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Agra News: 6 दिन बाद उटंगन त्रासदी खत्म, डूबे सभी 12 के शव मिले!

Agra News उटंगन नदी त्रासदी खत्म: 6 दिन बाद डूबे सभी 12 युवकों के शव बरामद कर लिए गए। सेना, NDRF का सर्च ऑपरेशन समाप्त। सचिन, दीपक, गजेंद्र, हरेश के शव मिले। Agra News खेरागढ़ स्थित उटंगन नदी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हृदय विदारक हादसे के बाद छह दिनों से चल रहा सेना और एनडीआरएफ (NDRF) का विशाल सर्च ऑपरेशन मंगलवार को पूरा हो गया। 2 अक्टूबर को डूबे गांव कुसियापुर के 12 युवकों में से आखिरी 4 के शव भी बरामद कर लिए गए हैं, जिससे शोक की लहर फैल गई। सभी शव बरामद होने के बाद नदी किनारे मौजूद शोकाकुल परिवारों में कोहराम मच गया। देर रात तक सभी शहीद युवकों के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। आखिरी दिन का संघर्ष और शवों की बरामदगी यह त्रासदी 2 अक्टूबर (दशहरा) के दिन हुई थी, जब गांव कुसियापुर के लोग देवी प्रतिमा विसर्जित करने के लिए उटंगन नदी पर गए थे। विसर्जन स्थल पर कुंड बना होने के बावजूद, वे 300 मीटर दूर मरघट के किनारे खनन से बने गहरे गड्ढे में विसर्जन करने चले गए, जहाँ दलदल और गहराई के कारण 12 युवक डूब गए, जबकि एक युवक विष्णु को बचा लिया गया था। छह दिनों तक चले इस चुनौतीपूर्ण सर्च ऑपरेशन में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और सेना के स्कूबा डाइवर की स्पेशल टीम रात-दिन लगी रहीं। सोमवार तक 8 शव मिल चुके थे। मंगलवार की सुबह एक बार फिर युद्ध स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया, जिसमें तीन कंप्रेसर की मदद से नदी में बने गड्ढे के अंदर से मिट्टी को हवा के दबाव से हटाने का काम किया गया। आखिरी दिन शवों की बरामदगी का क्रम इस प्रकार रहा: सर्च ऑपरेशन समाप्त, शोक का मंजर सभी 12 युवकों के शव मिलने के साथ ही छह दिनों से जारी सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ का यह कठिन सर्च ऑपरेशन आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया। चारों शव मिलने पर नदी के किनारे पर मौजूद परिवार वालों में मातम छा गया और वे फूट-फूट कर रोने लगे। परिजनों को अन्य लोगों ने किसी तरह सांत्वना देकर संभाला। इस दुखद क्षण में घटनास्थल पर जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगाली सहित पुलिस आयुक्त दीपक कुमार और अन्य पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों द्वारा एक साथ मिलकर चलाए गए इस सफल लेकिन कष्टदायक अभियान की सराहना की। नदी की त्रासदी: 12 मृतक युवकों के नाम यह त्रासदी अवैध खनन से बने गहरे गड्ढों की वजह से हुई, जहाँ दलदल और मिट्टी के नीचे शव बुरी तरह फंसे हुए थे। बरामद किए गए सभी 12 मृतक युवकों के नाम इस प्रकार हैं: ओमपाल (25), गगन (24), हरेश (20), अभिषेक (17), भगवती (22), ओके उर्फ ओकेश (16), सचिन (26), गजेंद्र (17), मनोज (14), वीनेश (18), करन (21) और दीपक (15)। इन 12 परिवारों का शोक पूरे कुसियापुर गांव और आगरा में मातम बनकर छाया हुआ है। Agra News Today: उटंगन नदी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान 14 युवक डूबे, 3 शव मिले, 10 लापता

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Agra News: उटंगन हादसा: 8वां शव ओकेश का मिला, 4 अब भी लापता!

