Agra News Today: शंकर ग्रीन्स विमिन यूनिटी क्लब की गरबा नाइट

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Agra News Today: आगरा में नवरात्रि के मौके पर शंकर ग्रीन्स विमिन यूनिटी क्लब ने गरबा नाइट का आयोजन किया। 100 से अधिक महिलाओं ने उत्साह से भाग लिया। आगरा में नवरात्रि का पर्व इस बार और भी खास रहा। शंकर ग्रीन्स विमिन यूनिटी क्लब की ओर से आयोजित गरबा नाइट में महिलाओं ने एकजुट होकर परंपरा और उत्सव का शानदार संगम पेश किया। कार्यक्रम में 100 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया। आयोजन की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि इसमें 10 साल की बच्ची से लेकर 92 साल की बुजुर्ग महिला तक ने माता रानी के भजन और डांडिया की धुन पर कदम थिरकाए। रंगों और रोशनी से सजी रात डांडिया नाइट में सजावट और माहौल देखने लायक था। मंच पर रंग-बिरंगी लाइटें, माता रानी की भव्य झांकी और पारंपरिक संगीत की गूंज ने पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजधज कर पहुंचीं और समूहों में मिलकर गरबा की ताल पर थिरकती रहीं। जैसे ही ढोल और डांडिया की धुन बजी, पूरा पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा। आयोजकों का उद्देश्य क्लब की प्रमुख आयोजक कुसुम मिड्ढा ने कहा कि इस गरबा नाइट का उद्देश्य केवल नृत्य और मनोरंजन नहीं था, बल्कि समाज की महिलाओं को एक मंच पर लाना और हमारी भारतीय परंपराओं को आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाना है। उन्होंने बताया कि हर साल इस आयोजन का इंतजार महिलाओं को खास तौर पर रहता है। 92 साल की महिला बनी आकर्षण का केंद्र इस कार्यक्रम की चर्चा इसलिए भी रही क्योंकि इसमें सबसे कम उम्र की 10 साल की बच्ची और सबसे अधिक उम्र की 92 वर्षीय महिला ने भी पूरे जोश के साथ डांडिया में भाग लिया। इस दृश्य ने साबित किया कि डांडिया नाइट पीढ़ियों को जोड़ने वाला उत्सव है। गेम्स और प्रतियोगिताएं नाइट में केवल डांडिया ही नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए मनोरंजक गेम्स और प्रतियोगिताएं भी रखी गईं। इसमें प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता और उत्साह दिखाया। प्रतिभागियों का कहना था कि यह आयोजन उनके जीवन में नई ऊर्जा भरने वाला है। महिलाओं की भावनाएँ क्लब से जुड़ीं अजरा महाजन ने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी अगली पीढ़ी को हमारी परंपरा और संस्कृति से जोड़ने का सबसे अच्छा तरीका हैं।निधि कपूर ने कहा कि कार्यक्रम को माता रानी का आशीर्वाद मिला, और सबने इसे दिल से मनाया।मधु अरोरा और शवनीति ने बताया कि ऐसे आयोजन समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देते हैं। आयोजन समिति और उनकी मौजूदगी इस आयोजन को सफल बनाने में कई महिलाओं का विशेष योगदान रहा। सभी ने न केवल कार्यक्रम को सफल बनाया बल्कि डांडिया में भाग लेकर उत्सव की रौनक बढ़ाई। सभी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से यह आयोजन यादगार बन गया। संस्कृति और उत्सव का संदेश कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि गरबा नाइट केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं बल्कि समाज को जोड़ने वाला पर्व है। महिलाओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल खुशी देते हैं बल्कि समाज में भाईचारे और एकजुटता का संदेश भी फैलाते हैं। Agra News Today: होली पब्लिक जूनियर कॉलेज में डांडिया नाइट

