के नगला पैमा में दवाओं को जलाए जाने की हालिया घटना को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। शासन की गंभीरता को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

आगरा में नकली दवा सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई: केंद्र की नजर, पूर्व डीजीपी की वर्कशॉप के बाद SIT गठित

आगरा। आगरा में नकली दवा कारोबारियों पर हुई कार्रवाई अब केवल एक स्थानीय मामला नहीं रह गया है। इस अवैध धंधे के सिंडिकेट को पूरी तरह से तोड़ने के लिए अब राज्य के साथ-साथ केंद्र सरकार की भी नजर है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में गुजरात के पूर्व डीजीपी केशव कुमार की मौजूदगी में एक हाई-लेवल वर्कशॉप आयोजित की गई, जिसमें लगभग 15 विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने नकली दवा माफियाओं को पकड़ने के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का भी गठन कर दिया है। कई विभाग मिलकर करेंगे कार्रवाई डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी ने वर्कशॉप में कहा कि अब नकली दवा कारोबारियों पर सभी विभाग मिलकर कार्रवाई करेंगे। किसी भी व्यक्ति को सूचना देने के लिए अब सिर्फ ड्रग विभाग तक सीमित नहीं रहना होगा। पुलिस के हेल्पलाइन नंबर या किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के नंबर पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकेगी। डीएम ने स्पष्ट कहा कि इस गोरखधंधे में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पूर्व डीजीपी केशव कुमार ने बताया कि नकली दवाओं का खेल सिर्फ फूड एंड ड्रग्स एक्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धोखाधड़ी, आईटी एक्ट, जीएसटी और इनकम टैक्स उल्लंघन जैसे गंभीर अपराध भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि जिन कारोबारियों ने नकली क्यूआर कोड बनाए, उन पर आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई करने की योजना है। लाइसेंस देने से पहले ली जाएगी पुलिस क्लीयरेंस अधिकारियों ने बताया कि जांच में अक्सर दस्तावेज और यहां तक कि दुकानें व फैक्ट्रियां भी फर्जी निकलती हैं। इस समस्या से निपटने के लिए अब लाइसेंस जारी करने से पहले पुलिस से क्लीयरेंस लेने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, जीआई टैगिंग जैसी तकनीक से यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि जिस पते पर लाइसेंस रद्द हो गया है, वहां दोबारा कोई नया लाइसेंस न मिल पाए। इस सिंडिकेट में काले धन और टैक्स चोरी का भी बड़ा खेल है। इसलिए जांच में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED), जीएसटी विभाग, इनकम टैक्स विभाग और आईटी विभाग की मदद भी ली जाएगी, ताकि सिंडिकेट की पूरी चेन तोड़ी जा सके। दवा माफियाओं की बनेगी टॉप 10 लिस्ट, SIT का गठन पुलिस कमिश्नर ने इस अवैध कारोबार को खत्म करने के लिए एडी डीसीपी साइबर एक्सपर्ट आदित्य सिंह की अध्यक्षता में एक SIT का गठन किया है। यह टीम आगरा में शीर्ष 10 दवा माफियाओं की एक लिस्ट तैयार करेगी। इस अवैध धंधे से माफियाओं द्वारा अर्जित की गई संपत्ति की भी लिस्ट बनाकर, उसे बीएनएस 112 के तहत कुर्क किया जाएगा। इसके अलावा, पुराने मामलों को फिर से खंगाला जाएगा ताकि नए-पुराने लिंक का पता लगाया जा सके। लिंक मिलने पर यह टीम दूसरे राज्यों में जाकर भी माफियाओं को गिरफ्तार करेगी।

आगरा में नकली दवा रैकेट पर भड़के रामजीलाल सुमन, बोले- ‘अपराधियों को मिल रहा सत्ता का संरक्षण’

आगरा। आगरा में नकली दवाओं के कारोबार पर हुई हालिया छापेमारी के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामजीलाल सुमन ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों को दंड नहीं मिलता, जिसकी वजह से अपराध नहीं रुक रहे हैं और पुलिस का मनोवैज्ञानिक दबाव खत्म हो चुका है। ‘नकली दवा कारोबार में भारत नंबर वन’ अपने घर पर आयोजित प्रेसवार्ता में राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने डब्ल्यूएचओ (WHO) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए चौंकाने वाले दावे किए। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में लगभग 17 लाख करोड़ का नकली और अवैध दवाओं का गोरखधंधा है, जिसमें भारत पहले स्थान पर आता है। उन्होंने आगे कहा कि 2019 से 2025 तक भारत में 5,74,233 दवाइयों के सैंपल लिए गए, जिनमें से सिर्फ 16,839 ही गुणवत्ता के अनुरूप पाए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि नकली दवाइयां बेचने वालों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है, यही वजह है कि ऐसे बड़े अवैध कारोबार फल-फूल रहे हैं। भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप, दी आंदोलन की चेतावनी रामजीलाल सुमन ने आरोप लगाया कि बड़ी दवा कंपनियां भारतीय जनता पार्टी को भारी चंदा देती हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने कहा, “कंपनियां ही नकली दवाएं बनवाती हैं और उन्हें सरकार का संरक्षण मिला हुआ है।” उन्होंने आगरा में हुई कार्रवाई को भी अपर्याप्त बताते हुए कहा कि इसकी पूरी तरह से तह तक जाना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही ऐसे दवा विक्रेताओं पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो समाजवादी पार्टी बड़ा आंदोलन करेगी।