Agra News उटंगन नदी त्रासदी में 8वां शव ओकेश का मिला। 13 में से अब तक 8 के शव निकाले जा चुके हैं। सेना, NDRF और SDRF 4 लापता की तलाश में हैं। Agra News Today आगरा के खेरागढ़ क्षेत्र स्थित उटंगन नदी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हृदय विदारक हादसे को अब 110 घंटे से अधिक का समय हो चुका है। इस भीषण दुर्घटना में डूबे 13 लोगों में से सोमवार देर शाम तक 8 के शव निकाले जा चुके हैं, जिससे शोकाकुल परिवारों को कुछ राहत मिली है। सोमवार को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान विनेश का शव मिलने के बाद, एक और युवक ओकेश का शव भी नदी की गहराई से बरामद कर लिया गया। अब सेना, एनडीआरएफ (NDRF), और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बाकी 4 लापता युवकों की तलाश में रात-दिन जुटी हुई हैं। वहीं, हादसे में बाल-बाल बचे एक घायल युवक का इलाज अभी भी अस्पताल में जारी है। इस त्रासद घटना ने खेरागढ़ क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है। लापता युवकों की तलाश जारी, पीड़ितों के नाम इस दर्दनाक हादसे के शिकार हुए 13 युवकों में से अब तक 8 शव निकाले जा चुके हैं। शवों की बरामदगी के क्रम में गगन, ओमपाल, मनोज, भगवती, अभिषेक, करन, विनेश के बाद अब ओकेश का नाम भी शामिल हो गया है। इन युवकों के शव मिलने से उनके परिवारों को अंतिम संस्कार का अवसर मिल पाया है, जबकि 110 घंटे से चला आ रहा इंतजार अत्यंत कष्टकारी साबित हो रहा था। अब भी 4 युवक लापता हैं, जिनकी तलाश में रेस्क्यू टीमें नदी के हर कोने को खंगाल रही हैं। लापता युवकों के नाम हैं: सचिन, हरेश, गजेंद्र, और दीपक। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि तलाशी अभियान में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और टीमें तब तक डटी रहेंगी जब तक कि सभी शव बरामद नहीं हो जाते। स्थानीय युवकों का असाधारण प्रयास: अस्थायी बांध नदी की तेज धारा और दलदल भरी गहराई रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस चुनौती से निपटने के लिए क्षेत्रीय युवकों ने अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया है। उन्होंने रात-दिन की परवाह किए बिना लगभग 250 मीटर के डूब क्षेत्र में नदी के पानी का बहाव रोकने के लिए 40 मीटर लंबा एक अस्थायी बांध बना दिया है। इसके अलावा, नदी की मुख्य धारा को डूब क्षेत्र के बीच से नाला बनाकर दूसरी ओर मोड़ा गया है। इस इंजीनियरिंग पहल से बचाव कार्य में लगी टीमों को गड्ढों की गहराई तक पहुँचने में असाधारण आसानी हुई है। पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से नदी के तल में खुदाई का काम भी युद्ध स्तर पर जारी है ताकि लापता युवकों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके। स्थानीय युवाओं का यह प्रयास सामुदायिक एकजुटता का एक प्रेरक उदाहरण है। कंप्रेसर तकनीक बनी आशा की किरण उटंगन नदी के गहरे और दलदली गड्ढों में फंसे शवों को निकालने के लिए एक अनोखी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अब तक बेहद कारगर साबित हुई है। इस तकनीक में ऐसे कंप्रेसर का इस्तेमाल हो रहा है, जिसका प्रयोग सामान्यतः जमीन में 100 से 300 फीट तक फंसे सबमर्सिबल पंप को बाहर निकालने में किया जाता है। तेज हवा के दबाव से मिट्टी या बालू हट जाती है। उटंगन में इसी सिद्धांत का उपयोग किया गया। स्कूबा ड्राइवर कंप्रेसर के पाइप को नदी के अंदर गहरे गड्ढों में लेकर गए और मिट्टी को हटाने के लिए तेज हवा का इस्तेमाल किया। तकरीबन 30 मिनट तक मिट्टी हटाने के बाद ही करन का शव बाहर निकाला जा सका। इस सफलता को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तीन और कंप्रेसर मशीनों को लगाया जाएगा ताकि बाकी शवों को भी जल्द से जल्द निकाला जा सके। इस तकनीक से यह उम्मीद जगी है कि बाकी शवों को निकालने में भी यह मददगार साबित होगी। खनन से बने गहरे गड्ढे बड़ी समस्या बचाव दल ने पाया है कि जिस स्थान पर सभी युवक डूबे थे, वह अवैध खनन की वजह से 25 से 30 फीट तक गहरा गड्ढा बन चुका था। इस गड्ढे में दलदल की मात्रा अत्यधिक थी, जिसके कारण फंसे हुए युवक ऊपर नहीं आ सके। कंप्रेसर मशीन की मदद से इस दलदल और मिट्टी को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है, जिससे उम्मीद है कि बाकी 4 लापता युवकों की तलाश जल्द पूरी होगी और उनके परिवारों को शांति मिल सकेगी। प्रशासन ने कहा है कि रेस्क्यू जारी रहेगा और इस त्रासदी के कारणों की भी पूरी जांच की जाएगी। Agra News: उटंगन हादसा: 110 घंटे बाद मिला 7वां शव, 5 अब भी लापता!

