आगरा में बाढ़ का कहर जारी: दूषित पानी और राहत सामग्री में पक्षपात से ग्रामीण परेशान

आगरा। आगरा के जैतपुर क्षेत्र में यमुना नदी की बाढ़ ने कचौरा गाँव के लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब ग्रामीणों को पीने के पानी की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ के कारण गाँव के शौचालय और हैंडपंप बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, और हैंडपंप से दूषित पानी आ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर राहत सामग्री के वितरण में पक्षपात का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सामग्री नहीं मिल पाई, जबकि चुनिंदा लोगों को ही सहायता दी गई। रामरतन, बीना देवी, वेद प्रकाश, सोमवती, राम कांति, अर्चना और शकुंतला समेत कई ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वास्तविक पीड़ित परिवारों को अनदेखा किया गया है। बाढ़ से प्रभावित लोगों को भारी नुकसान हुआ है और वे सरकार से जल्द से जल्द मुआवजे की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर राहत वितरण में पारदर्शिता नहीं बरती गई तो उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

आगरा में 10 दिन बाद जागी सरकार! बाढ़ पीड़ितों को मिला सिर्फ आश्वासन, मुआवजे के लिए 15 दिन में होगा सर्वे

आगरा। आगरा में यमुना की बाढ़ का कहर थमने के 10 दिन बाद आखिरकार सरकार को पीड़ितों की सुध आई है। हजारों लोगों के घर, खेत और फसलें बर्बाद होने के बाद अब प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह ने नुकसान का सर्वे कराने का आदेश दिया है। इस घोषणा से पीड़ितों में उम्मीद की जगह निराशा ज्यादा है, क्योंकि उन्हें तत्काल मदद के बजाय सिर्फ लंबे सर्वे का वादा मिला है। मंत्री जयवीर सिंह ने कहा है कि बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन 15 दिन के अंदर किया जाएगा और इसके लिए दोहरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी – पहले लेखपाल सर्वे करेंगे और फिर ड्रोन से भी जायजा लिया जाएगा। सवाल यह उठता है कि जब लोगों का सब कुछ तबाह हो चुका है, तो इस दोहरी और लंबी प्रक्रिया का क्या औचित्य है? क्या यह सिर्फ पीड़ितों को टालने का एक तरीका है? बाढ़ पीड़ितों से मिलने के लिए मंत्री जयवीर सिंह खुद ट्रैक्टर पर बैठकर गाँवों तक पहुँचे, लेकिन ग्रामीणों को राहत सामग्री के नाम पर सिर्फ किट दी गईं, जबकि उनकी सबसे बड़ी जरूरत तत्काल आर्थिक मदद की है। मंत्री ने मौके पर ही राजस्व अधिकारियों और लेखपालों को बुलाया और उन्हें जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर कोई शिकायत मिली तो कार्रवाई होगी। आगरा में 1978 के बाद आई इस भीषण बाढ़ ने यमुना किनारे के कई गाँवों और कॉलोनियों को जलमग्न कर दिया था। कैलाश मंदिर से बटेश्वर तक का इलाका पूरी तरह डूब गया था। इस दौरान 19 वर्षीय रवेंद्र की यमुना में डूबकर मौत भी हो गई थी। उनके परिजनों को 4 लाख रुपये का चेक देकर संवेदना व्यक्त की गई, लेकिन बाकी हजारों पीड़ित आज भी मदद के इंतजार में हैं। पीड़ितों का कहना है कि प्रशासन ने बाढ़ की चेतावनी के बावजूद समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए। अब जब बाढ़ चली गई है, तो मुआवजे के लिए लंबा इंतजार कराया जा रहा है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

आगरा में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे भाजपा नेता, किसानों को मिला मदद का भरोसा