नकली दवा जांच के 8वें दिन बंसल मेडिको की एमएसवी मेडिपॉइंट फर्म पर जांच तेज

आगरा। आगरा में नकली दवाओं के खिलाफ ड्रग विभाग और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई लगातार आठवें दिन भी जारी रही। शुक्रवार को टीम ने बंसल मेडिको की एक फर्म, एमएसवी मेडिपॉइंट प्राइवेट लिमिटेड, पर छापा मारा। जांच में गोदाम में भारी मात्रा में दवाओं का स्टॉक मिला, जिसकी सघनता से जांच की जा रही है। गोदाम में हर डिब्बे की हो रही है जांच डिप्टी कमिश्नर ड्रग अतुल उपाध्याय ने बताया कि एमएसवी मेडिपॉइंट के गोदाम में मिले दवाओं के स्टॉक की गिनती और बिलों का मिलान किया जा रहा है। जांच टीम हर डिब्बे को खोलकर दवाओं के बैच नंबर और क्यूआर कोड को बिलों से मिला रही है। उन्होंने कहा कि संदिग्ध दवाओं के सैंपल तुरंत जांच के लिए भेजे जाएंगे और रिपोर्ट निगेटिव आने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि नकली दवा सिंडिकेट के भंडाफोड़ के बाद से ही बंसल मेडिको पर सेल-परचेज पर रोक लगा दी गई थी। जंगल में जली मिली दवाओं की भी हो रही जांच वहीं, यमुना किनारे जंगल में कुछ दवाओं को जलाने का वीडियो वायरल होने के बाद एसटीएफ और ड्रग विभाग ने इस मामले में भी जांच शुरू कर दी है। जिस जगह पर दवाएं जलाई गई थीं, वहां से जली हुई दवाओं के डिब्बे और जो दवाएं जलने से बच गई थीं, उन्हें जब्त कर लिया गया है। अधिकारियों को शक है कि किसी दवा व्यापारी ने पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए सबूत मिटाने की कोशिश में ये दवाएं जलाई होंगी।

आगरा में नकली दवा सिंडिकेट पर एसटीएफ का शिकंजा: कॉल डिटेल से पकड़े जाएंगे 50 संदिग्ध

आगरा। ताजनगरी में नकली दवाओं के बड़े सिंडिकेट पर एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मोती कटरा स्थित हे मां मेडिको से 15 बोरे नकली दवाएं बरामद होने के बाद शुरू हुई जांच में कई चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं। अब तक करीब 50 संदिग्ध एसटीएफ की रडार पर आ चुके हैं, जिनकी संलिप्तता का पता लगाने के लिए एसटीएफ टीम सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। रिश्वत कांड से और गहरी हुई जांच इस केस में उस वक्त नया मोड़ आया, जब जांच के दौरान आरोपियों ने एसटीएफ टीम को 1 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की कोशिश की। इस मामले के सामने आने के बाद औषधि विभाग भी सक्रिय हो गया है और उसने लाइसेंसों की जांच शुरू कर दी है। नकली दवा कारोबार को बेनकाब करने के लिए एसटीएफ ने चार विशेष टीमों का गठन किया है। ये टीमें आगरा सहित आसपास के जिलों में सिंडिकेट के सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं। एसटीएफ का मानना है कि इस गिरोह में कई मेडिकल स्टोर संचालक और एजेंट भी जुड़े हो सकते हैं। मुख्य आरोपियों की तलाश जारी नकली दवा सिंडिकेट में शामिल मुख्य आरोपी हिमांशु अग्रवाल के अलावा, एमएस लॉजिस्टिक्स कंपनी के संचालक यूनिस और वारिस, और जगदीशपुरा के फरहान की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ और थाना कोतवाली की दो टीमें व सर्विलांस टीम लगातार दबिशें दे रही हैं। एसटीएफ उन सभी 50 लोगों की कॉल डिटेल भी निकाल रही है जो हिमांशु अग्रवाल के नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। साथ ही, पुराने नकली दवा मामलों की केस हिस्ट्री भी देखी जा रही है।

आगरा में नकली दवाओं का पर्दाफाश जारी है: बंसल मेडिको के गोदाम में डेढ़ से दो करोड़ की दवाएं जब्त, चल रही है जांच

