एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा: जटिल सर्जरी से बचाई 55 वर्षीय मरीज की जान

आगरा, 18 दिसंबर 2024:
एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाते हुए 55 वर्षीय नरेंद्र पाल सिंह, फिरोजाबाद निवासी, की जान बचाई। पेशे से चूड़ियों का काम करने वाले नरेंद्र पाल एक गंभीर सड़क दुर्घटना में बुरी तरह घायल हो गए थे। उनकी छाती पर ऑटो गिरने के कारण बाईं ओर की सभी पसलियां (Flail Chest) कई जगहों से टूट गई थीं। टूटी हुई हड्डियां फेफड़ों में घुसने से उनकी हालत बेहद नाजुक हो गई, और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। उनका ऑक्सीजन स्तर लगातार गिर रहा था।

आपातकालीन सर्जरी ने दी नई जिंदगी

मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए, कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ. सुशील सिंघल और उनकी टीम ने तत्काल सर्जरी का फैसला लिया। 4 घंटे चली इस जटिल सर्जरी में फेफड़ों की मरम्मत (Lung Repair) की गई और सभी टूटे हुए पसलियों की प्लेटिंग (Artificial Ribs Fixation) कर उन्हें स्थिर किया गया।

सर्जरी के बाद मरीज को एक दिन आईसीयू में रखा गया और 14 दिनों तक गहन देखभाल के बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर डिस्चार्ज कर दिया गया। अब नरेंद्र पाल सिंह सामान्य जीवन जी रहे हैं।

उत्तर भारत में दुर्लभ जीवनरक्षक सर्जरी

उत्तर भारत में इस तरह की जटिल सर्जरी बहुत कम होती है। विशेषज्ञता और उन्नत सुविधाओं की कमी के चलते मरीज अक्सर समय पर इलाज नहीं करवा पाते और अपनी जान गंवा देते हैं। एस.एन. मेडिकल कॉलेज ने इस सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है।

सर्जरी टीम की सराहनीय भूमिका

इस सर्जरी में डॉ. सुशील सिंघल के साथ उनकी टीम डॉ. यशवर्धन, डॉ. आकाश, और डॉ. ज़फर ने अहम भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अर्चना, डॉ. अतीहर्ष (क्रिटिकल केयर), डॉ. कृष्णा और डॉ. श्रेयस ने सफल संचालन में योगदान दिया। सर्जरी स्टाफ में मोनू और सचिन का सहयोग भी सराहनीय रहा।

सर्जरी विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉ. प्रशांत लवानिया और प्रिंसिपल डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस सफलता के लिए टीम को बधाई दी। डॉ. गुप्ता ने कहा, “एस.एन. मेडिकल कॉलेज अब सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टरों द्वारा जटिल सर्जरी को अंजाम दे रहा है। यह आगरा और आसपास के मरीजों को दिल्ली और जयपुर जैसे बड़े शहरों पर निर्भरता से मुक्ति दिलाएगा।”

उत्तर भारत में इस सर्जरी की चुनौतियां

  1. विशेषज्ञ सर्जनों की कमी:
    ऐसी जटिल सर्जरी को अंजाम देने के लिए अनुभवी कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन (CTVS) की आवश्यकता होती है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे विशेषज्ञों की संख्या बहुत कम है।
  2. उन्नत सुविधाओं का अभाव:
    इस सर्जरी के लिए अत्याधुनिक उपकरण, मॉनिटरिंग टेक्नोलॉजी, और ICU जैसी सुविधाएं आवश्यक होती हैं, जो अधिकांश अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हैं।
  3. जागरूकता की कमी:
    मरीज और उनके परिजन अक्सर इस सर्जरी की आवश्यकता और फायदे से अनजान रहते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि वे सही समय पर इलाज नहीं करा पाते।
  4. सर्जरी के जोखिम का डर:
    गंभीर चोट और मरीज की नाजुक हालत के कारण परिजन और डॉक्टर, दोनों ही ऑपरेशन से बचने की कोशिश करते हैं।
  5. अनुभव की कमी:
    इस तरह की जटिल सर्जरी के मामले कम होते हैं, जिससे डॉक्टरों को पर्याप्त अनुभव हासिल करने के मौके नहीं मिलते।

एस.एन. मेडिकल कॉलेज, आगरा ने यह साबित किया है कि सही समय पर लिया गया निर्णय और अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किसी भी मरीज के जीवन को बचा सकता है। इस प्रयास ने आगरा को चिकित्सा क्षेत्र में एक नई पहचान दी है।

Pawan Singh

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