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Agra News: उटंगन हादसा: 110 घंटे बाद मिला 7वां शव, 5 अब भी लापता!

Agra News उटंगन नदी हादसे में 110 घंटे बाद एक और शव मिला। 13 में से अब तक 7 के शव निकाले जा चुके हैं। सेना, NDRF और SDRF 5 लापता की तलाश में हैं। Agra News खेरागढ़ क्षेत्र स्थित उटंगन नदी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हृदय विदारक हादसे को अब 110 घंटे से अधिक का समय हो चुका है। इस भीषण दुर्घटना में डूबे 13 लोगों में से अब तक 7 के शव निकाले जा चुके हैं, जिससे शोकाकुल परिवारों को कुछ राहत मिली है। सोमवार को रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक और युवक विनेश का शव नदी की गहराई से बरामद किया गया। सेना, एनडीआरएफ (NDRF), और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बाकी 5 लापता युवकों की तलाश में रात-दिन जुटी हुई हैं। वहीं, हादसे में बाल-बाल बचे एक घायल युवक का इलाज अभी भी अस्पताल में जारी है। तलाश जारी, पीड़ितों के नाम इस दर्दनाक हादसे के शिकार हुए 13 युवकों में से अब तक 7 शव निकाले जा चुके हैं। इनमें गगन, ओमपाल, मनोज, भगवती, अभिषेक, करन और सोमवार को बरामद हुए विनेश के नाम शामिल हैं। करन का शव रविवार को कंप्रेसर मशीन की मदद से निकाला गया था। अब भी 5 युवक लापता हैं, जिनकी तलाश में रेस्क्यू टीमें नदी के हर कोने को खंगाल रही हैं। लापता युवकों के नाम हैं: सचिन, हरेश, गजेंद्र, दीपक और ओकेश। इन परिवारों के लिए 110 घंटे का यह इंतजार अत्यंत कष्टकारी साबित हो रहा है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि तलाशी अभियान में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। स्थानीय युवकों की अनूठी पहल: अस्थायी बांध नदी की तेज धारा और दलदल भरी गहराई रेस्क्यू ऑपरेशन में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इस चुनौती से निपटने के लिए क्षेत्रीय युवकों ने अभूतपूर्व साहस और मेहनत का परिचय दिया है। उन्होंने रात-दिन की परवाह किए बिना लगभग 250 मीटर के डूब क्षेत्र में नदी के पानी का बहाव रोकने के लिए 40 मीटर लंबा एक अस्थायी बांध बना दिया है। इसके अलावा, नदी की मुख्य धारा को डूब क्षेत्र के बीच से नाला बनाकर दूसरी ओर मोड़ा गया है, जिससे बचाव कार्य में लगी टीमों को गड्ढों की गहराई तक पहुँचने में आसानी हो सके। पोकलेन और जेसीबी मशीनों की मदद से नदी के तल में खुदाई का काम भी युद्ध स्तर पर जारी है ताकि लापता युवकों का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके। स्थानीय युवाओं का यह प्रयास सामुदायिक एकजुटता का एक महान उदाहरण है। कंप्रेसर तकनीक बनी आशा की किरण उटंगन नदी के गहरे और दलदली गड्ढों में फंसे शवों को निकालने के लिए एक अनोखी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो अब तक बेहद कारगर साबित हुई है। इस तकनीक में ऐसे कंप्रेसर का इस्तेमाल हो रहा है, जिसका प्रयोग सामान्यतः जमीन में 100 से 300 फीट तक फंसे सबमर्सिबल पंप को बाहर निकालने में किया जाता है। जब पंप बालू या मिट्टी के कारण फंस जाते हैं, तब कारीगर कंप्रेसर से हवा के पाइप को भूमिगत पंप की पाइप लाइन में डालते हैं। तेज हवा के दबाव से मिट्टी या बालू हट जाती है और पंप बाहर आ जाता है। उटंगन में इसी सिद्धांत का उपयोग किया गया। स्कूबा ड्राइवर कंप्रेसर के पाइप को नदी के अंदर गहरे गड्ढों में लेकर गए और मिट्टी को हटाने के लिए तेज हवा का इस्तेमाल किया। तकरीबन 30 मिनट तक मिट्टी हटाने के बाद ही करन का शव बाहर निकाला जा सका, जिसे किसी प्रकार का नुकसान भी नहीं पहुंचा था। अब इस सफलता को देखते हुए तीन और कंप्रेसर मशीनों को रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया जाएगा। खनन से बने गहरे गड्ढे बड़ी समस्या बचाव दल ने पाया है कि जिस स्थान पर सभी युवक डूबे थे, वह अवैध खनन की वजह से 25 से 30 फीट तक गहरा गड्ढा बन चुका था। इस गड्ढे में दलदल की मात्रा अत्यधिक थी, जिसके कारण फंसे हुए युवक बाहर नहीं आ सके। कंप्रेसर मशीन की मदद से इस दलदल और मिट्टी को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है, जिससे उम्मीद है कि बाकी 5 लापता युवकों की तलाश जल्द पूरी होगी और उनके परिवारों को शांति मिल सकेगी। Agra: उटंगन नदी त्रासदी: करन का शव मिला, मां-पत्नी बेसुध!