आगरा। आगरा के दवा बाजार में नकली दवाओं के रैकेट का पर्दाफाश जारी है। ड्रग विभाग की टीम ने बुधवार को बंसल मेडिको के गोदाम में जांच शुरू कर दी है। पिछले शुक्रवार से चल रही इस बड़ी कार्रवाई में पहले हे मां और अब बंसल मेडिको पर छापेमारी की गई है। शुरुआती जांच में बंसल मेडिको के दो मंजिला गोदाम में डेढ़ से दो करोड़ रुपये की दवाएं होने का अनुमान है। लाइसेंस होने के बाद भी स्टॉक की जांच डिप्टी कमिश्नर ड्रग अतुल उपाध्याय ने बताया कि बंसल मेडिको के पास लाइसेंस है, लेकिन कुछ कंपनियों की शिकायत के बाद उनके पूरे स्टॉक की जांच की जा रही है। टीम दवाओं की मात्रा, उनके बिल और जहां दवाएं भेजी गई हैं, उन सभी का रिकॉर्ड चेक कर रही है। उन्होंने बताया कि बंसल मेडिको के मालिक संजय बंसल पुलिस को पूरा सहयोग कर रहे हैं, जिसके कारण जांच सुचारू रूप से चल रही है। हे मां फर्म से मिला था स्टॉक यह कार्रवाई उसी सिंडिकेट से जुड़ी है जिसमें पहले हिमांशु अग्रवाल की फर्म हे मां पर छापा मारा गया था। हिमांशु अग्रवाल को तो रिश्वत देने के आरोप में जेल भेजा जा चुका है। उसके गोदामों से अब तक लगभग 6.50 करोड़ रुपये की दवाएं सील की जा चुकी हैं और 14 दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच में पता चला है कि इन नकली दवाओं को तमिलनाडु के चेन्नई और पुडुचेरी से मंगवाकर लखनऊ के पते पर भंडारण किया जा रहा था और फिर आगरा से कई राज्यों में बेचा जा रहा था।

आगरा में ड्रग विभाग की रेड में ₹1 करोड़ की घूस: दवा कारोबारी हिमांशु अग्रवाल को एसटीएफ ने हिरासत में लिया

आगरा। आगरा के दवा बाजार में नकली दवाओं को लेकर चल रही ड्रग विभाग और एसटीएफ की छापेमारी के दौरान एक बेहद हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जांच के बीच ही एक दवा कारोबारी हिमांशु अग्रवाल अपनी दुकान पर एक करोड़ रुपए कैश लेकर पहुंचा और अफसरों से कहा कि ‘पूरा कैश रख लो और मामला रफा-दफा करो।’ अचानक एक करोड़ रुपए का कैश देखकर अधिकारी कुछ देर के लिए सन्न रह गए। एसटीएफ की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए रिश्वत देने की कोशिश कर रहे दवा कारोबारी हिमांशु अग्रवाल को मौके से हिरासत में ले लिया और उसे कोतवाली ले जाया गया। नकली दवाओं की शिकायत पर हुई थी छापेमारी यह पूरी कार्रवाई सनौफी नाम की एक दवा कंपनी की शिकायत पर शुरू हुई थी। कंपनी ने शिकायत की थी कि आगरा के मुबारक महल स्थित हेमा मेडिकल स्टोर और गोगिया मार्केट स्थित बंसल मेडिकल एजेंसी में उनके ब्रांड की नकली दवाएं बेची जा रही हैं। इसी शिकायत के आधार पर शुक्रवार को कानपुर और बस्ती मंडल के ड्रग विभाग की टीमों ने एसटीएफ के साथ मिलकर दोनों दुकानों और उनके गोदामों पर छापा मारा। शुक्रवार को देर रात होने के कारण टीमों ने दुकानों और गोदामों को सील कर दिया और शनिवार को फिर से जांच शुरू की। करोड़ों की दवाइयां बरामद, इनकम टैक्स को सूचना जांच के दौरान हेमा मेडिकल स्टोर से करीब साढ़े तीन करोड़ की दवाएं बरामद हुईं, जिन्हें ट्रक में भरकर कोतवाली ले जाया गया। इसी तरह, बंसल मेडिकल एजेंसी के गोदाम से भी एक करोड़ रुपए की दवाइयां बरामद की गईं, जो रेलवे के जरिए चेन्नई से लखनऊ के पते पर आ रही थीं, लेकिन आगरा में उतारी जा रही थीं। सूत्रों के मुताबिक, दोनों फर्मों से कुल 3.23 करोड़ रुपए की दवाइयां बरामद हुई हैं। बरामद की गई दवाइयों में जायडस, ग्लेनमार्क और सन फार्मा जैसी कई नामी कंपनियों के ब्रांड मिले हैं, जिनके प्रतिनिधि इसे नकली बता रहे हैं। ड्रग विभाग ने 15 दवाइयों के नमूने जांच के लिए भेजे हैं। बाजार में सन्नाटा और दहशत का माहौल छापेमारी के बाद से पूरे दवा बाजार में हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार और शनिवार को अधिकांश दुकानें बंद रहीं, और बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। हिमांशु अग्रवाल से बरामद किए गए नोटों की गिनती के लिए मशीनें मंगवाई गईं और देर रात तक गिनती जारी रही। पुलिस ने इस मामले की जानकारी आयकर विभाग और विजिलेंस को भी दे दी है, जिसके बाद इस पूरे मामले में और भी खुलासे होने की उम्मीद है।

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