आगरा। आगरा के ग्रामीण क्षेत्रों में यमुना की बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए भाजपा नेता उपेंद्र सिंह ने आज कई बाढ़ प्रभावित गाँवों का दौरा किया। उन्होंने बरौली गुर्जर, तनोरा नूरपुर, कबीस, मेहरा नाहरगंज, सरगनखेरा सहित कई गाँवों में पहुँचकर किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। उपेंद्र सिंह ने खेतों में भरे पानी और फसलों को हुए नुकसान को करीब से देखा। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाएँ बड़ी चुनौती होती हैं, लेकिन धैर्य और एकजुटता से हर संकट का सामना किया जा सकता है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को यह भरोसा दिलाया कि सरकार और संगठन दोनों स्तर पर हरसंभव मदद पहुँचाई जाएगी। इसके साथ ही, उन्होंने प्रशासन से भी अपील की है कि जल्द से जल्द नुकसान का सर्वे कराया जाए और किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उनका जीवन फिर से पटरी पर आ सके। इस निरीक्षण के दौरान भाजपा नेता के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे, जिनमें यदुवीर चाहर, रविन्द्र धारिया, डॉ. राजवीर सिंह, डॉ. सी.पी. माहौर, अमरपाल सिंह, अकबर सिंह और जयराम प्रमुख रूप से शामिल थे।

आगरा में बाढ़ का विकराल रूप: श्मशान घाट डूबे, लोग सड़क किनारे अंतिम संस्कार करने को मजबूर

आगरा। आगरा में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे बाढ़ की स्थिति बेकाबू होती जा रही है। यमुना खतरे के निशान (499 फीट) से 2.3 फीट ऊपर बह रही है, और बुधवार सुबह इसका जलस्तर 501.3 फीट पर पहुँच गया है। इस भयावह स्थिति के कारण शहर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्र और श्मशान घाट डूब गए हैं। सड़क किनारे अंतिम संस्कार, डूबे श्मशान घाट ताजगंज और पोइया घाट स्थित प्रमुख श्मशान घाट पानी में डूब चुके हैं। मंगलवार को पोइया घाट पर जब लोग अंतिम संस्कार के लिए पहुँचे, तो उन्हें श्मशान के साथ-साथ वहाँ तक पहुँचने वाले रास्ते पर भी 2-3 फीट तक पानी मिला। मजबूरन, लोगों को शव का अंतिम संस्कार सड़क किनारे ही करना पड़ा। यह स्थिति दिखाती है कि बाढ़ ने न केवल जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि मृत्यु के बाद की क्रियाओं को भी बाधित कर दिया है। कई गाँव और कॉलोनियाँ जलमग्न मनोहरपुर से पोइया जाने वाली सड़क पर 2 किलोमीटर तक 4-5 फीट पानी भर गया है, जिससे 10 गाँवों और कॉलोनियों के लोग फंस गए हैं। मां गौरी टाउन सहित 25 कॉलोनियाँ पूरी तरह से जलमग्न हो गई हैं, और करीब 4000 लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। कैलाश मंदिर बंद और सड़कें जलमग्न एहतियात के तौर पर कैलाश महादेव मंदिर के पट भक्तों के लिए बंद कर दिए गए हैं। प्रधान महंत भरत गिरी ने श्रद्धालुओं से मंदिर की ओर न आने की अपील की है। यमुना किनारा रोड पर स्थित आरती स्थल पर भी बैरिकेडिंग लगा दी गई है। हाथी घाट रोड पर 5-6 फीट तक पानी भरा हुआ है, जहाँ वाहन और यहां तक कि घोड़ागाड़ी भी फंस रही है। लोग अपने घरों को बाढ़ से बचाने के लिए ऊँची-ऊँची बाउंड्री बना रहे हैं, लेकिन बढ़ते जलस्तर के सामने उनकी कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं।