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Agra: उटंगन नदी त्रासदी: करन का शव मिला, मां-पत्नी बेसुध!

Agra उटंगन नदी त्रासदी के चौथे दिन लापता करन (21) का शव मिला। बेटे की खबर मिलते ही मां सामंती देवी की आँखें पथरा गईं और पत्नी सपना बेसुध हो गईं। Agra के खेरागढ़ क्षेत्र को झकझोर देने वाले उटंगन नदी हादसे के चौथे दिन, लापता सात लोगों में से एक और युवक का शव बरामद हो गया है। नदी में डूबे करन (21) पुत्र रनवीर का शव रविवार शाम को नदी की गहराई से निकाला गया। चार दिन तक अपने बेटे के सही-सलामत लौट आने की उम्मीद लगाए बैठे परिवार के लिए यह खबर किसी वज्रपात से कम नहीं थी। करन का शव मिलने की जानकारी मिलते ही पूरे घर में और कुसियापुर गांव में फिर से चीख-पुकार और कोहराम मच गया। इस भयानक त्रासदी ने कई घरों के दीपक हमेशा के लिए बुझा दिए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में गहरे शोक की लहर दौड़ गई है। सेना के जवानों ने निकाला शव करन (21) पुत्र रनवीर का शव सेना के जवानों और स्थानीय गोताखोरों की मदद से नदी में चलाए जा रहे सघन रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मिला। बताया गया कि शव नदी में बने गहरे गड्ढों में फँसा हुआ था, जिसे निकालने के लिए कम्प्रेसर मशीन की सहायता ली गई। जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद करन के शव को बाहर निकाला। नदी किनारे मौजूद ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में शव को तुरंत पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि बाकी लापता लोगों की तलाश अभी भी जारी है और जब तक सभी शव बरामद नहीं हो जाते, रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं रोका जाएगा। मां की पथराई आँखें, पत्नी का विलाप जैसे ही करन का शव मिलने की खबर घर पहुंची, वहां का मंजर बेहद मार्मिक हो गया। बेटे के इंतजार में लगातार चार दिनों से पथराई निगाहों से दरवाजे की ओर टकटकी लगाए बैठीं मां सामंती देवी सदमे से सन्न रह गईं। उनकी आँखें अब आस की बजाय गहरे गम में डूबी थीं। वह बार-बार सिर्फ अपने बेटे करन का नाम पुकारती रहीं और बेसुध होकर जमीन पर बैठ गईं। वहीं, करन की पत्नी सपना का रो-रोकर बुरा हाल था। अपने पति को खोने के गम में वह बार-बार बेहोश हो रही थीं। उनका हृदय विदारक विलाप सुनकर वहां मौजूद हर किसी की आँखें नम हो गईं। रिश्तेदारों और पड़ोसी महिलाओं का समूह घर में मौजूद था और वे करन की मां, पत्नी और बहन को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन इस अपूरणीय क्षति की भरपाई करना असंभव था। करन के पिता भी बेटे की मौत से गहरे सदमे में हैं, उनके भी आंसू सूख गए हैं। मासूम विनय की मार्मिक तलाश इस पूरे दुखद माहौल में सबसे मार्मिक दृश्य करन के डेढ़ वर्षीय मासूम बेटे विनय का था। मासूमियत से अनजान विनय अपने पिता के घर न होने के कारण उन्हें बार-बार ढूंढता रहा। अपनी मासूम निगाहों से वह दरवाजे की ओर टकटकी लगाकर देखता रहा, मानो किसी भी पल उसके पिता करन उसे पुकारेंगे। उस छोटे बच्चे को अभी तक यह एहसास नहीं है कि उसके सिर से उसके पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। मासूम का यह निष्पाप इंतजार देखकर वहां मौजूद सभी लोगों का दिल भर आया और इस त्रासदी की भयावहता और असहनीयता हर किसी को महसूस हुई। यह दृश्य उस त्रासदी की सामाजिक कीमत को दर्शाता है जो पूरे कुसियापुर गांव पर आई है। समूचे क्षेत्र में शोक की लहर उटंगन नदी हादसे ने एक ही गांव के कई घरों में मातम फैला दिया है। करन का शव मिलने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह त्रासदी कितनी गहरी है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। क्षेत्रीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया है। इस सामूहिक त्रासदी के कारण पूरे खेरागढ़ क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है और लोग शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं। प्रशासन ने भी कहा है कि नदी में बाकी लापता लोगों की तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। Agra News Today: मातम के बीच शराब बिक्री, गुस्साई महिलाओं ने ठेका तोड़ा!