Agra News Today: जमीन खरीद पर 1.5 करोड़ बकाया न देने का आरोप, केस दर्ज

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AGRA NEWS TODAY थाना सिकंदरा में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। गुरु तेग बहादुर कॉलोनी निवासी मनोज कुमार जाधव की तहरीर पर उनके परिचित आशीष गोयल के खिलाफ 1,50,00,000 रुपये न चुकाने और धमकी देने का मामला दर्ज किया गया है। विवाद में यह भी आरोप है कि खरीददार ने जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया और भुगतान रोके रखा। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना का पूरा विवरण थाना सिकंदरा में दर्ज तहरीर के अनुसार आरोपकर्ता मनोज कुमार जाधव ने बताया कि उनके नाम पर कराटा नीरव कुंज के एक आवासीय भूखंड (क्षेत्रफल — 399.104 वर्ग मीटर) का सौदा हुआ था। खरीदार पक्ष से जमीन खरीद के लिये प्रारम्भिक सहमति के तहत कुल ₹2,00,00,000 तय हुए थे। आरोपी पर आरोप है कि उसे बैंक ऋण की देनदारी और बाकी बकाया चुकाने का भरोसा देकर सौदा किया गया। शुरुआती दौरान विपक्षी ने मात्र ₹42,50,000 का बयाना दिया और बाकी भुगतान नहीं किया। कुछ चर्चा के बाद पता चला कि खरीदार ने जमीन पर ही निर्माण कार्य शुरू करवा दिया और उस भूखंड को बेचने का प्रयत्न भी किया। जब 19 अगस्त को शाम लगभग 4 बजे मनोज व उनके सहयोगी जमीन के बकाया पैसे मांगने गए तो आरोप है कि आशीष गोयल ने झगड़ा किया और जान से मारने की धमकी दी। इस प्रमाण के आधार पर पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध मामला दर्ज कर पूछताछ शुरू कर दी है। विवाद के कानूनी पहलू और दस्तावेज मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने प्रारंभिक साक्ष्यों और तहरीर के आधार पर जांच आरंभ कर दी है। शिकायत में समस्त भुगतान रसीदें, बैंक-लोन से जुड़े दस्तावेज और जमीन के नाप-जोख से जुड़ी कागजात मांगे जाने की संभावना है। अगर खरीद-विक्रय का लिखित करार (agreement) और बैंक ट्रांजैक्शन दर्शाने वाले सबूत उपलब्ध होते हैं, तो पुलिस के पास मामले की स्पष्ट दिशा होगी। वार्निशिंग/बयाना और बकाया राशि के भुगतान का रिकॉर्ड निर्णायक होगा। उपलब्ध कानूनी विकल्प और पुलिस कार्यवाही पुलिस ने फिलहाल शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है तथा आरोपी के बयान दर्ज करने का प्रयास कर रही है। जघन्य धमकी और वादे के उल्लंघन पर आपराधिक धाराएँ लागू हो सकती हैं। साथ ही सिविल कोर्ट में संपत्ति के बिक्री-पत्र, भुगतान के बिल अथवा बयाने से जुड़ी मांगें के आधार पर दावा भी दायर किया जा सकता है। पोस्ट-मार्टम/भवन के निर्माण के रिकॉर्ड और नाप-जोख के रेकार्ड भी अहम होंगे। मकान निर्माण और बाजार पर असर स्थानीय लोग बताते हैं कि ऐसे विवादों से रीयल एस्टेट लेन-देन की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। खरीदारों को सावधानी बरतते हुए रजिस्टर्ड दस्तावेज, सत्यापित टाइटल और बैंकिंग लेन-देन का प्रमाण जरूर रखना चाहिए। निर्माण कार्य के दौरान भी यदि भुगतान लटका हुआ हो तो विवाद आगे चलकर संपत्ति के कब्जे और बिक्री-लेनदेन में गंभीर अड़चनें पैदा कर सकता है। पीड़ित का वित्तीय और सामाजिक परिप्रेक्ष्य प्राथमिकी में निर्दिष्ट किया गया है कि मनोज परिवारिक पृष्ठभूमि और जान-पहचान के कारण इस सौदे में विश्वास पर आधारित भुगतान किया। अब बकाया रुकने और धमकी के कथित आरोप ने पारिवारिक सुरक्षा व मनोबल पर असर डाला है। संपत्ति विवाद के चलते सामाजिक रिश्ते भी प्रभावित होते हैं और न्याय मिलने तक प्रभावित परिवार आर्थिक व मानसिक दबाव झेलते हैं। पुलिस का बयान और आगे की जांच थाना सिकंदरा व आगरा पुलिस ने कहा है कि मामला गंभीर है और साक्ष्यों के आधार पर जल्द सुनवाई कर कार्रवाई की जाएगी। डीएसपी/थाना प्रभारी प्राथमिक जांच में बयानों की पुष्टता, बैंक व रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, और निर्माण स्वीकृति के प्रमाण जुटा रहे हैं। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। Agra News Today: व्यापारी की जमीन पर कब्जे की साजिश