आगरा में यमुना का कहर: मोक्षधाम के रास्ते में भरा पानी, शवदाह गृह भी बंद

आगरा। आगरा में यमुना नदी का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुँच गया है, जिससे शहर की 25 से ज्यादा कॉलोनियों में बाढ़ का पानी घुस गया है। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। इसी बीच, बाढ़ का असर शहर के सबसे बड़े श्मशान घाट ताजगंज मोक्षधाम पर भी पड़ा है। विद्युत शवदाह गृह बंद, रास्ता जलमग्न यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण ताजगंज मोक्षधाम तक पहुँचने वाले मुख्य रास्ते पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया है। इससे शवों को मोक्षधाम तक लाने में भारी परेशानी हो रही है। हालात इतने खराब हैं कि मोक्षधाम का विद्युत शवदाह गृह पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। बिजली विभाग ने पानी भरने के कारण बिजली की आपूर्ति काट दी है। मोक्षधाम का संचालन करने वाली श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी ने बताया कि जहाँ आम दिनों में 40 से अधिक अंतिम संस्कार होते थे, वहीं सोमवार को मोक्षधाम में केवल 9 और विद्युत शवदाह गृह में 3 ही अंतिम संस्कार हो सके। लोग शवों को मेटाडोर से पानी के बीच से होकर ले जाने को मजबूर हैं। हालांकि, लकड़ी से अंतिम संस्कार करने वाले 9 प्लेटफॉर्म्स पर अभी भी काम जारी है, क्योंकि यहाँ पानी नहीं पहुंचा है। 5000 लोग पलायन को मजबूर बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यमुना किनारा क्षेत्रों से करीब 5000 लोग पलायन कर चुके हैं। यमुना का जलस्तर अभी भी हर घंटे 10 सेंटीमीटर बढ़ रहा है। प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीमों को तैनात कर दिया है और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। हालात को देखते हुए, लोगों से अपील की गई है कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें और अपने जरूरी सामानों को सुरक्षित रखें।

आगरा में यमुना का कहर: बाढ़ में ढहा मकान, कार बही; लाइव वीडियो सामने आया

आगरा। आगरा में यमुना नदी का कहर जारी है। बीती रात, बाढ़ के पानी से कमजोर हुआ एक मकान भरभराकर ढह गया, जिसका लाइव वीडियो सामने आया है। यह घटना फाउंड्री नगर के गोकुल नगर में हुई, जहाँ बाढ़ का पानी 4-5 फीट तक भर गया है। गनीमत रही कि परिवार के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। मकान ढहने से कुछ देर पहले, घर के सदस्य छत में आई दरार का वीडियो बना रहे थे, तभी पीछे की तरफ की दीवार ढह गई। इस इलाके में कई मकान जलमग्न हो गए हैं, जिससे लोगों ने अपनी छतों पर शरण ली हुई है। प्रशासन ने इन सभी लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा दिया है। तेज बहाव में बही कार एक अन्य घटना में, सोमवार रात कैलाश घाट की तरफ गए एक दंपत्ति की कार भी बाढ़ के पानी में बह गई। उनकी कार जलभराव में फंस गई थी, जिसके बाद यमुना के तेज बहाव ने उसे बहा लिया। हालांकि, समय रहते रेस्क्यू टीम ने दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ये घटनाएँ दिखाती हैं कि यमुना का जलस्तर कितना खतरनाक हो चुका है और लोगों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है।

आगरा में यमुना का रौद्र रूप, 25 कॉलोनियों में बाढ़ का पानी, 2000 लोग पलायन को मजबूर