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Agra News Today: उटंगन नदी में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान 14 युवक डूबे, 3 शव मिले, 10 लापता

AGRA NEWS TODAY आगरा जिले के खेरागढ़ थाना क्षेत्र की उटंगन नदी में गुरुवार को मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा हो गया। कुसियापुर डूगरवाला गांव के 14 युवक नदी में डूब गए। ग्रामीणों और पुलिस की मदद से अब तक 3 शव बरामद किए जा चुके हैं और 1 युवक विष्णु को गंभीर हालत में बचा लिया गया है। शेष 10 युवक अब भी लापता हैं। हादसा कैसे हुआ? गांव के युवक प्रतिमा विसर्जन के लिए नदी में हाथ पकड़कर आगे बढ़ रहे थे। अचानक एक युवक का हाथ फिसला और वह गहरे गड्ढे में जा गिरा। उसे बचाने के प्रयास में सभी युवक पानी में समा गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि नदी में कई गहरे गड्ढे हैं, जिसका किसी को अंदाजा नहीं था। इसी वजह से सभी युवक बहाव में डूब गए। डूबने वालों की सूची (अब तक ज्ञात) अन्य दो युवक भी लापता विष्णु (20) – गंभीर हालत में बचाया गया ओमपाल (25) – शव बरामद गगन (24) – शव बरामद मनोज – शव बरामद हरेश (20) – लापता अभिषेक (17) – लापता भगवती (22) – लापता ओके (16) – लापता सचिन पुत्र रामवीर (26) – लापता सचिन पुत्र ऊना (17) – लापता गजेंद्र (17) – लापता दीपक (15) – लापता ग्रामीणों का गुस्सा और जाम हादसे के बाद ग्रामीणों ने रेस्क्यू में देरी का आरोप लगाते हुए सड़क जाम कर दिया। दो जगहों पर जाम लगा हुआ है। मौके पर जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी, डीसीपी वेस्ट अतुल शर्मा और अन्य अफसर पहुंचे और हालात संभालने की कोशिश कर रहे हैं। डीसीपी ने बताया कि विसर्जन स्थल उंटगन नदी पुल के नीचे बनाया गया था, लेकिन ग्रामीण बीच नदी में जाने पर अड़े थे। पुलिस ने रोकने की कोशिश की, इसके बाद लोग दूसरे स्थान पर जाकर प्रतिमा विसर्जन करने लगे, जहां यह हादसा हो गया। ताजगंज: करभना गांव में 5 युवक डूबे दूसरी घटना ताजगंज थाना क्षेत्र के करभना गांव की है। यहां दुर्गा विसर्जन के दौरान 5 युवक यमुना नदी में डूब गए। तीन किसी तरह तैरकर बाहर निकल आए लेकिन दो युवक गहरे पानी में समा गए। गोताखोरों की टीम दोनों की तलाश में जुटी है। हादसे का लाइव वीडियो भी सामने आया है, जिसमें युवकों को बहाव में संघर्ष करते देखा जा सकता है। माहौल गमगीन गांव में दशहरा पर्व पर स्थापित की गई मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के लिए लोग नदी पर पहुंचे थे। हादसे के बाद पूरे गांव में कोहराम मच गया। महिलाएं मूर्ति के सामने हाथ जोड़कर युवकों की सलामती की दुआ करती रहीं। Agra News Today: यमुना पार करने की शर्त में युवक डूबा, परिवार में मचा कोहराम

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