आगरा में ‘ट्रैफिक रेंगता है’ का हाल! हरीपर्वत से आवास विकास तक ‘गड्ढे-अतिक्रमण का सफर’: 4 KM की दूरी 30 मिनट में, ‘मांएं स्कूल से लौटते बच्चों का करती हैं इंतजार’

आगरा। आगरा शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक, हरीपर्वत से आवास विकास तक का मार्ग, इन दिनों शहरवासियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं। महज 4 किलोमीटर की यह दूरी, जिसे सामान्यतः 10 मिनट में तय किया जा सकता है, अब 25 से 30 मिनट का समय ले रही है। सबसे ज़्यादा पीड़ा उन माताओं को उठानी पड़ रही है, जो स्कूल से अपने बच्चों के लौटने का बेसब्री से इंतजार करती हैं, क्योंकि बच्चों को थोड़ी सी दूरी तय करने में भी घंटों लग रहे हैं। इस रूट पर ट्रैफिक चलता नहीं, बल्कि रेंगता है, जिसका मुख्य कारण जगह-जगह मौजूद गड्ढे और बेतहाशा अतिक्रमण है, जिसने पूरे रास्ते को एक बड़े जाम में तब्दील कर दिया है। हरीपर्वत से ही शुरू हो जाती है मुसीबत: स्कूल टाइम और शाम को ‘हाल बेहाल’ स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस परेशानी की शुरुआत हरीपर्वत चौराहे से ही हो जाती है, जहां से सड़क पर गड्ढे मिलने लगते हैं। दोपहर में स्कूल की छुट्टी के समय और शाम 6 से 8 बजे के बीच इस रूट पर सबसे भीषण जाम लगता है। खासकर दिल्ली गेट से लेकर मदिया कटरा पुल और मानसिक स्वास्थ्य संस्थान तक वाहन मुश्किल से आगे बढ़ पाते हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि दिल्ली गेट पर स्थित अस्पतालों की पार्किंग में खड़े वाहन भी अक्सर सड़क पर ट्रैफिक को रोक देते हैं, जिससे जाम और बढ़ जाता है। मदिया कटरा पर केवल एक लेन होने के कारण टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर दोनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, और गाड़ियां बस रेंगती रहती हैं। जाम के कारण स्कूल से लौटते बच्चों को गर्मी और उमस में भारी परेशानी होती है, जिससे मांओं की चिंता बढ़ती है कि उनका बच्चा कब घर आएगा, कब खाएगा और कब सो पाएगा। बारिश में हालात और बदतर: नालियां ओवरफ्लो, सड़कें बन जाती हैं तालाब मदिया कटरा चौराहे पर दुकानदारों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि दोपहर और शाम को रोज आवास विकास से आने वाले वाहनों की लंबी लाइनें लग जाती हैं। वहीं एक रेहड़ी लगाने वाले ने बताया कि चौराहे से लेकर मानसिक चिकित्सालय तक हल्की बारिश में भी पानी भर जाता है। सड़कें तालाब जैसी बन जाती हैं, जिससे गाड़ियां फंस जाती हैं। नालियां ओवरफ्लो होकर सड़कों पर बहने लगती हैं, और जलभराव से हालात और भी खराब हो जाते हैं, जिससे यह 4 किलोमीटर का सफर बारिश के दिनों में 45 मिनट तक का समय ले सकता है। 16 सेक्टरों को जोड़ता है यह अहम मार्ग, हजारों वाहन रोज गुजरते हैं यह मार्ग आवास विकास कॉलोनी के 16 सेक्टरों को जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है। मदिया कटरा से होकर लोहामंडी, न्यू राजामंडी और सिकंदरा पुल जाने वाले हजारों लोग रोजाना इसी रूट का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, यह मार्ग मथुरा और दिल्ली जाने वाले वाहनों के लिए भी एक अहम कड़ी है। इस महत्वपूर्ण मार्ग की बदहाली से हजारों लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन को इस समस्या पर तुरंत ध्यान देने और ठोस कदम उठाने की जरूरत है ताकि शहरवासियों को इस रोजमर्रा के ‘जाम और गड्ढों के सफर’ से मुक्ति मिल सके।

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