आगरा। आगरा में यमुना नदी ने 47 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए अपना रौद्र रूप दिखाया है। गोकुल बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण यमुना का जलस्तर खतरे के निशान (499 फीट) से ऊपर 501.1 फीट पर पहुंच गया है। इस विकराल स्थिति के कारण शहर की 25 से अधिक कॉलोनियाँ और कई गाँव जलमग्न हो गए हैं, जिससे हजारों लोग विस्थापित हो गए हैं। बाढ़ का कहर और पलायन शहर के कई प्रमुख इलाके जैसे दयालबाग, बल्केश्वर, अमर विहार, मोतीमहल, और रामबाग बस्ती पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। ताजगंज मोक्षधाम में भी पानी भर जाने से अंतिम संस्कार के लिए नए स्थान (मलका का चबूतरा, शाहगंज, आवास विकास) निर्धारित किए गए हैं। ग्रामीणों और शहरी निवासियों को अपने घरों पर ताला लगाकर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। प्रशासन द्वारा स्थापित राहत शिविरों में बड़ी संख्या में लोग रह रहे हैं, जबकि कई अपने रिश्तेदारों के घर चले गए हैं। ऐतिहासिक स्मारकों पर भी असर यमुना का बढ़ा हुआ जलस्तर ऐतिहासिक स्मारकों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। यमुना का पानी 1978 के बाद पहली बार ताजमहल की बाहरी दीवारों तक पहुँच गया है। हालांकि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारियों ने बताया है कि स्मारक को कोई नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि इसे बाढ़ के पानी को झेलने के लिए ही बनाया गया था। इसके अलावा, यमुना किनारा रोड पर स्थित एत्मादउद्दौला (बेबी ताज) के पीछे बने 12 कमरे पानी में डूब गए हैं और मेहताब बाग का गार्डन भी पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। आगरा किला की खाई में भी मंटोला नाले का बैक-फ्लो होने से पानी भर गया है। प्रशासन की तैयारियां और अपील जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया है। एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे यमुना किनारे न जाएं, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखें और जरूरी कागजातों को वॉटरप्रूफ बैग में रखें। इस मुश्किल समय में आगरा पुलिस और प्रशासन लोगों की हर संभव मदद कर रहा है और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

आगरा में मूसलाधार बारिश से हाहाकार, देखिए तस्वीरें

आगरा। शुक्रवार की दोपहर आगरा में हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर को अस्त-व्यस्त कर दिया। सुबह हल्की बूंदाबांदी के बाद दोपहर करीब 1 बजे से शुरू हुई बारिश लगातार दो घंटे तक जारी रही, जिससे शहर के कई पॉश इलाकों और बाजारों में 2-2 फीट तक जलभराव हो गया। इस जोरदार बारिश का असर ऐसा था कि सड़कों पर गाड़ियाँ और बाइकें लगभग डूब गईं। दिन में भी इतना अंधेरा छा गया था कि ऐसा लग रहा था मानो शाम के 6 बज रहे हों। बाजारों और सड़कों पर जलभराव भारी बारिश के कारण राजामंडी बाजार पूरी तरह से पानी से भर गया। दुकानों के अंदर पानी घुस जाने से व्यापारियों को अपना सामान समेटना पड़ा। इसके अलावा, शास्त्रीपुरम, खेरिया मोड़, अलबतिया रोड, ट्रांसयमुना कॉलोनी, एमजी रोड और मॉल रोड जैसे प्रमुख इलाकों में भी भारी जलभराव देखने को मिला। स्ट्रैची ब्रिज के नीचे तो कई फीट पानी जमा हो गया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। सितंबर में बदला मौसम का मिजाज आगरा में सितंबर की शुरुआत से ही मौसम का मिजाज बदला हुआ है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 से 4 सितंबर के बीच शहर में 12% बारिश हो चुकी है। जबकि, 1 जून से 31 अगस्त तक सिर्फ 26% बारिश हुई थी। मौसम का हाल: आगे क्या? मौसम विभाग ने 5 सितंबर को भी भारी बारिश की संभावना जताई है, जबकि 6 सितंबर को बादल छाए रहेंगे और बारिश हो सकती है। 7 सितंबर से मौसम के साफ होने का अनुमान है। इस बीच, बारिश के कारण पीपल मंडी में एक पुराना और बंद पड़ा मकान गिर गया, हालांकि इसमें कोई हताहत नहीं हुआ क्योंकि वह खाली था। देखिए तस्वीरें:-

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